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शपथ लेने के बाद बिकरू की ग्राम प्रधान बोलीं- अब नहीं पैदा होने देंगे दूसरा 'विकास दुबे'

आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे को एसटीएफ ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया (न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)

बिकरू की नई चुनी गईं ग्राम प्रधान मधु का कहना है कि वो अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों नजर रखने के लिए एक कमेटी बनाएंगी. इसमें गांव के लोगों को शामिल किया जाएगा और गुंडागर्दी नहीं होने दी जाएगी. अब किस भी सूरत में क्षेत्र में दूसरा विकास दुबे (Vikas Dubey) नहीं पैदा होने दिया जाएगा

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कानपुर. हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की गुंडई और दबंगई के लिए कुख्यात कानपुर जिले के बिकरू गांव में उम्मीद के नए सूरज का उदय हुआ है. बिकरू गांव (Bikru Village) की नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान ने बुधवार को शपथ ग्रहण लेने के बाद कहा कि वो ग्राम पंचायत के विकास के लिए काम करेंगी. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि क्षेत्र में दूसरा विकास दुबे (Vikas Dubey) नहीं पैदा हो.

बिकरू में अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व सीट पर हालिया संपन्न चुनाव में अर्थशास्त्र से एम.ए पास मधु ग्राम प्रधान चुनी गयीं. मधु का कहना है कि वो गांव के विकास के लिए काम करेंगी. जिनमें स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा उनकी प्राथमिकता में शामिल है. मधु का कहना है कि वो अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों नजर रखने के लिए एक कमेटी बनाएंगी. उनके मुताबिक इस कमेटी में गांव के लोगों को शामिल किया जाएगा और गुंडागर्दी नहीं होने दी जाएगी. उनकी प्राथमिकता रहेगी कि कमेटी के लोग ही ग्रामीणों को समझा कर सही रास्ते पर ले आएं, जरुरत पड़ी तो पुलिस और कानून का सहारा लिया जाएगा.

मधु ने कहा कि किस भी सूरत में क्षेत्र में दूसरा विकास दुबे नहीं पैदा होने दिया जाएगा.

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कुख्यात अपराधी विकास दुबे के बिकरू गांव में 25 वर्षों के बाद लोकतांत्रिक तरीके से वए प्रधान का चयन हुआ है 


विकास दुबे की दहशत के चलते 25 वर्षों तक उनकी मर्जी का होता था प्रधान

बता दें कि चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में पिछले 25 वर्षों से विकास दुबे की सल्तनत चल रही थी. विकास ने अपने गुर्गों और साथियों की बदौलत गांव में ही नहीं बल्कि आसपास के इलाके में भी अपना खौफ का साम्राज्य कायम कर रखा था. उसकी मर्जी के बिना यहां पत्ता तक नहीं हिलता था. आलम यह था कि स्थानीय चुनावों के नतीजे तक विकास दुबे तय कर देता था. बिकरू ही नहीं आसपास के गांवों के प्रधान भी विकास दुबे के आदेश पर बनते थे. वो मनचाहे व्यक्ति को निर्विरोध ग्राम प्रधान बनवा देता था. क्षेत्र पंचायत सदस्य और बीडीसी भी उसकी मर्जी से चुने जाते थे.

10 जुलाई, 2020 को बिकरू कांड के मास्टरमाइंड विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर लाते वक्त एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था.