तीन दिन बाद भी घर नहीं लौटे गांव वाले, बुजुर्गों ने बताई मुठभेड़ की कहानी- चारो तरफ खून ही खून था
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तीन दिन बाद भी घर नहीं लौटे गांव वाले, बुजुर्गों ने बताई मुठभेड़ की कहानी- चारो तरफ खून ही खून था
गांव में रहने वाले 85 वर्ष सुखीराम ने बताया कि वे घर के अंदर सो रहे थे.

पूरे गांव में दहशत का पर्याय बना विकास दुबे (Vikas Dubey) अब तक पुलिस गिरफ्त से काफी दूर है. गांव में रहने वाली 80 वर्ष सुमन देवी ने बताया कि जैसे ही गोलियों की आवाज शांत हुई तत्काल मौके से लोग भाग निकले.

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कानपुर. गांव में पसड़े सन्नाटे को जरा देखिए. यह सन्नाटा उस मुठभेड़ (Encounter) के बाद पसरा है जिसमें पुलिस विभाग ने अपने आठ जांबाज कर्मियों को खो दिया है. जैसे ही ग्रामीणों (villagers) को पता चला कि यहां पर पुलिसकर्मियों की मौत हुई है तो लोग अपने घरों में कुंडी लगाकर ही यहां से पलायन कर गए. लोगों को डर है कि अगर वह रुके तो पुलिस उन्हें अपने साथ पूछताछ के लिए ले जा सकती है. लेकिन उन्होंने अगर विकास दुबे के बारे में पुलिस (Police) को कुछ भी बताया तो न तो वे बचेंगे और न ही उनके परिवार के कोई सदस्य.

पूरे गांव में दहशत का पर्याय बना विकास दुबे अब तक पुलिस गिरफ्त से काफी दूर है. गांव में रहने वाली 80 वर्ष सुमन देवी ने बताया कि जैसे ही गोलियों की आवाज शांत हुई तत्काल मौके से लोग भाग निकले. अगर घरों में कोई रुका भी है तो वह बच्चे और महिलाएं हैं. घर के जितने भी पुरुष थे सभी भाग गए. वहीं, करीब दो दर्जन से ज्यादा ऐसे घर हैं जहां पर ताला पड़ा है या कुंडली लगी है. लोगों को इंतजार है कि आरोपी विकास दुबे पर कार्रवाई हो जिसके बाद वह गांव में लौट सके.





अचानक जब गोलियों की आवाज आई
गांव में रहने वाले 85 वर्ष सुखीराम ने बताया कि वे घर के अंदर सो रहे थे. अचानक जब गोलियों की आवाज आई तो बाहर निकल कर दिखा तो उनके होश उड़ गए. जमीन पर लाश पड़ी थी और चारों तरफ खून ही खून था. गोलियों की तड़तड़ाहट तो बंद हो गई थी लेकिन चारों तरफ चीख -पुकार मची हुई थी. जब तक जिले के कई थानों का पुलिस बल पहुंचता गांव के ज्यादातर पुरुष खेतों के रास्ते भाग निकले. वहीं,  एक दर्जन परिवार ऐसे भी है जो पूरे परिवार के साथ ही गांव से निकल गए हैं.
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