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1857 की क्रांति का गवाह है कानपुर का ऐतिहासिक 'पाताल तोड़ कुआं', रानी लक्ष्मीबाई से है खास कनेक्शन

बिठूर के नाना राव पार्क में मौजूद इस कुएं का रखरखाव और संरक्षण उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग कर रहा है. वहीं केयरटेकर राम प ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- अखंड प्रताप सिंह

कानपुर. देश में 1857 में शुरू हुई क्रांति में कानपुर भी दमखम के साथ आगे आया था. कानपुर हमेशा ही ऐतिहासिक और पौराणिक इतिहास में याद किया जाता है. कानपुर अपने आप में कई इतिहास समेटे हुए है. 1857 की क्रांति से जुड़ी कई विरासतें आज भी यहां मौजूद हैं, जिनमें से एक है ऐतिहासिक कुआं भी है. यह ऐतिहासिक कुंआ नाना राव पार्क बिठूर में स्थित है. इसके चारों ओर लोहे की एंगल लगाकर इसको संरक्षित किया जा रहा है. इसकी कहानी अपने आप में क्रांति की अलख जगाने वाली है.

इतिहासकार समर बहादुर सिंह बताते हैं कि इसका निर्माण 1835 में नाना साहब ने कराया था. यह कुआं मुख्य रूप से अस्तबल में मौजूद घोड़ों के पानी पीने के लिए बनाया गया था. रानी लक्ष्मीबाई का घोड़ा सारंग भी इसी कुंए का पानी पीता था. जब 1857 में अंग्रेजों ने बिठूर पर हमला कर दिया था, तब बिठूर की सेना अंग्रेजों द्वारा परास्त हो गई थी और अंग्रेज महल में घुस आए थे. उस समय वहां मौजूद महिलाओं और बच्चों ने इसी कुएं में कूदकर अपनी जान दे दी थी. वे अंग्रेजों के हाथ नहीं आना चाहती थीं. इसलिए उन्होंने हंसते-हंसते इस कुएं में छलांग लगा दी थी और वीरगति को प्राप्त हो गई थीं.

यह कुआं उस ऐतिहासिक क्रांति का भी गवाह है. कहा जाता है कि इस कुएं का पानी कभी नहीं सूखता है. इतने साल बीत जाने के बावजूद अभी भी इस कुएं में पानी मौजूद है.

जानिए क्या बोले जानकार

यह कुआं उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संरक्षित किया जा रहा है. बिठूर के नाना राव पार्क में मौजूद इस कुएं का रखरखाव पर्यटन विभाग करता है. वहीं केयरटेकर राम प्रसाद ने बताया कि इस कुए के बारे में जानकारी लेने दूर-दूर से लोग आते हैं. विदेश से भी सैलानी जब बिठूर की क्रांति के बारे में जानने आते हैं तो वह इस कुएं का दीदार करने जरूर आते हैं. इतिहासकार समर बहादुर सिंह ने बताया कि नाना राव पेशवा महल के परिसर के आसपास कुल आठ पाताल तोड़ कुआं थे. पाताल तोड़ कुआं की बात की जाए तो ऐसे कुएं होते हैं जो बेहद गहरे होते हैं और यह कभी सूखते नहीं है. वहीं इनमें से 7 कुओं का अब कोई निशान नहीं बचा है. लेकिन अभी भी एक कुआं क्रांति की विरासत के रूप में अभी भी इतिहास को समेटे हुए है.

Tags: 1857 Kranti, Kanpur news

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