यूपी के किसानों के साथ धोखा, माया और अखिलेश सरकार में करोड़ों का बड़ा घोटाला

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल (2007-2012) और उसके बाद सत्ता में आए अखिलेश यादव की सरकार (2012-2017) में 16.16 करोड़ रुपये के कृषि बीज के बिल फर्जी पाए गए.

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Updated: June 5, 2019, 12:43 PM IST
यूपी के किसानों के साथ धोखा, माया और अखिलेश सरकार में करोड़ों का बड़ा घोटाला
किसानों को बीज देने के नाम पर हुआ करोड़ों का घोटाला.(फाइल फोटो)
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Updated: June 5, 2019, 12:43 PM IST
यूपी में किसानों के साथ धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है. दरअसल गरीब किसानों को बांटने के लिए कई क्विंटल बीज खरीद कर उनको मुहैया कराए गए, लेकिन ये खरीद व आपूर्ति महज कागजों में हुई है. साफ है कि किसानों को इससे कुछ नहीं मिला. धोखाधड़ी के इस मामले में बीज खरीद की फर्जी रसीदों पर अधिकारियों के हस्ताक्षर व सरकार की मुहर का इस्तेमाल किया गया था.

माया और अखिलेश की सरकार में हुआ घोटाला
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती जांच में बताया गया कि इस घोटाले को आमतौर पर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान अंजाम दिया गया. अब तक 16.56 करोड़ रुपये की फर्जी रसीदों का पता चला है. माना जा रहा है कि ये इस बड़े घोटाले का अंश मात्र है. जबकि सरकारी धन के इस दुरुपयोग के संबंध में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने आर्थिक अपराध शाखा को पता लगाने का निर्देश दिया है कि बीज घोटाला सिर्फ कानपुर (सरकारी गोदाम) में ही हुआ या उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों में भी ऐसा हुआ.

ये हुई है कार्रवाई

कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उमाशंकर पाठक ने आईएएनएस बातचीत में कहा कि कानपुर पुलिस ने उत्तर बीज एवं विकास निगम की जांच के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है. ये घोटाला पिछले साल तब उजागर हुआ जब बीज निगम ने भुगतान के लिए अपना बिल कृषि विभाग के पास भेजा. जांच के दौरान 99 लाख रुपये का एक फर्जी बिल पाया गया. बाद में घोटाले की विभागीय जांच शुरू की गई.

सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल (2007-2012) और उसके बाद सत्ता में आए अखिलेश यादव के कार्यकाल (2012-2017) के दौरान 16.16 करोड़ रुपये के बिल फर्जी पाए गए.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिया ने दिया ये निर्देश
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़े खर्च वाले अहम मंत्रालयों के सचिवों को आंतरिक लेखापरीक्षा पर ध्यान देने का निर्देश दिया है, ताकि सक्षम तरीके से सरकार का संचालन सुनिश्चित हो. मुख्यमंत्री ने पहले ही भ्रष्टाचार का अड्डा बने पशुपालन और चकबंदी विभागों के कई भ्रष्ट अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. इससे पहले गोमती रिवर फ्रंट योजना और खनन घोटाला जैसे भ्रष्टाचार से संबंधित अहम मामलों की जांच मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी.

(एजेंसी इनपुट)

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First published: June 5, 2019, 11:10 AM IST
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