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औलाद ने बुढ़ापे में मां-बाप को घर से निकाला, चंद मिनटों में पुलिस कमिश्नर ने दिलाया इंसाफ, बेटा-बहू गिरफ्तार

औलाद ने बुढ़ापे में मां-बाप को घर से निकाला, चंद मिनटों में पुलिस कमिश्नर ने दिलाया इंसाफ, बेटा-बहू गिरफ्तार

Kanpur News: कलयुगी औलाद ने बुढ़ापे में मां-बाप को घर से निकाला

Police Commissioner Gave Justice: पुलिस कमिश्नर ने सख्त कदम उठाते हुए बेटे और बहू को गिरफ्तार कराकर शांतिभंग की कार्रवाई कराई. इसके बाद उन्हें तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. जबकि बुजुर्ग दंपत्ति की सुरक्षा के लिए दो पुलिसकर्मी भी तैनात कर दिए हैं.

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कानपुर. उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) जिले में तैनात पुलिस कमिश्नर (CP) असीम अरुण ने ऐसा कदम उठाया है जिसकी चर्चा पूरे पुलिस महकमे में हो रही है. आंसुओं का सैलाब लेकर कानपुर पुलिस कमिश्नर के कार्यालय में बुजुर्ग दंपति की कहानी ने सभी को हैरान कर दिया. बुजुर्ग दंपति की इस कहानी को सुनने के बाद पुलिस कमिश्नर का दिल भी पसीज गया. इसके बाद वे खुद इन दोनों को साथ लेकर बेटे और बहू के घर पहुंच गए.

दरअसल पूरा मामला चकेरी के जाजमऊ की केडीए कॉलोनी का है. जहां के रहने वाले कलयुगी बेटे ने अपने मां-बाप के साथ पिछले कई वर्षों से मारपीट कर रहा था और बुजुर्ग दंपति को घर से बाहर भी निकाल दिया. पीड़ित मां- बाप ने चकेरी थाने में गुहार लगाई और अपने बेटे व बहू के खिलाफ मुकदमा भी लिखवाया. उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. जब मामला पुलिस कमिश्नर तक पहुंचा तो पुलिस कमिश्नर असीम अरुण पीड़ित बुजुर्ग दंपत्ति अनिल कुमार शर्मा और श्रीमती कृष्णा शर्मा के साथ खुद मौके पर गए और पहले तो उन्होंने की बेटी और बहू को समझाने का प्रयास किया.

बेटा-बहू गिरफ्तार, भेजा जेल
पुलिस कमिश्नर ने सख्त कदम उठाते हुए बेटे और बहू को गिरफ्तार कराकर शांतिभंग की कार्रवाई कराई. उन्हें तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया और बुजुर्ग दंपत्ति की सुरक्षा के लिए दो पुलिसकर्मी भी तैनात कर दिया गया. बताया गया है कि बुजुर्ग दंपति को घर से निकालने के बाद बेटे और बहू ने उनका सामान समेट कर, कमरों में अपने ताले डाल दिए थे. फिलहाल इस पहल के बाद से कानपुर की मित्र पुलिस की हर तरफ प्रशंसा हो रही है.

इंसाफ की उम्मीद जगी
वहीं कई बुजुर्ग दंपति जो पिछले कई वर्षों से पीड़ित हैं, उनके लिए इंसाफ कि उम्मीद भी जगी है. इस घटना के बाद से पुलिस कमिश्नर ने भी यह आदेश दिया है कि किसी भी थाना क्षेत्र में यदि इस तरह के मामले आते हैं तो उस को गंभीरता से लिया जाएं और तत्काल बुजुर्ग दंपत्ति को इंसाफ दिलाने का कार्य करें.

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UP News: कानपुर रेलवे स्टेशन पर सोने से भरे बैग के साथ दबोचे गए 4 संदिग्ध, जांच में जुटी IT टीम

UP News: कानपुर रेलवे स्टेशन पर सोने से भरे बैग के साथ दबोचे गए 4 संदिग्ध, जांच में जुटी IT टीम

UP crime News: जीआरपी के डिप्टी एसपी कमरुल हसन के मुताबिक ब्रह्मपुत्र एक्सेस से 4 युवक बैग लेकर प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर उतरे थे. चेकिंग के दौरान सर्च टीम ने पूछताछ की तो वे हड़बड़ा गए.

