नाक से मोबाइल और एक उंगली से लैपटॉप चलाने वाले अनंत ने किसानों के लिए बना डाला अनोखा एप

एप की मदद से व्यापारी,खरीददारों और किसानों का सीधा सम्पर्क कराया जाएगा.

एप की मदद से व्यापारी,खरीददारों और किसानों का सीधा सम्पर्क कराया जाएगा.

Kanpur News: नाक से मोबाइल ऑपरेट करने और एक अंगुली से लैपटॉप चलाने वाले कानपुर के अनंत वैश्य ने किसानों के लिए  गुड़ का साथी एप (Application) बनाया है. इस एप को एकेटीयू के टॉप-6 में भी जगह मिली है. 

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कानपुर. कहते हैं कि 'मंजिलें उनको मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है,पंखों से कुछ नही होता हौसलों से उड़ान होती है', यह पंक्तियां कानपुर (Kanpur) के अनंत वैश्य (Anant Vaishya) पर बिलकुल सटीक बैठती हैं. दिव्यांग होने के बावजूद अनंत सॉफ्टवेयर डेवलपर (Software developer) बन कुशल उद्यमी बनना चाहते हैं. उसकी यह जिद और हौसला ही है कि उसने किसानों के लिए गुड़ का साथी एप (App) बनाने और उसे एकेटीयू के टॉप-6 में जगह मिली. वन डिस्ट्रिक वन प्रोजेक्ट के तहत होने वाली इस प्रतियोगिता के लिए वह एप बना रहा है. नाक से मोबाइल ऑपरेट करने और एक अंगुली से लैपटॉप चलाने वाले अंतत के सपने बहुत ऊंचे है जिसकी तरफ उसने अपना कदम बढ़ा दिया है.

सरकार की स्कीम वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत एकेटीयू ने सभी तकनीकी संस्थानों से समस्याओं के समाधान के लिए आइडिया मांगे थे. इस प्रतियोगिता में विभिन्न तकनीकी संस्थानों के 157 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिनमें चुने गए टॉप-6 में कानपुर शहर से अनंत वैश्य का नाम भी है. अनंत डॉ. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर हैंडीकैप्ड कॉलेज में बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र हैं. अनंत ने बताया कि उसे लगा कि गुड़ का उत्पादन करने वाले किसानों को उनकी लागत का सही मूल्य नहीं मिल पाता है. एक बाजार नहीं होने की वजह से किसान औने पौने दामों में गुड़ बेचने को मजबूर हो जाते हैं.

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ऐसे मदद करेगी एप
गुड़ का साथी एप की मदद से व्यापारी,खरीददारों और किसानों का सीधा सम्पर्क कराया जाएगा. एप में रजिस्टर करने के बाद किसान गुड़ की कीमत तय कर सकेंगे.किसान खुद अपने गुड़ की मार्केटिंग कर सकेंगे. इस एप पर अनंत काफी काम कर चुके हैं. आपको बता दें कि अनंत जन्मजात बीमारी के चलते दिव्यांग हैं. वह दोनों हाथों से कोई चीज पकड़ भी नहीं सकते. अनंत पैरों से चलने में भी सक्षम नहीं हैं. वह अपने दैनिक कार्यों के लिए भी दूसरों पर भी निर्भर हैं. अनंत में हौसला कूट-कूट कर भरा हुआ है. वह सॉफ्टवेयर डेवलपर बन कर समस्याओं को दूर करना चाहते हैं. वह अपनी शारीरिक अछमता को चुनौती मानते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं.

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अनंत में हौसला कूट-कूट कर भरा हुआ है. वह सॉफ्टवेयर डेवलपर बन कर समस्याओं को दूर करना चाहते हैं.



अनंत का कहना है कि जीवन में चुनौती नहीं तो जिन्दगी का मजा नहीं है. अनंत नाक से मोबाइल और एक अंगुली से लैपटॉप ऑपरेट करते हैं. अनंत के आइडिया को प्रदेश में टॉप-06 में जगह मिली है, जिसका प्रोटोटाइप डेवलप करने के लिए एकेटीयू से 12 हजार की मदद दी गयी है. इसे अगले महीने तक बना कर एकेटीयू की प्रतियोगिता में दिखाना होगा. अनंत अपने मेंटर की मदद से एप का प्रोटोटाइप बनाने में जुटे हुए हैं. अनंत की इस उपलब्धि से उनके कॉलेज के टीचर भी खासे खुश नजर आ रहे हैं. अनंत के मेंटर का कहना है कि अनंत ने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाया है. संस्थान स्तर से केवल मदद की जाती है यह अनंत की खुद की मेहनत है कि उसका आइडिया टॉप-6 में सेलेक्ट हुआ है.

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