ISRO के 'मिशन पॉसिबल' चंद्रयान 2 पर IIT-कानपुर दे रहा है तकनीकी मदद

भारत 10 साल में दूसरी बार चांद पर जाने वाला अपना मिशन पूरा करने जा रहा है. इस मिशन में आईआईटी-कानपुर इसरो को तकनीकी मदद दे रहा है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 6, 2019, 7:42 PM IST
ISRO के 'मिशन पॉसिबल' चंद्रयान 2 पर IIT-कानपुर दे रहा है तकनीकी मदद
चंद्रयान 2 मिशन 15 जुलाई को अंतरिक्ष में होगा रवाना.
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Updated: July 6, 2019, 7:42 PM IST
पूरे विश्व की निगाहें भारत की महत्वाकांक्षा अंतरिक्ष परियोजना चंद्रयान-2 पर लगी हुई हैं. भारत 10 साल में दूसरी बार चांद पर जाने वाला अपना मिशन पूरा करने जा रहा है. इस मिशन की एक बड़ी विशेषता यह है कि आईआईटी-कानपुर इसमें इसरो को तकनीकी मदद दे रहा है. चंद्रयान-2 को भारत में निर्मित जीएसएलवी मार्क III रॉकेट 15 जुलाई को लेकर अंतरिक्ष में रवाना होगा. इसरो इस मिशन के जरिए चंद्रमा के कई अज्ञात रहस्यों का अध्ययन करेगा.

आईआईटी-कानपुर ने मोशन प्लानिंग का किया विकास
मिशन में इस्तेमाल हो रहे रोवर में लगे कई तकनीकों का विकास आईआईटी कानपुर द्वारा किया गया है. संस्थान द्वारा चंद्रयान-2 के लिए विकसित किया गया मोशन प्लानिंग इस मिशन का एक महत्वपूर्ण तकनीक है. इस तकनीक के जरिए चंद्रयान-2 का रोवर चांद की सतह पर सही जगह लैंड कर सकेगा. बता दें कि इस तकनीक का निर्माण आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर केए वेंकटेश और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर आशीष दत्ता द्वारा किया गया है.

चंद्रयान-2 को भारत में निर्मित जीएसएलवी मार्क III रॉकेट अंतरिक्ष में लेकर जाएगा.


मिशन चंद्रयान 2 खास खनिजों की करेगा खोज
चंद्रयान मिशन की जानकारी साझा करते हुए प्रोफेसर आशीष ने कहा कि इस यान का कुल द्रव्यमान 3.8 टन है. इस यान के तीन महत्वपूर्ण हिस्से हैं-ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर. आईआईटी कानपुर द्वारा विकसित किए गए मोशन प्लानिंग सिस्टम के द्वारा चांद की धरातल पर रोवर के उतरने प्लानिंग का काम किया जाएगा. इसरो के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर ने बताया था कि भारत का दूसरा मिशन चंद्रयान-2, चंद्रमा की सतह पर कुछ खास खनिजों को खोजने के लिए जाएगा.

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा चंद्रयान 2
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इसरो के चेयरमैन के सिवान ने बताया था कि हम चांद पर एक ऐसी जगह जा रहे हैं, जो अभी तक दुनिया से अछूती रही है. यह है चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव. वहीं अंतरिक्ष विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि इस मिशन के दौरान ऑर्बिटर और लैंडर आपस में जुड़े हुए होंगे. इन्हें इसी तरह से GSLV MK III लॉन्च व्हीकल के अंदर लगाया जाएगा.

रोवर को लैंडर के अंदर रखा जाएगा. लॉन्च के बाद पृथ्वी की कक्षा से निकलकर यह रॉकेट चांद की कक्षा में पहुंचेगा. इसके बाद धीरे-धीरे लैंडर, ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा. इसके बाद यह चांद के दक्षिणी ध्रुव के आस-पास एक पूर्वनिर्धारित जगह पर उतरेगा. बाद में रोवर वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चंद्रमा की सतह पर निकल जाएगा.

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First published: July 6, 2019, 7:42 PM IST
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