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कानपुर. यूपी के कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन (Kanpur Railway Station) से करीब 3.5 किलो (3490 ग्राम) सोने (Gold) के साथ चार लोगों को हिरासत में लिया गया है. इसमें पांच बिस्किट और बाकी जेवरात हैं. पकड़े गए सोने की कीमत 1.70 करोड़ बताई गई है. जीआरपी के डिप्टी एसपी कमरुल हसन ने जब इन संदिग्धों से कड़ाई से पूछताछ की तो उन्होंने अपने बैग को खोला जिसमें सोने के बिस्कुट और सोने के आभूषण थे. जिसको देखने के बाद जीआरपी पुलिस सकते में आ गई. फिलहाल आयकर विभाग और जीएसटी की टीम भी पूछताछ कर रही है.

जीआरपी के डिप्टी एसपी कमरुल हसन के मुताबिक ब्रह्मपुत्र एक्सेस से 4 युवक बैग लेकर प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर उतरे थे. चेकिंग के दौरान सर्च टीम ने पूछताछ की तो वे हड़बड़ा गए. संदेह होने पर तलाशी ली गई. युवकों ने अपने नाम राजस्थान के धौलपुर निवासी दीपक, झुंझनूं निवासी रमेश सैनी, मनोज सैनी, सुरेंद्र कुमार सैनी बताए. रमेश ने बताया कि सभी साईं एयर पार्स सर्विस कुरियर कंपनी दिल्ली में डिलीवरीमैन हैं. यह कंपनी अलग-अलग शहरों में सोना या फिर ज्वैलरी भेजती है.

सोने से भरे तीन बैग बरामद

सोने से भरे तीन बैग बरामद

जीआरपी डिप्टी एसपी ने बताया कि आरोपित रमेश ने बताया कि वह और अन्य तीन साथी 25 से 30 हजार रुपये महीने के वेतन में कुरियर कंपनी में काम करते हैं. बताया जा रहा है कि यह सोना दिल्ली से कानपुर और कानपुर से बनारस और लखनऊ के लिए जाना है. पूछताछ में इसके कागजों और दस्तावेजों को यह लोग नहीं दिखा पाए. शक होने पर जब फिर कड़ाई से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि दिल्ली के किसी व्यापारी का यह सोना है मगर उसके कागजात कुछ उनके पास है. कुछ वह भूल गए लाना, जिसके बाद जीआरपी ने इनकम टैक्स और जीएसटी की टीम को सूचना दी. फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है.

होर्डिंग को लेकर भाजपा के नेता आमने-सामने, ऑडियो वायरल 

होर्डिंग को लेकर भाजपा के नेता आमने-सामने, ऑडियो वायरल 

इस के कार्यकर्ताओं के बारे में भी यह कहा जाता है कि इनका चाल चरित्र और चेहरा दूसरे दलों से अलग होता है, लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव के आने से पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश स्तर के नेताओं की जुबान अपशब्दों में तब्दील हो रही है. कानपुर की एक विधानसभा में टिकट पाने के दावेदारों के बीच जमकर अपशब्द कहे जा रहे हैं.

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भारतीय जनता पार्टी सभी दलों में सबसे ज्यादा अनुशासित मानी जाती है. इस के कार्यकर्ताओं के बारे में भी यह कहा जाता है कि इनका चाल चरित्र और चेहरा दूसरे दलों से अलग होता है, लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव के आने से पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश स्तर के नेताओं की जुबान अपशब्दों में तब्दील हो रही है. कानपुर की एक विधानसभा में टिकट पाने के दावेदारों के बीच जमकर अपशब्द कहे जा रहे हैं.

टिकट के दावेदार अतिउत्साह में आज़मा रहा दांवपेंच
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं. ऐसे में टिकट के दावेदारों में होड़ मची हुई है. सबसे ज्यादा भारतीय जनता पार्टी के टिकट पाने के दावेदार उत्साहित हैं. इस अति उत्साह में हर सियासी दांवपेंच चला जा रहा है और कोशिश एक दूसरे को नीचा दिखाने की भी है. मामला कानपुर के सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र का है जहां भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रत्याशी और पूर्व प्रदेश मंत्री बीजेपी सुरेश अवस्थी और भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश मंत्री प्रमोद विश्वकर्मा का एक ऑडियो वायरल हुआ है. ऑडियो में सुरेश अवस्थी प्रमोद विश्वकर्मा को अपशब्द कहते और धनबल और बाहुबल के जरिए देख लेने की बात कह रहे हैं. लेकिन प्रमोद विश्वकर्मा भी सुरेश अवस्थी पर प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन के जरिए खुद की अनदेखी किए जाने का आरोप लगा रहे हैं. ऑडियो वायरल होने के बाद भारतीय जनता पार्टी के सभी बड़े नेताओं ने इस पर चुप्पी साध ली है लेकिन सुरेश अवस्थी का कहना है कि वायरल ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज उनकी नहीं है.

