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IIT कानपुर जल्द बनेगा मेडिसिन रिसर्च सेंटर, डिजिटल दवाओं पर होगा शोध

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 2, 2019, 8:59 AM IST
IIT कानपुर जल्द बनेगा मेडिसिन रिसर्च सेंटर, डिजिटल दवाओं पर होगा शोध
IIT कानपुर जल्द बनेगा मेडिसिन रिसर्च सेंटर

आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर अभय करंदीकर के अनुसार, भविष्य में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में गंभीर चुनौतियां आएंगी. इससे निपटने का तरीका तकनीक पर ही आधारित होगा. तैयार होने के बाद यह देश में अपने किस्म का पहला ऐसा केंद्र होगा, जहां बेहतरीन और गुणवत्तापरक रिसर्च होगी.

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कानपुर. इंजिनियरिंग और तकनीक के सलूशन देने में अग्रणी आईआईटी कानपुर कुछ साल बाद चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी कामयाबी के झंडा गाड़ेगा. इसकी वजह है, यहां बनने वाला सेंटर फॉर इंजिनियरिंग इन मेडिसिन. अमेरिका के मेहता फैमिली फाउंडेशन के आर्थिक सहयोग से बनने वाले सेंटर में री-जेनरेटिव, मॉलिक्यूलर और डिजिटल दवाओं पर शोध होगा. शुक्रवार को दोनों पक्षों में एमओयू साइन हो गया. माना जा रहा है कि देश में अपने तरह के पहले रिसर्च सेंटर से भविष्य में दवाओं के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन होंगे.

प्रोफेसर बीवी फणी के अनुसार, देश में बीमारियों पर काम करने के लिए फिलहाल एम्स जैसे संस्थान हैं. यहां काम का दबाव बहुत ज्यादा है और एक सीमा के बाद रिसर्च की सुविधाएं नहीं हैं. मौजूदा दौर में चिकित्सा विज्ञान को इंजिनियरिंग से जोड़ने की जरूरत है. आईआईटी कानपुर के कई विभागों से लखनऊ के कई चिकित्सा संस्थानों को महत्वपूर्ण उपाय उपलब्ध कराए जा चुके हैं. इसी क्रम में अमेरिका के मेहता फैमिली फाउंडेशन ने आईआईटी कानपुर को दवाओं में इंजिनियरिंग करने के लिए सेंटर बनाने में मदद की है. अगले दो साल में सेंटर निर्माण के लिए 40 करोड़ रुपये मिलेंगे. उपकरणों और अन्य सुविधाओं के लिए आंतरिक फंडिंग समेत कुछ और उपाय किए जाएंगे.

दोनों पक्षों में एमओयू साइन
दोनों पक्षों में एमओयू साइन


डिजिटल मेडिसिन पर होगा शोध

आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर अभय करंदीकर के अनुसार, भविष्य में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में गंभीर चुनौतियां आएंगी. इससे निपटने का तरीका तकनीक पर ही आधारित होगा. तैयार होने के बाद यह देश में अपने किस्म का पहला ऐसा केंद्र होगा, जहां बेहतरीन और गुणवत्तापरक रिसर्च होगी. यहां पर री-जेनरेटिव, मॉलिक्यूलयर और डिजिटल मेडिसिन पर मुख्स फोकस रखा जाएगा. इन तीन क्षेत्रों को खासतौर पर इसलिए चुना गया है कि भविष्य में इनमें क्रांतिकारी बदलावों की उम्मीद की जा रही है. चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में बायो साइंसेज और बायो-इंजिनियरिंग विभाग (बीएसबीई) पहले ही गंभीर काम कर रहा है, जो इस सेंटर के लिए नींव का काम करेगा.

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में बायो साइंसेज और बायो-इंजीनियरिंग विभाग (बीएसबीई) पहले ही गंभीर काम कर रहा है, जो इस सेंटर के लिए नींव का काम करेगा. योजनानुसार जब यह केन्द्र पूरी तरह से चालू हो जाएगा तब इसमें 20 से 25 संकाय सदस्य होंगे. जिसमें 100 से 125 पीएचडी छात्र, 40 से 50 छात्र एम-टेक तथा 25 से 30 छात्र एमएस, कुल मिलाकर 175 से 200 छात्र सभी संकायों के होंगे. कुछ दशकों बाद इस केंद्र के अपने अनूठे और गुणवत्तापरक अनुसंधान तथा दक्ष जनशक्ति के संदर्भ में भारत के अन्दर सबसे अच्छे केन्द्रों में से एक बनने की संभावना है.

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First published: November 2, 2019, 8:59 AM IST
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