किसानों के लिए खुशखबरी! अब फसल बचाने के लिए नहीं करना पड़ेगा महंगे पेस्टीसाइड का इस्‍तेमाल

Amit Ganju | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 10, 2019, 6:08 PM IST
किसानों के लिए खुशखबरी! अब फसल बचाने के लिए नहीं करना पड़ेगा महंगे पेस्टीसाइड का इस्‍तेमाल
कीड़ोंं को मारने की देशी और सस्ती तकनीक का ट्रायल किया जा चुका है.

कानुपर के चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के वैज्ञानिक देशी तकनीक विकसित करने में सफल हो गये हैं, जिससे कम कीमत में फसलों को बचाया जा सकता है.

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सब्जी की फसलों को कीड़ों से बचाने के लिये अब अंधाधुंध पेस्टीसाइड का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. जबकि मादा कीटों के हारमोन से तैयार पेस्ट की ओर कीट आकर्षित नहीं होंगे और अगर हुए तो चिपक कर बेहोश हो जाएंगे. इससे कीड़ों का प्रजनन रुक जायेगा. अच्‍छी बात ये है कि इस केमिकल से शरीर को किसी तरह का नुकसान भी नहीं पहुंचेगा.

जी हां, कानपुर के चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के वैज्ञानिक एक देशी तकनीक विकसित करने में सफल हो गये हैं. इससे कद्दू, ककड़ी, लौकी और तरोई आदि जमीन पर फैलने वाली सब्जियों की फसलों को मौसमी कीट के नुकसान से बचाने में सफलता हासिल होगी.

हो चुका है सफल ट्रायल
कीड़ोंं को मारने की देशी और सस्ती तकनीक का ट्रायल किया जा चुका है. गंगा किनारे वाले इलाकों में लखीमपुर खीरी, हरदोई, कन्नौज, कानपुर देहात आदि के सब्जी फार्मों में इसका परीक्षण सफल रहा है. शोधकर्ता वैज्ञानिक डॉ. राजीव और डॉ भूपेन्द्र कुमार सिंह का दावा है कि अब तक कीड़ों को पकड़ने के लिए जो भी ट्रैपर उपलब्ध हैं, यह उससे कई गुना सस्ता और कारगर है. जबकि चेन्नई की एक बड़ी कंपनी के अधिकारी इस तकनीक के रिजल्ट पर चर्चा करने विश्वविद्यालय आ रहे हैं.

गंगा किनारे वाले इलाकों में लखीमपुर खीरी, हरदोई, कन्नौज, कानपुर देहात आदि के सब्जी फार्मों में इसका परीक्षण सफल रहा है.


यह तकनीक देगी राहत
आपको बता दें कि सब्जियों को कीड़ों से हो रहे नुकसान से बचाने के लिये किसान पेस्टीसाइड का खूब प्रयोग करते हैं. इन खतरनाक केमिकल का कीड़ों पर एक सप्ताह से अधिक असर नहीं रहता है, जिससे कई बार डालना पड़ता. साथ ही यह घातक रसायन सब्जियों के माध्यम से लोगों के शरीर में पहुंचे जाता है. वहीं, किसानों पर भी इसका गलत असर पड़ता है. यकीनन नये ट्रैपर से इन सब दुष्प्रभावों से निजात मिलेगी.
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First published: July 10, 2019, 5:57 PM IST
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