विरोधियों की साज़िश बताया
सुरेश अवस्थी की माने तो प्रमोद विश्वकर्मा उनके छोटे भाई जैसे हैं और ये ऑडियो वायरल विपक्षी दलों ने किया है. ये विपक्षियों की साजिश है और वह साजिश कर भारतीय जनता पार्टी को बदनाम करना चाहते हैं. हालांकि इस मामले में प्रमोद विश्वकर्मा कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. लेकिन, सवाल प्रमोद विश्वकर्मा पर भी उठ रहे हैं कि सियासी फायदे के लिए प्रमोद विश्वकर्मा ने इस ऑडियो को वायरल कराया है.
प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन से पहले का है आडियो
दरअसल, बुधवार को सीसामऊ विधानसभा में प्रबुद्ध वर्ग समेलन कराया गया. जिसमें कानून मंत्री बृजेश पाठक ने शिरकत की और इस कार्यक्रम से प्रमोद विश्वकर्मा का गुट किनारे दिखा. अंदर की बात ये है कि जब सुरेश अवस्थी को प्रमोद विश्वकर्मा द्वारा उनकी होर्डिंग साज़िश के तहत हटाये जाने की बात पता चली तो आवेश में आकर सुरेश ने प्रमोद को कॉल कर दिया उसी वक्त का यह ऑडियो बताया जा रहा है.
आलाकमना के लिए बन सकता है चिंता का सबब
साल 2017 में सुरेश अवस्थी सीसामऊ विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से चुनाव लड़े थे और 5000 से कुछ ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार प्रमोद विश्वकर्मा भी सीसामऊ विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं और वायरल ऑडियो को इन दोनों के बीच टिकट की खींचतान का नतीजा बताया जा रहा है. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी में टिकटों की मारामारी की शुरुआत अभी से हो चुकी है. जो समय बीतते बीतते और ज्यादा परेशानी का सबब पार्टी आलाकमान के लिए बनेगा.
न्यूज 18 लोकल के लिए आलोक तिवारी की रिपोर्ट

पांच मिनट में ई-साईकिल में तब्दील हो जाएगी मैनुअल साईकिल

पांच मिनट में ई-साईकिल में तब्दील हो जाएगी मैनुअल साईकिल

मैनुअल साइकिल को ई-साइकिल में कनवर्ट करने का तरीका इजाद करने वाले छात्र अर्पित और गौरव बताते हैं कि उन्होंने सस्ती ई-साईकिल तैयार करने के लिए इस तकनीक का विकास किया है.

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अगर आपके पास मैनुअल साईकिल है और आप ई-साईकिल खरीदने की सोच रहे हैं. तो आपके के लिए यह राहत भरी खबर है. दरअसल, कानपुर में जयनारायण विद्या मंदिर के बाहरवीं के छात्रों  ने टिंकर इंडिया लैब में एक ऐसी तकनीक का विकास किया है, जिसके जरिए पांच मिनट में ही मैनुअल साईकिल को ई-साईकिल में मॉडिफाइड किया का सकेगा. ये साइकिल पैडल मारकर चलने के साथ ही बैटरी से भी चल सकेगी.

कानपुर आईआईटी से मिली 12 लाख की प्रोत्साहन राशि
मैनुअल साइकिल को ई-साइकिल में कनवर्ट करने का तरीका इजाद करने वाले छात्र अर्पित और गौरव बताते हैं कि उन्होंने सस्ती ई-साईकिल तैयार करने के लिए इस तकनीक का विकास किया है. इस साइकिल में लगे सभी प्रोडेक्ट लोकल मार्केट से खरीदे गए हैं, जिसे खराब होने पर आसानी से रीप्लेस‌ किया जा सकता है. जबकि, बाजार में उपलब्ध ई-साईकिल के कई पार्ट्स इंपोर्टेड होते हैं.  कानपुर आईआईटी ने इस नवाचार के लिए दोनों छात्रों को पहले साढ़े पांच लाख और उसके बाद सात लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी है .

40 किमी प्रति घंटा है स्पीड
छात्रों ने बताया की आम जीवन में हम साइकिल का उपयोग करना तो चाहते हैं लेकिन समय की कमी और जल्दी पहुंचने के प्रयास के कारण इसका उपयोग नहीं कर पाते हैं. वहीं, ई-साईकिल में मैनुअल साइकिल का फील नहीं आता है. ऐसे में इस तकनीक के जरिये जरूरत पड़ने पर आसानी से दोनों का फील लिया जा सकता है.  इलेक्ट्रॉनिक मोड में कन्वर्ट होने बाद यह लगभग 40 किमी प्रति घंटा की स्पीड प्रदान करती है.

