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IIT Kanpur का दावा, जल्द ही रौद्र रूप दिखा सकती है मोक्षदायिनी गंगा

IIT Kanpur का दावा, जल्द ही रौद्र रूप दिखा सकती है मोक्षदायिनी गंगा

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IIT Kanpur ने ISC Bengluru के साथ गंगोत्री से ऋषिकेश तक किए गए शोध में किया दावा

IIT कानपुर ने अपने शोध में दावा किया है कि मोक्षदायिनी गंगा नदी जल्द ही अपना रौद्र रूप दिखा सकती है.इसके पीछे की वजह नदी के प्रवाह का स्वरूप बदलना बताई गई है.दरअसल,भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (IIT), कानपुर और भारतीय विज्ञान संस्थान (ISC), बेंगलुरु ने बाढ़ के पूर्वानुमान के लिए गंगोत्री ग्लेशियर से ऋषिकेश तक 21 हजार वर्ग किमी क्षेत्र का अध्ययन किया

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    IIT कानपुर ने अपने शोध में दावा किया है कि मोक्षदायिनी गंगा नदी जल्द ही अपना रौद्र रूप दिखा सकती है.इसके पीछे की वजह नदी के प्रवाह का स्वरूप बदलना बताई गई है.दरअसल,भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (IIT), कानपुर और भारतीय विज्ञान संस्थान (ISC), बेंगलुरु ने बाढ़ के पूर्वानुमान के लिए गंगोत्री ग्लेशियर से ऋषिकेश तक 21 हजार वर्ग किमी क्षेत्र का अध्ययन किया. इसमें पाया कि बाढ, बांध और बैराज के निर्माण से बाढ़ क्षेत्र तेजी से बदल रहा है. उनके शोध को नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट ने भी प्रकाशित किया है. अब यह रिपोर्ट जलशक्ति मंत्रालय को भेजी जाएगी.

    50 साल के आंकड़ों के अध्यन के बाद लगाया अनुमान
    आइआइटी कानपुर के भू-विज्ञान विभाग में प्रोफेसर डा.राजीव सिन्हा ने बताया कि उन्होंने डा. प्रदीप मजूमदार व सोमिल स्वर्णकार के साथ एक साल तक वर्षा,बाढ़,बैराज-बांध निर्माण,गाद के 50 साल के आंकड़ों का विश्लेषण किया.इसमें पता चला कि गंगोत्री ग्लेशियर से निकलने वाली गंगा नदी और सतोपंथ ग्लेशियर से शुरू होने वाली अलकनंदा नदी के प्रवाह और बेसिन में काफी बदलाव हुआ है. अध्ययन में यह भी पता लगा है कि अलकनंदा बेसिन में वर्ष 1995 से वर्ष 2005 तक पानी का प्रवाह दोगुना हो चुका है.इसे नदी का चरम प्रवाह माना गया है.वहीं,गंगा के बेसिन में अभी इतना परिवर्तन नहीं हुआ है,लेकिन आने वाले वर्षों में इसमें भी चरम प्रवाह का अनुमान लगाया जा रहा है.उन्होंने बताया कि माना जा रहा है कि नदियों के स्वरूप में बदलाव होने से भविष्य में प्रवाह में वृद्धि होगी और गंगा बेसिन में बाढ़ का क्षेत्र विस्तारित हो सकता है.

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आने वाली चुनौतियों की पहले से की जा सकेगी तैयारी
    डा. राजीव सिन्हा की माने तो जल विज्ञान माडल की मदद से बाढ़ का सटीक पूर्वानुमान देने में आसानी होगी और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का भी पहले से पता लगाया जा सकेगा.जिसके चलते हम किसी भी चुनौती के लिए पहले से तैयार रहेंगे और राहत बचाव के इंतजाम किए जा सकेंगे.यही नहीं इस डाटा से नदियों के उच्च प्रवाह को कम करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करके संरचनात्मक प्रक्रिया भी तैयार की जा सकती है.बता दें कि जल विज्ञान माडल में सामान्य प्रवाह,गाद बढऩे के बाद बढ़े जलस्तर और पानी के वेग के आधार पर आकलन किया जाता है कि बाढ़ का स्वरूप कैसा होगा.इसमें यह भी देखा जाता है कितने समय में कितना प्रवाह बढ़ा है.

    चुनौती से निपचने को बैराज व बांध की साफ सफाई सबसे ज्यादा जरूरी
    प्रो. राजीव सिन्हा कहते है कि वर्तमान व भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बांध और बैराज बनाना जरूरी है,लेकिन उससे ज्यादा साफ-सफाई और गाद प्रबंध जरूरी है.इसके सुझाव जलशक्ति मंत्रालय को भी भेजा जाएगा.इसके जरिये बाढ़ आदि त्रासदी पर काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकता है.

    (रिपोर्ट आलोक तिवारी)

    Tags: Iit kanpur, Kanpur news

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