ANALYSIS: UP में चौथे चरण की 13 सीटों पर करीबी मुकाबला, हर सीट का अलग है गणित

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए तीन चरण का मतदान हो चुका है. चौथे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है. इनमें यूपी की 13 सीटें भी शामिल हैं. चौथे चरण की तेरह सीटों पर नजर डालें तो मुकाबला कांटे का दिख रहा है.

Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 28, 2019, 11:24 AM IST
ANALYSIS: UP में चौथे चरण की 13 सीटों पर करीबी मुकाबला, हर सीट का अलग है गणित
श्रीप्रकाश जयसवाल, डिंपल यादव व साक्षी महाराज
Anil Rai
Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 28, 2019, 11:24 AM IST
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए तीन चरण का मतदान हो चुका है. चौथे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है. इनमें यूपी की 13 सीटें भी शामिल हैं. चौथे चरण की तेरह सीटों पर नजर डालें तो मुकाबला कांटे का दिख रहा है. बुदंलेखंड में जहां सालभर स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं लेकिन चुनाव के वक्त राष्ट्रीय मुद्दे स्थानीय मुद्दों पर भारी दिख रहे हैं. हालांकि जाति का वोट बैंक भी काम कर रहा है. ऐसे में किसी भी सीट पर किसी पार्टी को एकतरफा जीत नहीं दिख रही है.

चौथे चरण की जिन 13 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएगें, उनमें 12 सीटें बीजेपी के पास थी यानी सबसे बड़ा दांव बीजेपी के उपर ही लगा है. वहीं अखिलेश यादव के ऊपर इटावा जैसे परंपरागत सीट को वापस पाने की चुनौती है. कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल और सलामन खुर्शीद जैसे नेताओं के पास भी साख वापस पाने की चुनौती है. बीजेपी ने इस चरण के 12 सांसदो में से 5 का टिकट काट दिया है. इस चरण की 13 में एक तीहाई सीटों पर कांग्रेस मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है.

शाहजहांपुर: शाहजहांपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी 2014 में बड़े अंतर से चुनाव जीती थी. वोट का गणित देखें तो बीजेपी को मिले वोट और एसपी-बीएसपी को अलग-अलग मिले वोटों को जोड़ दो तो भी अंतर बहुत कम था. लेकिन चुनाव का गणित अंक गणित नहीं होता. इस बार हालात 2014 से अलग हैं. पिछली बार यहां से चुनाव जीती केन्द्रीय मंत्री कृष्णा राज का टिकट काट दिया गया है. इसके बाद स्थानीय स्तर पर खेमेबंदी साफ दिख रही है. यह सीट पंरपरागत रूप से कांग्रेस की सीट मानी जाती रही है. लेकिन 2008 में हुए परिसीमन के बाद जबसे ये सीट सुरक्षित हुई है, कांग्रेस यहां खाता नहीं खोल पाई है.

लखीमपुर खीरी: लखीमपुर खीरी लोकसभा सीट पर बीजेपी ने वर्तमान सांसद अजय मिश्र को मैदान में उतारा है. गठबंधन से पूर्वी वर्मा मैदान में हैं. कांग्रेस ने जफर अली नकवी पर दाव लगाया है. जिसके बाद जातीय समीकरणों में उलझी बीजेपी की लड़ाई थोड़ी आसान दिख रही है. इस सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी बनाम गठबंधन ही दिख रहा है.

मिश्रिख: इस सीट से बीजेपी ने मौजूदा सांसद अंजू बाला का टिकट काट कर अशोक कुमार रावत को मैदान में उतारा है. इस बार बीजेपी, गंठबंधन और कांग्रेस तीनों दलों ने नए चेहरे पर दांव लगया है. लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी के अशोकर कुमार रावत और बीएसपी के नीलू सत्यार्थ के बीच नजर आ रहा है.

डिंपल यादव कन्नौज से मैदान में हैं. (फाइल फोटो)


उन्नाव: कानपुर से सटे उन्नाव सीट की लड़ाई को कांग्रेस की पूर्व सांसद अन्नू टंडन त्रिकोणीय बना रही हैं. बीजेपी ने इस सीट से वर्तमान सांसद साझी महाराज को मैदान में उतारा है, तो गठबंधन से अरुण शकंर शुक्ला 'अन्ना' उम्मीदवार हैं.
Loading...

फर्रुखाबाद: 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इस सीट पर अपने सांसद मुकेश राजपूत पर भरोसा जताया है, तो कांग्रेस ने एक बार फिर सलमान खुर्शीद के बहाने इस सीट को हाई प्रोफाइल कर मुकाबला त्रिकोणीय बना रही है. गठबधंन की ओर से मनोज अग्रवाल मैदान में हैं.