आसानी से ई-मोड पर कर सकते हैं कनवर्ट

उन्होंने बताया की साइकिल को मॉडिफाइड करते समय हमने इस बात पर विशेष रूप से फोकस किया है कि इसको कभी भी ई मोड पर कनवर्ट किया जा सके. इसमें एक लीथीयम आयन बैटरी, कंट्रोलर, हब मोटर व बैटरी इंडीकेटर लगाया गया है.

न्यूज 18 लोकल के लिए आलोक तिवारी की रिपोर्ट

दिल्ली पुलिस और यूपी ATS के ऑपरेशन में गिरफ्तार आमिर का कानपुर कनेक्शन सामने आया

दिल्ली पुलिस और यूपी ATS के ऑपरेशन में गिरफ्तार आमिर का कानपुर कनेक्शन सामने आया

Kanpur News: गिरफ्तार आमिर अपने रिश्तेदार हुमेद के साथ कई बार कानपुर का दौरा कर चुका था. इन्होंने कई इलाकों में रेकी थी. शहर में स्लीपिंग मॉड्यूल का नेटवर्क तैयार करने में लगे थे.

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कानपुर. उत्तर प्रदेश एटीएस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए कथित आतंकियों का कानपुर कनेक्शन सामने आया है. बताया गया है कि गिरफ्तार आमिर अपने रिश्तेदार हुमेद के साथ कई बार कानपुर आया था. सूत्रों के अनुसार अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए आमिर व उसके कई साथी भी यहां आए थे. इन्होंने कई इलाकों में रेकी थी. शहर में स्लीपिंग मॉड्यूल का नेटवर्क तैयार करने में लगे थे.

सूत्रों के मुताबिक़ इस बार हमले में अंडरवर्ल्ड का सहयोग लिया जा रहा था. एक टीम अनीस इब्राहिम के इशारे पर मुंबई अंडरवर्ल्ड से ऑपरेट हो रही थी. उसका खास मोहरा समीर कालिया था, वहीं दूसरी टीम ने दिल्ली में अपना बेस बना रखा था. यहां ओसामा आईएसआई के इशारे पर चालें चल रहा था.इसी आईएसआई के नेटवर्क के जरिए कश्मीर से लखनऊ में आमिर के पास आईईडी डिवाइस पहुंचाई गई थी. बाद में उसने आईईडी प्रयागराज में जीशान के पास पहुंचा दी.प्रयागराज से बरामद आईईडी को नई दिल्ली में डिलीवर करने की जिम्मेदारी अंडरवर्ल्ड के पास थी. इसकी डिलिवरी अंडरवर्ल्ड से जुड़े मूलचंद को करनी थी.

समीर को अपने अंडरवर्ल्ड के नेटवर्क के जरिए इस आईईडी को प्रयागराज से नई दिल्ली पहुंचाना था. प्रयागराज में जीशान से आईईडी लेकर नई दिल्ली तक पहुंचाने का काम मूलचंद लाला, इम्तियाज उर्फ कल्लू और जमील खत्री का था. यूपी एटीएस ने इम्तियाज, जमील और ताहिर को दिल्ली स्पेशल सेल के हवाले कर दिया था.

उधर समीर कालिया मुंबई से नई दिल्ली के लिए ट्रेन से चला था, लेकिन रास्ते में ही राजस्थान के कोटा से स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया. जानकारी के अनुसार नई दिल्ली पहुंचकर समीर को ओसामा से मीटिंग करनी थी. इसके बाद टार्गेट बताया जाता और समीर आईईडी प्लांट करवाकर और धमाका करवाता.

कानपुर ने इन बच्चों यूट्यूब से प्रोग्रामिंग सीखकर दृष्टिहीनों को दीं डिजिटल आंखें

कानपुर ने इन बच्चों यूट्यूब से प्रोग्रामिंग सीखकर दृष्टिहीनों को दीं डिजिटल आंखें

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंट पर आधारित इस साफ्टवेयर को बारहवीं के छात्र श्रीधर आनंद तिवारी व प्रियांशु उपाध्याय ने बनाया है. उन्होंने इसे अस्सटिव न्यूरल नेटवर्क फ़ार ग्रोपिंग हैम्सटर्स ( ANGH) नाम दिया है. प्रियांशु ने बताया कि उन्होंने दोस्त श्रीधर के साथ मिलकर ANGH को तैयार किया है. यह आम लोगों व दृष्टिहीन लोगों के बीच की दूरी को कम करेगा.

