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कानपुर:-न्यूज़18 लोकल पर मिलिए टीम इंडिया के लकी चार्म धर्मवीर से जो डगआउट से स्टैंड में पहुंच गाए है

कानपुर:-न्यूज़18 लोकल पर मिलिए टीम इंडिया के लकी चार्म धर्मवीर से जो डगआउट से स्टैंड में पहुंच गाए है

ग्रीन

ग्रीन पार्क में खेले जा रहे टेस्ट मैच के दौरान टीम इंडिया को चियर करते धर्मवीर

क्रिकेट और सुपर स्टीशियस का नाता पुराना है.सचिन तेंदुलकर और सुनील गवास्कर जैसे दिग्गज भी इससे अछूते नहीं है.ऐसे ही एक शख़्स हैं धर्मवीर.जिन्हें टीम इंडिया का लकी चार्म माना जाते है.धर्मवीर आपकों अक्सर आपके टीवी सेट पर डगआउट में बैठे दिखे होंगे.लेकिन कोविड के चलते बायोबबल लागू होने से घर्मवीर डगआउट से स्टैंड में पहुंच गाए है.

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    क्रिकेट और सुपर स्टीशियस का नाता पुराना है.सचिन तेंदुलकर और सुनील गवास्कर जैसे दिग्गज भी इससे अछूते नहीं है.ऐसे ही एक शख़्स हैं धर्मवीर.जिन्हें टीम इंडिया का लकी चार्म माना जाते है.धर्मवीर आपकों अक्सर आपके टीवी सेट पर डगआउट में बैठे दिखे होंगे.लेकिन कोविड के चलते बायोबबल लागू होने से घर्मवीर डगआउट से स्टैंड में पहुंच गाए है.उनके स्टैंड में पहुंचने के बाद से भारत नें विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) सहित कई अहम मुक़ाबलों में हार का सामना करना पड़ा है.हालांकि धर्मवीर इसके पीछे की वजह को ख़राब प्रदर्शन मानते हैं. उनका कहना है कि गेम के हमेशा दो पहलू होते हैं. इसमें एक हार ओर दूसरा जीत है. धर्मवीर टीम इंडिया के फ़ैन होने के साथ साथ ख़ुद भी भारतीय दिव्यांग टीम का प्रतिनिधित्व करते हैं.न्यूज 18 ने टीम इंडिया के सुपर फ़ैन मध्य प्रदेश के मुरैना निवासी धर्मवीर से ख़ास बातचीत की. पेश हैं उसके प्रमुख अंश

    पहली बार स्टेडियम कब देखा था टीम इंडिया का मुकाबाला?
    2006 में मैं दिल्ली काम की तलाश में गया था.निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से वापस घर लौट रहा था.इसी दौरान रास्ते में ही अंदर से एक आवाज़ आई कि भारतीय टीम का क्रिकेट मैच देखना है.उस समय टीम इंडिया मोहाली में खेल रही थी.निज़ामुद्दीन से मोहाली के लिए डायरेक्ट ट्रेन न होने के कारण मैं पहले पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन गया.वहाँ के गार्ड ने मुझे खाना खिलाया और दस रुपये देकर मोहाली की ट्रेन में बैठा दिया.अगले दिन सुबह मैं मोहाली पहुंच गया और वहां अपना पहला मुक़ाबला स्टेडियम में देखा. उस मेरी उम्र महज़ 11 साल थी.

    पहली बार किस खिलाड़ी की पड़ी थी नज़र ?
    टीम इंडिया फ़रीदाबाद में प्रैक्टिस कर रही थी.इस दौरान मैं भी प्रैक्टिस देखने पहुंच गया.इसी दौरान युवराज सिंह, राहुल द्रविड और श्रीसंत नेट्स में प्रैक्टिस कर थे.उन्होंने मुझे वहां से हटने के लिए कहा, लेकिन मैंने वहां आ रही गेंद को शानदार फ़ील्ड करते हुए उनकी तरफ़ फेंक दिया. इसके बाद उन्होंने मेरे बारे में पूंछा और मुझे टीम के साथ प्रैक्टिस व मैच के दौरान रहने व ट्रेवेल करने के अलाउंस दिलवाए. इसके लिए में उनका दिल से शुक्रगुज़ार हूं.उन्होंने जिताना प्यार दिया वह शायद ही कोई दे पाता.

    डगआउट से हटने के बाद टीम इंडिया WTC सहित कई अहम मुक़ाबले हारी है. क्या आप इसे टीम का बैंड लक मानते हैं?
    देखिए, कोरोना महामारी के चलते पूरी दुनिया का स्वरूप बदल गया है. इसी क्रम में खिलाड़ियों को भी बायोबबल (कोरोना से सुरक्षित माहौल) में रहना पड़ता है. इसी के चलते मुझे भी डगआउट से स्टैंड में जाना पड़ा है.लेकिन, मेरे स्टैंड में जाने से टीम की हार का कोई लेना-देना नहीं है.खेल के से हमेशा से दो पहलू होते हैं. एक टीम को हार व दूसरी टीम को जीत मिलती है.

    जिस दिन टीम का मैच नहीं होता उस दिन क्या करते है?
    मैं वैसे तो टीम के साथ ही रहने की कोशिश करता हूं, लेकिन जिस दिन मैच नहीं होता उस दिन मैं अपनी प्रैक्टिस करता हूं.मैं भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम का भी प्रतिनिधित्व करता हूं.ऐसे में टीम इंडिया का मैच न होने पर अपनी टीम को समय देता हूं. मैंने फ़ील्डिंग करना वहीं से सीखा है. इसके अलावा अपने परिवार को भी समय देता हूं.

    कानपुर का क्राउड कैसा है?
    कानपुर का क्राउड दुनिया में सबसे अलग है.यहां की कनपुरिया भाषा हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है.लेकिन, कभी-कभी यहां के दर्शक हूटिंग करते हैं.जो ग़लत है. खिलाड़ी आपके मेहमान होते हैं और मेहमान की इज़्ज़त कनी चाहिए. मेरे हिसाब से इंडिया में सबसे अच्छा क्राउड मोहाली का है.

    (रिपोर्ट: आलोक तिवारी)

    Tags: Kanpur news

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