..तो 1998 में ही मारा जाता विकास दुबे, हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार करने वाले कॉन्स्टेबल का खुलासा
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..तो 1998 में ही मारा जाता विकास दुबे, हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार करने वाले कॉन्स्टेबल का खुलासा
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने उज्जैन से कानपुर लाए जाने के क्रम में भागने की कोशिश की थी जिसके बाद एसटीएफ ने एनकाउंटर में उसे मार गिराया था (न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)

एसएचओ पर फायरिंग कर भाग रहे विकास दुबे (Vikas Dubey) का कॉन्स्टेबल देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने साथी संजय सिंह के साथ पीछा किया. पीछा करते हुए देवेंद्र ने विकास दुबे (Vikas Dubey Encounter) पर नजदीक से फायर किया लेकिन गोली मिस हो गई. उसके बाद इन दोनो जाबांज सिपाहियों ने गाड़ी टकरा कर विकास दुबे को नीचे गिरा दिया और उसे दबोच लिया

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  • Last Updated: July 15, 2020, 11:32 PM IST
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बलरामपुर. हिस्ट्रीशीटर अपराधी विकास दुबे (Viaks Dubey) भले ही मुठभेड़ में मार गिराया गया हो लेकिन उससे जुड़े खुलासे अभी भी हो रहे हैं. इसी कड़ी में बलरामपुर पुलिस के एक कॉन्स्टेबल ने खुलासा किया है कि विकास दुबे (Vikas Dubey Encounter) आज से 22 साल पहले ढेर हो गया होता यदि उसके साथी जांबाज कॉन्स्टेबल का फायर मिस न हुआ होता. बलरामपुर जिला न्यायालय के सम्मन सेल में तैनात कॉन्स्टेबल देवेंद्र प्रताप सिंह ने वर्ष 1998 में अपने साथी कॉन्स्टेबल संजय सिंह के साथ विकास दुबे को तब गिरफ्तार किया था जब वो एक इंस्पेक्टर पर फायरिंग (Firing) कर भाग रहा था. यह देख कॉन्स्टेबल देवेंद्र प्रताप सिंह ने पीछा करते हुए विकास दुबे पर फायर किया था लेकिन गोली मिस हो जाने से विकास दुबे की जान बच गई. लेकिन उसे जिंदा पकड़ लिया गया था.

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विकास दुबे के संबंध में बड़ा खुलासा करने वाले पुलिस के जाबांज कॉन्स्टेबल देवेंद्र प्रताप सिंह वर्ष 1998 में कानपुर के चमनगंज थाने में तैनात थे. कल्याणपुर थाने के तत्कालीन एसएचओ हरिमोहन सिंह के साथ देवेंद्र प्रताप सिंह की स्पेशल स्क्वाड में ड्यूटी थी. दिसंबर 1998 में हुई इस घटना का खुलासा करते हुए देवेंद्र प्रताप ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि विकास दुबे किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है. उसे पकड़ने के लिये कल्याणपुर के एसएचओ हरिमोहन सिंह भारी पुलिस फोर्स के साथ
तैनात थे. बुलेट मोटरसाइकिल से भाग रहे विकास दुबे को जब रोकने की कोशिश की गई तो
उसने एसएचओ पर फायर कर दिया और बुलेट चढ़ा कर भागने लगा.



कॉन्स्टेबल ने पीछा कर फायर किया लेकिन गोली मिस होने से विकास दुबे बच गया

यह देख आगे तैनात कॉन्स्टेबल देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने साथी संजय सिंह के साथ उसका पीछा किया. पीछा करते हुए देवेंद्र ने विकास दुबे पर नजदीक से फायर किया लेकिन गोली मिस हो गई. उसके बाद इन दोनो जाबांज सिपाहियों ने गाड़ी टकरा कर विकास दुबे को नीचे गिरा दिया और उसे दबोच लिया. इसी घटना में विकास दुबे का पैर टूटा था. कॉन्स्टेबल देवेंद्र प्रताप सिंह ने इस बात का भी खुलासा किया कि उज्जैन में गिरफ्तारी के बाद कानपुर लाए जाते समय विकास दुबे ने जिस देवेंद्र से अपनी दुश्मनी की बात कही थी वो सीओ देवेंद्र मिश्रा नहीं बल्कि वो स्वयं है.

कॉन्स्टेबल देवेंद्र ने बताया कि उस घटना के बाद विकास दुबे ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी. इस धमकी के बाद देवेंद्र रिमांड पर आए विकास दुबे से जब मिलने पहुंचा और धमकी देने की बाबत बात की तो विकास दुबे ने उस वक्त कहा था कि मै तो गुंडा हूं, आगे मुझे राजनीति करनी है. इसलिए मेरी पुलिस से कभी कोई दुश्मनी नहीं हो सकती.

दो जुलाई की रात कानपुर जिले के बिकरु गांव में आठ जाबांज पुलिसकर्मियों की शहादत पर दुखी कॉन्स्टेबल देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यदि 1998 में वो फायर मिस न हुआ होता तो आज हमारे सभी साथी जिंदा होते. जिले के एसपी देवरंजन वर्मा ने बताया कि 1998 में कॉन्स्टेबल देवेंद्र प्रताप सिंह कानपुर में ही तैनात थे और कल्याणपुर के एसएचओ को घायल कर भाग रहे अपराधी विकास दुबे को धर दबोचा था.
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