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खुशखबरी! कानपुर को जल्द मिलेगी मेट्रो की सौगात, Lockdown में भी नहीं सुस्त पड़ी काम की रफ्तार

कानपुर मेट्रो का काम तय समय में पूरा होने की उम्मीद

कानपुर मेट्रो का काम तय समय में पूरा होने की उम्मीद

आईआईटी (IIT Kanpur) से मोतीझील के बीच तैयार हो रहे लगभग 9 किमी लंबे प्रयॉरिटी कॉरिडोर (Priority corridor) के अतंर्गत सड़क पर तैयार हो चुके पिलर्स पर पियर कैप्स रखने का काम शुरू हो चुका है.

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    कानपुर. जनपदवासियों के लिए खुशखबरी देते हुए मेट्रो रेल कारपोरेशन (Metro Rail Corporation) ने दावा किया है कि मेट्रो का काम तय समय में पूरा हो जाएगा. यूपीएमआरसी (UPMRC) के प्रबंध निदेशक कुमार केशव का कहना है कि कानपुर में मेट्रो निर्माण कार्य रफ्तार पकड़ रहा है और यूपीएमआरसी की पूरी कोशिश है कि लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से हुए समय के नुकसान की भरपाई हो और निर्माण कार्य अपनी समय सीमा में पूरा हो. उनका दावा है कि उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) के इंजीनियर लॉकडाउन की वजह से पिछड़े हुए मेट्रो के निर्माण कार्य को फिर से रफ्तार देने में कामयाब हो रहे हैं. कास्टिंग यार्ड में पियर कैप्स और यू-गर्डर्स की ढलाई का काम तेजी के साथ किया जा रहा है.

    यूपी के कामगारों को काम में दी जा रही प्राथमिकता
    बता दें कि आईआईटी (IIT Kanpur) से मोतीझील के बीच तैयार हो रहे लगभग 9 किमी लंबे प्रयॉरिटी कॉरिडोर (Priority corridor) के अतंर्गत सड़क पर तैयार हो चुके पिलर्स पर पियर कैप्स रखने का काम शुरू हो चुका है. मेट्रो इंजीनियरों की कुशल रणनीति की बदौलत लॉकडाउन से पहले की अपेक्षा श्रमिकों की संख्या सीमित होते हुए भी काम की रफ्तार लगातार बढ़ रही है.

    एमडी कुमार केशव ने जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में लॉकडाउन के बाद कास्टिंग यार्ड के अंदर पहले पियर-कैप की कास्टिंग पूरी हुई और यू-गर्डर्स की ढलाई का काम भी फिर से शुरू कर दिया गया. लॉकडाउन के पूर्व 20 पियर कैप्स की कास्टिंग पूरी हो चुकी थी और दोबारा काम शुरू होने के बाद 19 जून को कास्टिंग यार्ड में 21वें पियर कैप की कास्टिंग भी पूर्ण हुई. यूपीएमआरसी के इंजीनियर जल्द ही यू-गर्डर्स को पियर कैप्स के ऊपर रखने (इरेक्ट करने) की तैयारियों में जुटे हुए हैं और उन्हें उम्मीद है कि जुलाई में इस काम की भी शुरुआत हो जाएगी. वो बताते हैं कि लॉकडाउन के बाद सीमित श्रमिकों की उपलब्धता की चुनौती से जूझते हुए यूपीएमआरसी ने अधिकांश रूप से प्रदेश के ही कामगारों से काम करवाने की रणनीति अपनाई है और फिलहाल काम पर लगे 600 मजदूरों में से 400 मजदूर यूपी के ही हैं. अन्य जगहों से भी कामगारों को वापस लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं.

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    पियर कैप और यू-गर्डर
    यह मेट्रो के ढांचे का वह हिस्सा होता है, जिसे पियर या पिलर के ऊपर रखा जाता है. इन्हें कास्टिंग यार्ड में तैयार किया जाता है और उसके बाद क्रेन की सहायता से सड़क पर बने पियर्स या पिलर्स के ऊपर लाकर रखा जाता है. पियर पर पियर कैप रखने के बाद, उन पर यू-गर्डर रखे जाते हैं, जिनपर पटरियां बिछाई जाती हैं. 30 अप्रैल को सरकार और जिला प्रशासन से कास्टिंग यार्ड परिसर के भीतर निर्माण कार्य और संबद्ध गतिविधियों की फिर से शुरुआत करने की अनुमति मिलने के बाद से यूपीएमआरसी सीमित कामगारों के साथ ही काम को पटरी पर लाने के लिए प्रयासरत है और अब यूपीएमआरसी इंजीनियरों के प्रयासों ने रंग लाना शुरू कर दिया है.

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