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कानपुर मेट्रो निर्माण के काम में लगे मजदूरों के लिए UPMRC ने तैनात किए डॉक्टर और नर्सें

लॉकडाउन के बाद कानपुर मेट्रो का निर्माण कार्य तेजी पकड़ चुका है

लॉकडाउन के बाद कानपुर मेट्रो का निर्माण कार्य तेजी पकड़ चुका है

यूपीएमआरसी (UPMRC) द्वारा निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों (Workers) के लिए स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का भी पूरा इंतज़ाम किया गया है. कास्टिंग यार्ड (Casting Yard) में एक डॉक्टर और दो नर्स हमेशा मौजूद रहते हैं.

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    कानपुर. लॉकडाउन (Lockdown) के बाद कानपुर मेट्रो (Kanpur Metro) का सिविल निर्माण कार्य (Civil Construction Work) लगातार रफ़्तार पकड़ रहा है. इसमें मजदूरों (Labourers) का भी विशेष योगदान है. 8-8 घंटों की तीनों शिफ़्टों में काम ज़ोरों पर है. यूपीएमआरसी (UPMRC) द्वारा श्रमिकों को जो सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं, उनसे मज़दूरों में विश्वास बढ़ा है और फलस्वरूप उनकी संख्या में भी इज़ाफ़ा हुआ है.

    काम के अच्छे माहौल और रहने-खाने की निश्चिंतता की बदौलत मज़दूरों (Labourers) की कार्यक्षमता (Working Capacity)  भी बेहतर रहती है और कार्य को गति मिलती है. कास्टिंग यार्ड (Casting Yard) और मेट्रो डिपो (Metro Depot) को मिलाकर लगभग 1100 श्रमिक काम पर लगे हुए हैं.

    मेट्रो रख रहा मजदूरों के स्वास्थ्य का पूरा ख़्याल
    यूपीएमआरसी द्वारा निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का भी पूरा इंतज़ाम किया गया है. कास्टिंग यार्ड में एक डॉक्टर और दो नर्स हमेशा मौजूद रहते हैं. अगर किसी कर्मचारी या श्रमिकों को किसी भी तरह की अस्वस्थता महसूस होती है तो वे डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं.

    लेबर कॉलोनी में बना गार्डन, मजदूरों को अच्छा माहौल देने की हर संभव कोशिश
    कास्टिंग यार्ड में श्रमिकों के लिए तैयार हो रही लेबर कॉलोनी में सभी मूलभूत सुविधाओं के इंतज़ामात किए जा रहे हैं. अच्छे हवादार कमरों के साथ-साथ पर्याप्त संख्या में शौचालय भी तैयार करवाए जा रहे हैं. साथ ही, कॉलोनी में एक गार्डन भी बनाया गया है ताकि श्रमिकों को रहने के लिए अच्छा माहौल मिले. दिनभर की काम की थकान के बाद श्रमिक गार्डन में लगी सीटों पर बैठकर अच्छा समय बिता सकते हैं.

    सैनिटाइज़ेशन को दी जा रही ख़ास तरजीह
    रोज़ाना कास्टिंग यार्ड और कॉरिडोर पर काम शुरू करने से पहले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं श्रमिकों की विधिवत थर्मल स्क्रीनिंग की जाती है. यह स्क्रीनिंग मेडिकल एक्सपर्ट की देखरेख में होती है ताकि पूरी तरह से यह सुनिश्चित किया जा सके किसी भी व्यक्ति को संक्रमण की आशंका न हो. साथ ही, निर्माण की सभी साइट्स पर को नियमितरूप से डिस्इन्फ़ेक्ट/सैनिटाइज़ किया जाता है. रोज़ाना सुबह काम की शुरुआत से पहले सभी श्रमिकों को काम के दौरान मास्क और ग्लव्स पहनने और सोशल-डिस्टेन्सिंग बनाए रखने के निर्देश दिए जाते हैं.

    यह भी पढ़ें: कानपुर किडनैपिंग- प्रियंका बोलीं- UP की कानून व्यवस्था का लगा सकते हैं अंदाजा

    यूपीएमआरसी का निरंतर प्रयास रहता है कि काम को इस तरह से व्यवस्थित किया जाए कि दैनिक रूप से जो भी लक्ष्य निर्धारित हों, उनसे अधिक ही काम हो ताकि लॉकडाउन की वजह से जो समय का नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जा सके.

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