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पूरे विश्व में आज सोशल मीडिया का डंका बज रहा है. यह एक तरह से लोगों को दिनचर्या का सबसे हिस्सा बन गया है. इसे अगर एक अलग दुनिया कहा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. वहीं, इंस्टेंट मैसेजिंग एप जैसे वाट्सएप, टेलीग्राम ने अपनी अलग धाक जमा रखी है. यह लोगों की पर्सनल लाइफ़ से लेकर प्रोफेशनल लाइफ़ तक में प्रयोग हो रहा है. कोरोना काल में इसकी महत्ता और अधिक बढ़ गई. लेकिन दृष्टिहीन लोग कहीं न कहीं इनसे अछूते थे. जिसे देखते हुए कानपुर के जय नारायण विद्या मंदिर के छात्रों ने एक ऐसा साफ्टवेयर तैयार किया है जिसके ज़रिये वे आसानी से इंस्टेंट मैसेजिंग एप के ज़रिये चैटिंग कर सकेंगे.

बाहरवीं के छात्रों में तैयार किया है साफ्टवेयर, ऐसे करता है काम
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंट पर आधारित इस साफ्टवेयर को बारहवीं के छात्र श्रीधर आनंद तिवारी व प्रियांशु उपाध्याय ने बनाया है. उन्होंने इसे अस्सटिव न्यूरल नेटवर्क फ़ार ग्रोपिंग हैम्सटर्स ( ANGH) नाम दिया है. प्रियांशु ने बताया कि उन्होंने दोस्त श्रीधर के साथ मिलकर ANGH को तैयार किया है. यह आम लोगों व दृष्टिहीन लोगों के बीच की दूरी को कम करेगा. उन्होंने बताया कि पाइथन प्रोग्रामिंग लैंग्वेज ज़रिये इस साफ्टवेयर को तैयार किया गया है. इसमें क़रीब 60 साइन लैंग्वेज को फ़ीड किया गया है. इसके लिए आपको कैमरे के सामने साइन लैंग्वेज का इशारा करना होगा. यह उसे टेक्स्ट मैसेज में इंटरप्रेट करेगा और ख़ुद ब ख़ुद वाट्सएप एप खोलकर मैसेज सेंड कर देगा. वहीं, सेंडर की ओर से रिप्लाई आने पर टैक्स्ट को वाइस मैसज में इंटरप्रेट करेगा.

यूट्यूब से सीखी प्रोग्रामिंग, समाज सेवा है उद्देश्य
श्रीधर ने बताया कि बचपन से ही कम्प्यूटर की ओर उनकी रुचि थी. वह यूट्यूब पर प्रोग्रामिंग के वीडियो देखा करते थे. उनके साथ वीडियो देखकर दोस्त प्रियांशु की भी इस ओर रुचि जागी. दोनों ने यूट्यूब के ज़रिये ही पाइथन पर प्रोग्रामिंग सीखी और ANGH साफ्टवेयर तैयार किया. उन्होंने बताया कि इस साफ्टवेयर को तैयार करने के पीछे का उद्देश्य सिर्फ़ समाज सेवा है. उनका कहना है कि वह एनजीओ व सहायता समूहों को निःशुल्क अपनी टेक्नोलाजी उपलब्ध कराएंगे. अधिक से अधिक लोग इसका इस्तेमाल कर सकें इसके चलते वह इसका पेटेंट भी नहीं कराएंगे.

न्यूज 18 लोकल के लिए आलोक तिवारी की रिपोर्ट

बल्ब जलाने के लिये नहीं दबाना पडेगा स्विच, आपके हिलने से जलेगा बल्ब

बल्ब जलाने के लिये नहीं दबाना पडेगा स्विच, आपके हिलने से जलेगा बल्ब

कानपुर के जय नारायण विद्या मंदिर के पूर्व छात्र शिवा ने एक ऐसा बल्ब तैयार किया है. जो अंधेरा होने पर आपके मूवमेंट के आधार पर जलेगा. क़रीब आठ माह की मेहनत के बाद शिवा को इसे तैयार करने में कामयाबी मिली है.

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अब आपको बल्ब जलाने के लिए स्विच दबाने का ज़रूरत नहीं होगी. आपके कमरे में एंटर करते ही यह खुद जल जाएगा. कानपुर के जय नारायण विद्या मंदिर के पूर्व छात्र शिवा ने एक ऐसा बल्ब तैयार किया है. जो अंधेरा होने पर आपके मूवमेंट के आधार पर जलेगा. क़रीब आठ माह की मेहनत के बाद शिवा को इसे तैयार करने में कामयाबी मिली है.

