पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे से यारी नहीं निभाई होती तो 'खाकी' का रंग लाल न होता!
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पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे से यारी नहीं निभाई होती तो 'खाकी' का रंग लाल न होता!
साल 2001 में विकास दुबे ने राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की थाने में हत्या कर दी थी (फाइल फोटो)

19 साल पहले विकास दुबे (Vikash Dube) ने थाने में घुसकर राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या (Murder) कर दी थी. लेकिन पुलिसवालों ने इस मामले में उसके खिलाफ कोर्ट (Court) में गवाही नहीं दी.

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कानपुर. उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की शहादत (Martyrdom) के बाद पुलिस हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे (Vikash Dube) के पीछे पड़ी है. मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस के आला अधिकारी तक विकास दुबे की गिरफ्तारी होने तक चैन से नहीं बैठने की बात कह रहे हैं. लेकिन इसी विकास दुबे के लिए खाकी पहनने वाले पुलिसवालों ने अपने कर्तव्यों से गद्दारी नहीं की होती, तो खाकी का रंग लाल नहीं होता.

बात 19 साल पहले की है. राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या मामले में गवाह पुलिसवालों ने विकास दुबे के खिलाफ बयान नहीं दिए. जिसके बाद थाने में घुसकर राज्य मंत्री को मौत के घाट उतारने वाला दीपू दुबे बाइज्जत बरी हो गया. उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए मोस्ट वांटेड बन चुके विकास दुबे ने एक दिन पहले ही आठ पुलिसकर्मियों के खून से अपने हाथ रंगे हैं. अपने साथियों के साथ उसने सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया. वहीं सात गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

2001 में थाने में घुसकर की थी राज्यमंत्री की हत्या 



हम आपको बताते हैं उस घटना के बारे में जिसमें अगर पुलिस ने अपना कर्तव्य निभाया होता, तो विकास खुले आसमान के नीचे नहीं बल्कि सलाखों के पीछे होता. बात 1996 की है. यूपी में विधानसभा चुनाव हो रहे था. कानपुर की चौबेपुर विधानसभा सीट से हरि किशन श्रीवास्तव और संतोष शुक्ला चुनाव लड़े थे. इस चुनाव में हरि किशन श्रीवास्तव को जीत हासिल हुई थी. इसी दौरान हरिकिशन का विजय जुलूस निकाला जा रहा था. इसी बात को लेकर हरकिशन और संतोष के बीच विवाद हो गया था. इस मामले में विकास दुबे का नाम भी आया था और पुलिस ने उस पर मामला भी दर्ज किया था. बस यही से विकास दुबे की भाजपा नेता संतोष शुक्ला से दुश्मनी शुरू हो गई थी. वह कई साल इंतजार करता रहा और उसे बदला लेने का मौका मिला 2001 में.
संतोष शुक्ला को राज्यमंत्री का दर्जा हासिल था. नवम्बर के महीने में विकास ने शिवली के चेयरमैन रहे लल्लन बाजपेई को घेर रखा था. इसकी सूचना मिलने पर संतोष शुक्ला थाना शिवली पहुंचे थे. संतोष शुक्ला के शिवली में पहुंचने की सूचना पर विकास दुबे साथियों के साथ थाने में घुस गया और वहां पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर संतोष शुक्ला की हत्या कर दी. जिसके बाद वह फरार हो गया. तकरीबन 6 महीने बाद उसने कोर्ट में सरेंडर किया. मामला ट्रायल पर गया उससे पहले ही विकास ने अपनी राजनीतिक पहुंच और प्रभाव के चलते गवाहों को मैनेज करना शुरू कर दिया. कुछ लोगों को धमकाया गया तो किसी को रुपए देकर खरीद लिया गया. पुलिसकर्मियों ने भी विकास के खिलाफ गवाही नहीं दी. जिसके चलते विकास पर इल्जाम सिद्ध नहीं हो सका और वह अदालत से हत्या के इस मामले में बरी कर दिया गया.

क्या कहना है संतोष शुक्ला के परिजनों का?

मृतक संतोष शुक्ला के परिजनों का कहना है कि अगर उस समय पुलिस ने अपनी भूमिका सही से निभाई होती तो विकास को कोर्ट से सजा मिलती. उनके भाई मनोज शुक्ला ने कहा कि उनके भाई को तो इंसाफ नहीं मिल सका. अब विकास ने वर्दीवालों के खून से अपने हाथ रंगे हैं. विभाग अपने कर्मचारियों और अधिकारियों की हत्या का बदला ले ले, तो वह मान लेंगे कि उनको इंसाफ मिल गया है.
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