इटावा: एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव के गृह जिले की इस सीट को बीजेपी ने 2014 के चुनावों में एसपी से छीन लिया था. बीजेपी ने इस बार इस सीट से वर्तमान सांसद अशोक कुमार दोहरे का टिकट काटकर आगरा से सांसद रमाशंकर कठेरिया को मैदान में उतारा है. सांसद अशोक दोहरे कांग्रेस का दामन थामकर इस बार मुकाबले में हैं. एसपी ने इस सीट से रमाशकंर कठेरिया को मैदान में उतारा है, तो शिवापाल यादव भी इस सीट पर एसपी के वोट बैंक में सेंध लगाते दिख रहे हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय होता जा रहा है.

कन्नौज: डिंपल यादव की इस सीट पर सीधा मुकाबला गठबंधन बनाम बीजेपी है. बीजेपी के सुब्रत पाठक इस बार डिंपल यादव को कड़ी टक्कर दे रहै हैं. गुरुवार को डिंपल के पक्ष में मायावती और अखिलेश ने सभा की तो शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुब्रत पाठक के प्रचार में पहुंच रहे हैं. साफ है कि कन्नौज की लड़ाई इस बार दिलचस्ब होने वाली है.

19 अप्रैल को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने श्रीप्रकाश जयसवाल के पक्ष में रोड शो किया था.


कानपुर: कानपुर की लड़ाई कांग्रेस बनाम बीजेपी दिख रही है. बीजेपी ने इस सीट से कद्दावर नेता मुरली मनोहर जोशी का टिकट काटकर राज्य सरकार के मंत्री सत्यदेव पचौरी को मैदन में उतारा है, तो कांग्रेस के कद्दावर नेता श्रीप्रकाश जयसवाल बीजेपी के शहरी वोट बैंक में सेंध लगाकर इस सीट को जीतने की कोशिश में लगे हैं. गठबंधन उम्मीदवार रामकुमार मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश तो कर रहे हैं लेकिन फिलहाल मुकबाला बीजेपी बनाम कांग्रेस ही दिख रहा है.

अकबरपुर: कानपुर से सटी इस सीट पर बीजेपी ने वर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह भोले पर दाव लगाया है, जबकि गठबंधन की ओर से निशा सचान एसपी के टिकट पर मैदान में हैं. कांग्रेस ने पूर्व मंत्री राजा रामपाल पर दांव लगया है. यानी यहां मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है.

जालौन: बीजेपी ने इस सीट से वर्तमान सांसद भानू प्रताप सिंह को टिकट दिया है, जबकि बीएसपी से अजय सिंह मैदान में हैं. कांग्रेस ने इस सीट पर पिछले चुनाव में बीएसपी से नंबर दो पर रहे बृजलाल खबर को टिकट देकर लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश तो की है लेकिन मुख्य मुकाबला यहां भी बीजेपी बनाम गठबंधन ही दिख रहा है.

झांसी: केंद्रीय मंत्री उमा भारती के चुनाव न लड़ने के इनकार के बाद बीजेपी ने इस सीट पर बैद्यनाथ ग्रुप के मालिक अनुराग शर्मा पर दांव लगाया है तो एसपी ने अपने पूराने चेहरे सीपी सिंह की जगह इस बार श्याम सुंदर सिंह यादव को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने भी अपने पूराने चेहरे प्रदीप जैन आदित्य की बजाय शिव सरन कुशवाहा पर दांव लगाया है. यानी इस सीट पर सभी पार्टियों ने नए चेहरों पर दांव लगाया है.

फाइल फोटो


हमीरपुर: इस सीट पर बीजेपी ने वर्तमान सांसद कुवंर पुष्पेन्द्र सिंह चहल पर दांव लगाया है. गठबंधन की ओर से बीएसपी के टिकट पर दीलीप सिंह मैदान में हैं. कांग्रेस ने अपने पुराने चेहरे प्रीतम सिंह लोधी पर एक बार फिर दांव लगाया है लेकिन यहां भी मुकबला आमने-सामने का है.

हरदोई: बीजेपी ने इस बार इस सीट से अपने वर्तमान सांसद अंशुल वर्मा का टिकट काटकर जय प्रकाश पर दांव लगया है. जबकि एसपी से उषा वर्मा उम्मीदवार हैं. कांग्रेस ने इस सीट पर विरेंद्र कुमार को टिकट दिया है. 2014 चुनाव में मिले मतों के आधार पर अगर विश्लेषण करें, तो सपा-बसपा का वोट बीजेपी के वोट से बहुत अधिक हो जाता है. इसके अलावा भाजपा सांसद ने अबकी बार पार्टी भी छोड़ दी है. वर्मान सांसद को अपनी पार्टी में लेकर एसपी इस सीट पर मजबूत दावा कर रही है. लेकिन कभी एसपी के कद्दावर नेता रहे नरेश अग्रवाल इस बार बीजेपी के पाले में है और यहीं गणित यहां की लड़ाई को गठबंधन बनाम बीजेपी बना रहा है.

यह भी पढ़ें-

ANALYSIS: डिंपल यादव का मायावती के पैर छूने के पीछे ये है सियासी गणित

Analysis: कितना कारगर होगा 'यादव लैंड' में बीजेपी का ये ख़ास प्लान

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी WhatsApp अपडेट्स
First published: April 28, 2019, 11:00 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...