सावधान! मंदिर में अखंड रामायण जारी है, दलित घरों में ही रहें
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हमीरपुर जिले के मौदहा कसबे का गढा गांव में इन दिनों तनाव का माहौल है, क्योंकि रामजानकी मंदिर के पुजारी ने बाकायदा नोटिस चस्पाकर तुगलकी फरमान सुनाया है कि दलित 10 दिनों तक अपने घरों में ही रहें, क्योंकि अखंड रामायण का पाठ मंदिर में चल रहा है.

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  • Last Updated: August 24, 2017, 1:57 PM IST
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इस साल 15 अगस्त को पूरे देश ने आजादी के 70 साल का जश्न मनाया. लेकिन आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश के कई गांव ऐसे हैं जो ऊंच-नीच और छुआछूत के भेदभाव से आजाद नहीं हो पाए हैं. इन गांवों में आज भी सामंतवादी प्रथा कायम है. उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक गांव के मंदिर में अखंड रामायण का पाठ होने की वजह से दलितों को उनके घरों में कैद रहने का फरमान सुनाया गया है.

हमीरपुर जिले के मौदहा कसबे का गढा गांव में इन दिनों तनाव का माहौल है, क्योंकि रामजानकी मंदिर के पुजारी ने बाकायदा नोटिस चस्पाकर तुगलकी फरमान सुनाया है कि दलित 10 दिनों तक अपने घरों में ही रहें, क्योंकि अखंड रामायण का पाठ मंदिर में चल रहा है.

मंदिर के बाहर पहरा देते लोग




हाथों में लाठी और डंडे लेकर मंदिर के अंदर और बाहर घूमते हुए ये लोग दरअसल पहरा दे रहे हैं. ये ऊंची जाति के वो लोग है जो मंदिर में हो रही अखंड रामायण की सुरक्षा के नाम पर पहरा दे रहे हैं. इस सुरक्षा की आड़ में यहां रहने वाले दलित लोगों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित किया जा चुका है. अगर धोखे से भी कोई छोटी जाति का शख्स इस मंदिर में प्रवेश करता है तो उसे महज इस लिए भगा दिया जाता है कि वो दलित है.
बकायदा मंदिर में एक बोर्ड लगाकर दलितों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी. विरोध और प्रशासनिक दबाव के बाद बोर्ड तो हटा लिया गया है, लेकीन अभी भी दलितों के प्रवेश पर रोक लगा हुआ है.

मंदिर में अखंड रामायण का पाठ करते लोग


मंदिर के पुजारी कुंवर बहादुर सिंह  ने खुद माना है कि उन्होंने बोर्ड लगाकर दलितों का प्रवेश रोका था क्योंकि वे  शराब पीकर आते हैं. उन्होंने कहा कि एक तख्ती पर हमने लिखकर लगाया था कि "जो कर्म से शुद्र हो और मांस-मदिरा का सेवन करते हों वे मंदिर में न आएं. क्योंकि यहां रामायण का पाठ चल रहा है."

दरअसल गढा गांव में दो तरह के लोग रहते हैं, एक वो जो मंदिर के अंदर जाकर भगवन की पूजा अर्चना कर सकते हैं और दूसरे वो जो मंदिर के बाहर से ही पूजा अर्चना करते हैं. मंदिर के अंदर जाने वाले सामान्य जाति के लोग हैं और बाहर से पूजा करने वाले दलित लोग हैं.

पुजारी कुंवर बहादुर सिंह ने यहां एक बोर्ड लगाकर दलितो के प्रवेश पर रोक लगा दी . पुजारी का दावा है कि यह मंदिर उनके पूर्वजों का है. पहले भी यहां दलितों के प्रवेश पर पाबंदी थी. इसलिए उन्होंने भी यहां दलितों के प्रवेश पर पाबंदी लगा रखी है. इस फरमान की वजह से अब गांव के दलित अब डरे, सहमे और सकते में हैं.

तुगलकी फरमान के बाद दलित बस्ती में सन्नाटा


एक दलित  राजू साहू  ने बताया कि किस तरह जब वे रामायण पढ़ने मंदिर गए तो उठाकर भगा दिया गया और फिर घरों में रहने का तुगलकी फरमान सुनाया गया.

एक अन्य दलित नीलम ने बताया कि ये सिर्फ रामायण का मामला नहीं है. बल्कि गांव के किसी भी धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है. नीलम के मुताबिक अगर वे मंदिर में प्रवेश करेंगे तो उनके लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा.

ईटीवी/न्यूज़18 ने जब मामले को उप जिलाधिकारी सुरेश कुमार मिश्रा को बताया तो उन्होंने कार्यवाही का भरोसा दिया, लेकीन भाषा वही रटी रटायी थी. उन्होंने राजस्व की एक टीम को मामले की जानकारी करने के लिए गांव भेजने का दावा किया.

उन्होंने कहा कि मामले की जांच करवाकर उचित कार्रवाई की जाएगी. कोई भी किसी को मंदिर में प्रवेश करने से नहीं रोक सकता. यह अपराध की श्रेणी में आता है.
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