मुंबई से पैदल बहराइच जा रहे 15 वर्षीय लड़के को होने लगी खून की उल्टियां, तड़प-तड़पकर तोड़ा दम
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मुंबई से पैदल बहराइच जा रहे 15 वर्षीय लड़के को होने लगी खून की उल्टियां, तड़प-तड़पकर तोड़ा दम
अगर सही समय पर उसे प्राथमिक उपचार मिल जाता तो शायद किशोर की जान बच जाती. (कॉन्सेप्ट इमेज)

युवक को तेज बुखार के साथ चक्कर आया था. इसके बाद वह जमीन पर गिर गया. अजनवी शहर में सिर्फ पुलिस (Police) से ही उम्मीदें थीं लेकिन कोई भी काम न आया.

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कानपुर. उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) जिले में एक बड़ी खबर सामने आई है. यहां पर एक किशोर की तड़प-तड़प कर मौत हो गई. इस घटना से पुलिस-प्रशासन के होड़ उड़ गए हैं. दरअसल, एक परिवार के 3 लोग मुंबई (Mumbai) से बहराइच (Bahraich) जा रहे थे. लेकिन ट्रक वाले ने उस परिवार को रास्ते में छोड़ दिया. ऐसे में परिवार के लोग पैदल ही बहराइच के लिए चलने लगे. जैसे ही परिवार कानपुर जिले में पहुंचा तो उनमें से एक 15 वर्षीय किशोर की तबीयत अचानक खराब हो गई और वह जमीन पर गिर गया.

जानकारी के मुताबिक, युवक को तेज बुखार के साथ चक्कर आया था. इसके बाद वह जमीन पर गिर गया. अजनवी शहर में सिर्फ पुलिस से ही उम्मीदें थीं लेकिन कोई भी काम न आया. ऐसे में उसके परिजन उसे लेकर पास के अस्पाताल की ओर भागे, लेकिन हॉस्पिटल के बाहर ही किशोर को खून की उल्टियां शुरू हो गई. फिर कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई. यह घटना देर रात 2 बजे की है.





पुलिसकर्मी मदद करने के लिए युवक के पास नहीं आए
कहा जा रहा है कि कोरोना के भय के चलते कोई भी पुलिसकर्मी मदद करने के लिए युवक के पास नहीं गया. अगर सही समय पर उसे प्राथमिक उपचार मिल जाता तो शायद किशोर की जान बच जाती. खास बात यह है कि मृतक किशोर का शव चकेरी नेशनल हाइवे के किनारे एक ग्रीन बेल्ट में काफी देर तक पड़ा हुआ था. पीड़ित परिजन शव के पास काफी देर तक बैठे थे, लेकिन तब तक किसी भी आलाधिकारी ने इन पीड़ितों की सुध नहीं ली. हालांकि सूचना मिलने के काफी देर बाद खानापूर्ति करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और आगे की कार्रवाई शुरू की. अब ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस लापरवाही के लिए दोषी कौन है?

अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं
बता दें कि लॉकडाउन के बाद से श्रमिक मजदूरों के साथ हो रही घटनाओं को लेकर जहां एक तरफ सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि श्रमिक मजदूर  नेशनल हाइवे पर पैदल नहीं चलें. यदि पैदल दिखते हैं तो उनके खाने-पीने का तत्काल प्रबंध कर उन्हें उनके गंतत्व तक भेजने के लिए बस की व्यवस्था की जाए, लेकिन कानपुर पुलिस पर इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा.

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