पैसिव इंफ़्रारेड सेंसर का किया गया है उपयोगा
शिवा ने बताया कि बल्ब उन्होंने पैसिव इंफ़्रारेड सेंसर का प्रयोग किया है. यह सेंसर ह्ययूमन के बाडी टंप्रेचर को एब्जार्व करता है और डिवाइस को आन होने का सिग्नल देता है. इसके अलावा इसमें रडार मोशन सेंसर लगाया गया है. जिसके चलते इसे किसी भी पोज़ीशन पर टांगा जा सकता है. जबकि बाज़ार में अभी तक मौजूद इस तरह के बल्बों को वर्टिकल टांगना पड़ता है. वहीं इसमें लाइट डिपेंडेंट सेंसर भी लगाया गया है. जिसके चलते यह सिर्फ़ अंधेरा होने पर ही आपके मोशन पर जलेगा.

आठ माह की मेहनत के बाद मिला परिणाम
शिवा ने बताया कि उनके स्कूल के टीचर कौस्तुभ ओवर व कई बच्चों ने मिलकर टिंकर इंडिया मान से एक लैब तैयार की है. जिसमें वे लोग नए-नए प्रयोग करते हैं. इसी लैब में उन्होंने इसे तैयार करने के लिए कई प्रयोग किए.  क़रीब आठ माह के बाद उन्हें इसे तैयार करने में कामयाबी मिली. इस दौरान कई बार निराशा भी हाथ लगी. लेकिन हमारे टीचर कौस्तुभ ओपन में हमेशा मोटिवेट किया.

400 रुपये है क़ीमत, बल्ब के पीछे वाले हिस्से को किया गया है रिसाइकिल
शिवा ने बताया कि बाज़ार में इस तरह के बाज़ार में कई बल्ब मौजूद हैं, लेकिन उनकी क़ीमत 2000-2500 तक है. वहीं इन बल्बों में रडार मोशन सेंसर का अभाव है, जबकि मेरे द्वारा तैयार किए गए बल्ब की लागत 300 रुपये है, जो बाज़ार में 400 रुपये में आसानी से उपलब्ध हो जाएगा. उन्होंने बताया कि बल्ब को तैयार करने के लिए इसके पीछे वाले हिस्से को रिसाइकिल किया गया है.

न्यूज 18 लोकल के लिए आलोक तिवारी की रिपोर्ट

कानपुर, प्रयागराज में भी तेजी से फैल रहा डेंगू और वायरल, अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या

कानपुर, प्रयागराज में भी तेजी से फैल रहा डेंगू और वायरल, अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या

Dengue/Viral Cases in UP: कानपुर के उर्सला अस्पताल के सीएमएस डॉ अनिल निगम ने बताया कि प्रतिदिन 75-100 बुखार से पीड़ित मरीज हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं. रैपिड टेस्ट में दो मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई, लेकिन एलिजा टेस्ट में डेंगू नहीं पाया गया.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 15, 2021, 07:54 IST
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कानपुर/प्रयागराज. ब्रज क्षेत्र के बाद अब डेंगू और वायरल फीवर (Dengue and Viral Fever) कानपुर (Kanpur) और प्रयागराज (Prayagraj) में भी तेजी से पैर पसार रहा है. कानपुर में प्रतिदिन करीब 100 बुखार से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, जबकि प्रयागराज में 97 डेंगू के मरीज मिले हैं. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी मामले और बढ़ सकते हैं. जिसके देखते हुए सुरक्षा के तमाम उपाय किए जा रहे हैं.

कानपुर के उर्सला अस्पताल के सीएमएस डॉ अनिल निगम ने बताया कि प्रतिदिन 75-100 बुखार से पीड़ित मरीज हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं. रैपिड टेस्ट में दो मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई, लेकिन एलिजा टेस्ट में डेंगू नहीं पाया गया. फ़िलहाल हॉस्पिटल में डेंगू का एक भी मरीज नहीं है. लेकिन अगर अन्य अस्पतालों की बात करें तो स्थिति बिगड़ती नजर आ रही है. मंगलवार को कानपुर में बुखार से तीन लोगों दम तोड़ दिया। कानपुर के कल्याणपुर ब्लॉक के करसौली की निर्मला (55), वैभवी (8) और अरौल के शांति (65) की मौत हो गई.

प्रयागराज में 97 मरीजों में डेंगू की पुष्टि 
उधर प्रयागराज में भी डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं. अभी तक 97 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है जिनका इलाज चल रहा है. गनीमत यह है कि अभी डेंगू से किसी की मौत नहीं हुई है. सीएमो नानक सरन ने बताया कि अभी तक कुल 97 मरीज डेंगू से पीड़ित मिले हैं, जिनमे से 9 का इलाज चल रहा है. जिले में अभी तक डेंगू से कोई मौत नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि शहर में डेंगू के मामले और बढ़ने की संभावना है लिहाजा इसे नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.

