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मेक इन इंडिया के तहत बनाई लकड़ी की गीता, PMO से आया बुलावा

मेक इन इंडिया के तहत बनाई लकड़ी की गीता, PMO से आया बुलावा

पिता की मौत के बाद काफी संघर्षो से संदीप ने पढ़ाई की और साथ-साथ परिवार का पालन पोषण भी किया.

पिता की मौत के बाद काफी संघर्षो से संदीप ने पढ़ाई की और साथ-साथ परिवार का पालन पोषण भी किया.

पिता की मौत के बाद काफी संघर्षो से संदीप ने पढ़ाई की और साथ-साथ परिवार का पालन पोषण भी किया.

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' को कानपुर के एक युवक ने बढ़ाने का काम किया है. इस युवक ने लकड़ी की ऐसी गीता बनाई है जिसमें 706 स्लोक और 18 अध्याय है और 32 पन्ने है. यह सभी कुछ लकड़ी के स्क्रेप से तैयार किये गया है. यह युवक जब गीता बना रहा था तब उसने कहा था कि यह गीता गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को गिफ्ट करेगा. आखिरकार पिछले शनिवार को पीएमओ कार्यालय से फोन आया कि आप अपनी गीता लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय आ सकते हैं.

    बर्रा थाना क्षेत्र के जरौली फेज टू में रहने वाले संदीप सोनी का जीवन संघर्ष से भरा हुआ रहा है, लेकिन उसकी लगन और मेहनत बेकार नही गई. संदीप के परिवार में मां सरस्वती, पत्नी पूजा सोनी और दो मासूम बच्चे हैं. दरअसर पिता की मौत के बाद काफी संघर्षो से संदीप ने पढ़ाई की और साथ-साथ परिवार का पालन पोषण भी किया.

    उसने बताया कि 2008 में कानपुर से कारपेंटर ट्रेड आईटीआई किया. आईटीआई करने के बाद दादानगर में लोहिया स्टार लिंगर में नौकरी लग गई. काम से आने के बाद जो भी समय मिलता था उसमें लकड़ी की गीता बनाने का काम करता था. उसने इसे 2009 में बनान शुरू किया था और काम 2013 में समाप्त हुआ. जिसको बनाने में लगभग 20 हजार रूपए का खर्चा आया है. इसमें गीता के स्लोक को बनाकर लकड़ी के फ्रेमो में चिपकाया गया है. एक स्लोक लिखने में चार से पांच दिन का समय लग जाता था. पूरी गीता तीन सालों में पूरी होकर तैयार हुई.

    संदीप ने बताया कि जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्हें वह टीवी में देखा करता था और उनके काम से बहुत प्रभावित था. जब उनका नाम देश के प्रधानमंत्री के लिए घोषित किया गया तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नही रहा. जब वह प्रधानमंत्री बन गए तो उसने उनसे मिलकर उनको गीता गिफ्ट करने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं मिली.

    लोकसभा चुनाव के दौरान जब वे पहली बार कानपुर रैली के लिए आये थे तब भी संदीप ने प्रयास किया लेकिन किसी ने मिलने नही दिया. संदीप ने बताया, 'प्रधानमंत्री बनने के बाद 26 जून 2014 को दिल्ली गया और पूछते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय पंहुचा जहा पर एक लेटर दे कर वापस लौट आया. लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद जब कोई जवाब नही आया तो 2 अगस्त 2014 को एक आरटीआई डाली थी. आरटीआई का जवाब आया कि प्रधानमंत्री के निजी सचिव को एक लेटर भेजो. इसके बाद निजी सचिव को एक लेटर भेजा. लगातार पीएमओ कार्यालय फोन करते रहा. तब जाकर 20 फरवरी 2016 को पीएमओ कार्यालय से फोन आया की आप अपनी गीता लेकर पीएमओ कार्यालय आ जाओ. इसके बाद राहत की सांस ली और पूरे परिवार में ख़ुशी का का माहौल है.'

    Tags: Kanpur news, कानपुर

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