Kanpur Shootout: शहीद जाबांजों ने नहीं दिखाई थी पीठ, सीने पर खाई गोलियां
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Kanpur Shootout: शहीद जाबांजों ने नहीं दिखाई थी पीठ, सीने पर खाई गोलियां
कानपुर में राजकीय सम्मान के साथ हुआ शहीदों का सम्मान

पुलिस के मुताबिक जब टीम विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची थी उस वक्त करीब 100 बदमाश वहां मौजूद थे.

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कानपुर. चौबेपुर थाना क्षेत्र के विकरू गांव में कुख्यात विकास दुबे (Vikas Dubey) और उसके गुर्गों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिसकर्मियों (Martyred Policemen) ने पीठ नहीं दिखाई थी. बल्कि घिरे होने के बावजूद जमकर मुकाबला किया था और सीने पर गोलियां खाई थी. पुलिसकर्मियों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Postmortem Report) से इस बात का खुलासा हुआ है. सभी शहीदों के सीने, पेट, माथे, गर्दन और हाथ-पैर में भी सामने से ही गोली लगी थी.

पुलिस की तरफ से महज 21 राउंड फायरिंग

पुलिस के मुताबिक जब टीम विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची थी उस वक्त करीब 100 बदमाश वहां मौजूद थे. हमले में शामिल सभी बदमाशों ने एक साथ हमला किया था. सभी ने अंधाधुंध फायरिंग की थी. एके-47 समेत कई आटोमेटिक वेपन से फायरिंग की गई. इस हमले के जवाब में पुलिस की तरफ से महज 51 राउंड ही गोलियां चली. तीन थानों की फोर्स, पर्याप्त असलहा व कारतूस होने के बावजूद तीन दिशाओं से हो रही ताबड़तोड़ फायरिंग से किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला.



शहीदों को नम आंखों से अंतिम विदाई 
उधर शनिवार को मुठभेड़ में शहीद अफसरों और जवानों को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. सीओ बिल्ल्हौर देवेंद्र कुमार मिश्रा का अंतिम संस्कार भैरो घाट पर हुआ. गार्ड ऑफ़ ऑनर के बाद बेटी वैष्णवी ने उन्हें मुखाग्नि दी. अन्य शहीदों का उनके गृहजनपद में अंतिम संस्कार किया गया.

विकास समेत 21 नामजद व 80 अज्ञात के खिलाफ FIR

इस मामले में पुलिस ने विकास दुबे समेत 21 नामजद और 80 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने विकास के मामा प्रेम प्रकाश पांडेय और चचेरे भाई अतुल दुबे को मुठभेड़ में मार गिराया था. बीजेपी नेता संतोष शुक्ला की हत्या के मामले में अतुल दुबे नामजद आरोपी था. 2001 में अतुल व प्रेम प्रकाश के खिलाफ डकैती का मुकदमा भी दर्ज हुआ था.
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