मंगलवार को 16 की मौत
मंगलवार को कानपुर और ब्रज क्षेत्र में सात बच्चों समेत 16 और लोगों की मौत डेंगू और वायरल फीवर की वजह से हो गई. फिरोजाबाद में 6 बच्चों समेत 9, कासगंज में तीन, एटा में एक और कानपुर में तीन लोगों की मौत हुई.

कानपुर विवि के छात्रों ने कबीर सिंह को बताया हिंदी का कवि

कानपुर विवि के छात्रों ने कबीर सिंह को बताया हिंदी का कवि

कई स्नातक व प्रोफेशनल कोर्स में इसे अनिवार्य भी कर दिया गया है.इसके बावजूद स्नातक व परास्नातक के छात्र हिंदी भाषा के सामान्य शब्दों के अर्थ बताने में अक्षम नज़र आ रहे हैं.

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हिंदी हमारी मातृभाषा है. पाठशाला की पहली सीढ़ी से की शुरुआत इसी भाषा से होती है. सरकार की ओर से भी हिंदी भाषा के प्रचार- प्रसार के लिए कई क़वायदें की जा रही हैं, कई स्नातक व प्रोफेशनल कोर्स में इसे अनिवार्य भी कर दिया गया है.इसके बावजूद स्नातक व परास्नातक के छात्र हिंदी भाषा के सामान्य शब्दों के अर्थ बताने में अक्षम नज़र आ रहे हैं.
जब हमने छत्रपति साहू जी महाराज विश्विद्यालय के छात्रों से हिंदी के सामान्य शब्दों के अर्थ पूंछे तो वे निरुत्तर हो गए.कुछ ने प्रश्नों के उत्तर दिए, लेकिन वे भी पूरी तरह सही नहीं थे इन प्रश्नों का उत्तर देते समय भी वे काफी असहज भी नज़र आए . इतना ही नहीं पहली कक्षा में पढ़ाया जाना वाला क ख ग घ… बताने तक में ग्रेजुएशन के छात्र बगले झांकते नज़र आए. हद तो तब हो गई जब छात्रों से हिंदी के कवियों के नाम पूंछे तो एक छात्रा ने कबीर दास को कबीर सिंह बता दिया.

नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद हिंदी भाषा के उत्थान की उम्मीद
इस बारे में शिक्षाविद व कवि सुनील बाजपेई कहते हैं कि हिंदी भाषा आज अपनी गरिमा पूरी तरह से खो चुकी है. आज के तथाकथित सभ्य समाज में सिर्फ़ अंग्रेज़ी भाषा को ही महत्ता दी जाती है. लोग हिंदी बोलने तक में शर्माते हैं. उन्होंने बताया कि इसके पीछे लाॅर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति पूरी तरह ज़िम्मेदार है. जो अंग्रेज़ी शासन चलाने को सिर्फ़ कम्युनिकेटर तैयार करने के लिए लागू की गई थी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति हिंदी भाषा के उत्थान में काफ़ी योगदान दे सकती है.

न्यूज 18 लोकल के लिए आलोक तिवारी की रिपोर्ट

रिश्तेदार का अश्लील वीडियो बना ब्लैकमेल कर रहा था पुलिसवाला, परेशान महिला ने गंगा में लगा दी छलांग

रिश्तेदार का अश्लील वीडियो बना ब्लैकमेल कर रहा था पुलिसवाला, परेशान महिला ने गंगा में लगा दी छलांग

Kanpur News: कानपुर में मिर्जापुर की रहने वाली एक महिला ने अपने रिश्तेदार टीएसआई पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है. रेप के साथ उसका अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया गया, जिसके बाद महिला ने गंगा में कूदकर खुदकुशी करने की कोशिश की. गोताखोरों ने उसे बचा लिया.

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कानपुर. उत्तर प्रदेश के कानपुर में मिर्जापुर की रहने वाली एक महिला ने अपने रिश्तेदार टीएसआई पर नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म का आरोप लगाया है. रेप के साथ उसका अश्लील वीडियो बनाने का भी आरोप लगाया. इसके बाद उसने उत्पीड़न से परेशान होकर महिला ने डॉयल-112 पर फ़ोन किया और गंगा में छलांग लगा दी. महिला को नदी में कूदते देख लोग दंग रह गए. लोगों ने उसे फौरन बचाने का प्रयास शुरू कर दिया.

मौके पर गंगा में मौजूद नाविकों और गोताखोरों ने महिला को डूबने से बचा लिया. इस घटना के बाद पुलिस हरकत में आई और महिला की तहरीर पर पुलिस ने टीएसआई और उसके पुत्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी है.

