कानपुर शूटआउट: बिठूर के घायल SO की जुबानी सुनिए आखिर कैसे शहीद हुए 8 पुलिसवाले

घायल एस'ओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह
घायल एस'ओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह

Kanpur Shootout में घायल बिठूर थाने के SO कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने न्यूज़ 18 से गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गिरोह के साथ हुई मुठभेड़ का आंखोंं देखा हाल साझा किया.

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कानपुर. चौबेपुर थाना (Chaubeypur Police Station) क्षेत्र के विकरू गांव में 3 जुलाई की रात पुलिस टीम (Police Team) पर हुए हमले का सच आख़िरकार सामने आ ही गया. न्यूज़ 18 को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक उस रात पुलिस एनकाउंटर (Encounter) के इरादे से नहीं गई थी और न ही उनके पास पर्याप्त मात्रा में असलहे थे. वहीं कुख्यात विकास दुबे (Vikas Dubey) पूरी तैयारी में था. तीन थानों की पुलिस टीम जब उसके घर से 200 मीटर की दूरी पर अपनी गाड़ी खड़ी कर पैदल आगे बढ़ी तो जेसीबी क्रॉस करते ही तीन तरफ से फायरिंग शुरू हो गई. अचानक हुई इस फायरिंग में पुलिसवालों को संभलने का मौका ही नहीं मिला.

पुलिस तैयारी के साथ नहीं गई थी

इस शूटआउट में घायल बिठूर थाने के एसओ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने न्यूज़ 18 से बताया कि आखिर उस रात हुआ क्या था? अस्पताल में भर्ती एसओ कौशलेंद्र ने बताया कि रात करीब साढ़े 12  बजे दबिश देने की तैयारी थी. उनके साथ उनकी टीम थी, साथ ही चौबेपुर थाने के एसओ विनय तिवारी माय फोर्स व एक अन्य थाने की फोर्स भी थी. इसके अलावा सीओ भी थे. सभी लोग करीब साढ़े 12 बजे घर से करीब 22 मीटर की दूरी पर गाड़ी से उतरकर घर की तरफ बढ़े. रास्ते में जेसीबी को इस तरह से खड़ा किया गया था कि कोई गाड़ी न निकल सके. पैदल भी एक बार में एक ही यात्री निकल सके.




विकास दुबे और उसके गुर्गे देख रहे थे पुलिस की मूवमेंट

SO ने बताया कि वहां पर लाइट भी ठीक से नहीं जल रही थी, जिसके कारण हम उन्हें नहीं देख पा रहे थे. जबकि वे हमें ठीक से देख रहे थे. जैसे ही मैं और मेरे साथ सिपाही अजय सेंगर जेसीबी क्रॉस कर आगे बढ़े, अचानक गोली चलने लगी. सिपाही सेंगर ने बताया कि उसके पेट में गोली लगी है. मैं कवर फायर देते हुए उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने लगा. मैंने इस बीच चार से पांच राउंड गोली चलाई होगी.

पुलिस के पास नहीं थे पर्याप्त असलहे

एसओ कौशलेंद्र ने बताया कि पुलिस एनकाउंटर की तैयारी कर नहीं गई थी. सभी के पास असलहे भी नहीं थे. उन्होंने बताया कि तीन तरफ से गोलियां चल रही थीं. अनुमान के मुताबिक करीब 15 लोग गोली चला रहे थे. जिस रफ़्तार से गोली चल रही थी, उससे तो यही लगता है कि उनके पास सेमी ऑटोमेटिक वेपन्स थे, क्योंकि सिंगल शॉट वेपन्स से इस तरह गोली नहीं चल सकती. अंधेरे में कुछ दिख नहीं रहा था, इसलिए यह बताना मुश्किल है कि गोली किससे चल रही थी.

एसओ चौबेपुर विनय तिवारी के लिए कही ये बात

तीन गोली लगने से घायल हुए कौशलेंद्र ने इस बात का भी खंडन किया कि एसओ चौबेपुर पीछे थे. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है. जेसीबी की वजह से एक बार में एक ही आदमी आगे जा सकता था. मैं और मेरी टीम पहले गए. उसके बाद अन्य लोग, लेकिन तभी गोली चलने लगी, जिसके बाद एसओ चौबेपुर और उनकी टीम के साथ अन्य लोग भी तितर-बितर हो गए. उन लोगों ने जीसीबी की आड़ लेकर जान बचाई. एसओ बिल्हौर देवेन्द्र कुमार मिश्रा को कैसे गोली लगी, इस पर कौशलेंद्र ने कहा कि एक तो अंधेरा था, ऊपर से तीन तरफ से फायरिंग हो रही थी, इसलिए कुछ नहीं दिखा.
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