गोताखोरों की मदद से बचाई गई महिला ने टीएसआई गिरजा शंकर तिवारी पर उसका शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया. आरोप है कि टीएसआई ने उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया. जिसे वायरल करने की धमकी देकर आरोपित ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया. 10 सितंबर को आरोपी ने उसे किसी काम से कानपुर बुलाया. इसके बाद टीएसआई उसे चकेरी मोड़ स्थित कमरे में ले गया, जहां उसने अपने बेटे के साथ मिलकर मारपीट की. इस घटना के बाद रविवार देर शाम को पीड़िता ने जाजमऊ गंगापुल पहुंचकर गंगा में छलांग लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया.

थाना चकेरी में महिला की तहरीर पर टीएसआई गिरजा शंकर तिवारी और उसके पुत्र अमित तिवारी पर मुकदमा दर्ज कर लिया है. पुलिस ने महिला को मेडिकल जांच के लिए भेजा है और महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच शुरू कर दी है.

84 साल की उम्र में कानून की पढ़ाई करेंगे कानपुर के सीताराम

84 साल की उम्र में कानून की पढ़ाई करेंगे कानपुर के सीताराम

नवाबगंज में रहने वाले सीताराम वर्ष 1960 में बीए और 1962 में एमए की पढ़ाई करने के बाद पीएफ विभाग में नौकरी करने लगे थे. साल 1995 में वह इंफोर्समेंट ऑफिसर के पद से रिटायर हुए. उनका बेटा ललित डिफेंस मिनिस्ट्री में कार्यरत है. सीताराम ने बताया कि वर्ष 1998 में एसजीपीजीआई में चिकित्सीय लापरवाही के कारण उनकी पत्नी की मौत हो गई थी. न्याय के लिए उन्होंने सबसे पहले उपभोक्ता फोरम में गुहार लगाई.

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सही ही कहते हैं कि पढ़ाई करने की कोई उम्र नहीं होती है. बस‌ मन के अंदर इच्छाशक्ति होनी चाहिए. इसे सच साबित कर दिखाया है पीएफ ऑफिस से इनफोर्समेंट ऑफिसर पद से सेवानिवृत्त सीताराम श्रीवास्तव ने. जिन्होंने 84 साल की उम्र में कानून की पढ़ाई करने के लिए सीएसजेएम विश्वविद्यालय से संबद्ध वीएसएसडी कॉलेज में एलएलबी में एडमिशन लिया हैं. इसके लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने भी अनुमति प्रदान कर दी है. अनुमति मिलने के बाद उन्होंने विवि के वीसी प्रो. विनय पाठक‌ को धन्यवाद भी कहा.

उपभोक्ता फोरम से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी लड़ाई, मिली जीत
नवाबगंज में रहने वाले सीताराम वर्ष 1960 में बीए और 1962 में एमए की पढ़ाई  करने के बाद पीएफ विभाग में नौकरी करने लगे थे. साल 1995 में वह इंफोर्समेंट ऑफिसर के पद से रिटायर हुए. उनका बेटा ललित डिफेंस मिनिस्ट्री में कार्यरत है. सीताराम ने बताया कि वर्ष 1998 में  एसजीपीजीआई में चिकित्सीय लापरवाही के कारण उनकी पत्नी की मौत हो गई थी. न्याय के लिए उन्होंने सबसे पहले उपभोक्ता फोरम में गुहार लगाई.  यहां से सुप्रीम कोर्ट तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और वर्ष 2018 में जीत हासिल की. इन 20 सालों की लड़ाई में कानून को लेकर काफी क्रेज आया. किताबें पढ़ने के शौकीन सीताराम ने कहा कि लगा घर में खाली बैठने से अच्छा है कि एलएलबी की पढ़ाई कर लूं. इसके बाद उन्होंने  विवि के कुलपति प्रो. विनय पाठक से मुलाकात की तो उन्होंने भी दाखिला लेने की अनुमति प्रदान कर दी.वैसे सीताराम को होम्योपैथी किताब पढ़ने का भी शौक हैं.

नई शिक्षा नीति में नहीं है उम्र का बंधन
सीएसजीएम विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. विनय पाठक ने बताया कि सीता राम के जज्बे को देखते हुए विवि प्रशासन ने उन्हें एलएलबी में प्रवेश की अनुमति दी है. नई शिक्षा नीति में पढ़ाई करने के लिए उम्र की कोई भी समय सीमा नहीं है. आने वाले दिनों और भी लोग इस तरह से एडमिशन ले सकते हैं.

न्यूज 18 लोकल के लिए आलोक तिवारी की रिपोर्ट

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