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कानपुर लोकसभा क्षेत्र: कांग्रेस-बीजेपी का यूपी के 'मैनेचेस्टर' में रहा है दबदबा

कानपुर लोकसभा क्षेत्र: कांग्रेस-बीजेपी का यूपी के 'मैनेचेस्टर' में रहा है दबदबा

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आज तक समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अपना एक भी सांसद इस संसदीय सीट से नहीं जिता पाई हैं. इस बार भी यहां मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही है.

    बड़ी संख्या में उद्योग-धंधे होने के कारण कानपुर को कभी यूपी का मैनेचेस्टर कहा जाता था. आजादी के बाद एक लंबे समय तक यहां पर ट्रेड यूनियन के नेताओं का कब्जा रहा है. लेकिन जब इमरजेंसी के बाद 1977 के लोकसभा चुनाव हुए तो वामपंथ का किला यहां से ऐसा ढहा कि दोबारा आज तक वापसी नहीं हुई. कानपुर लोकसभा क्षेत्र यूपी के उन अलहदा इलाकों में गिना जाता है जहां आज तक समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अपना एक भी सांसद नहीं जिता पाए हैं. इस बार भी यहां का मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही है.

    कौन हैं प्रत्याशी

    2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी वाराणसी की सीट छोड़कर यहां चुनाव लड़ने भेजे गए थे. उनके सामने थे यूपीए सरकार में मंत्री रहे और यहां के स्थानीय नेता श्री प्रकाश जायसवाल चुनाव मैदान में थे. जायसवाल 1999, 2004 और 2009 में यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे लेकिन 2014 में उन्हें बुरी हार का सामना करना पड़ा. अब इस बार बीजेपी में 75 वर्ष की उम्र की सीमा के कारण मुरली मनोहर जोशी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. पार्टी ने अब यहां से सत्यदेव पचौरी को टिकट दिया है.

    कौन हैं सत्यदेव पचौरी

    मूलत: मध्य प्रदेश के भिंड जिले से ताल्लुक रखने वाले लंबे से कानपुर की स्थानीय राजनीति में हैं. उन्होंने अपनी पढ़ाई भी कानपुर से ही पूरी की है और यहीं से छात्र राजनीति के जरिए मुख्य राजनीति में आए. 1967 में उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ की थी. मुख्य राजनीति में उनकी पहली जीत कानपुर के आर्य नगर विधानसभा क्षेत्र से हुई थी. उसके बाद वो 2012 में जिले की गोविंद नगर सीट से विधायक बने. वर्तमान में भी वो गोविंद नगर के विधायक हैं.

    तीन बार सांसद और केंद्र में मंत्री रहे श्री प्रकाश

    कानपुर सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी के सत्यदेव पचौरी और कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल के बीच है.


    यूपीए सरकार में कोयला और गृह राज्य मंत्री रह चुके श्री प्रकाश जायसवाल कद्दावर नेता माने जाते हैं. स्थानीय स्तर भी इनकी बेहतरीन पकड़ है. हालांकि 2014 में उन्हें मोदी लहर में हार का सामना करना पड़ा था. इस बार भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है. यूपीए सरकार में मंत्री रहने के दौरान श्री प्रकाश जायसवाल बड़े विवादों में भी फंस गए थे. जब कोयला घोटाले को लेकर रिपोर्ट लीक हुई थी तब श्री प्रकाश ही कोयला मंत्री थे, हालांकि खदानों के आवंटन के समय वो मंत्री नहीं थे फिर भी उन्हें गुस्साए विपक्ष का सामना करना पड़ा था. श्री प्रकाश ने तब संसद में कहा था कि आवंटन प्रक्रिया के तहत ही किया गया है. उन्होंने पीएम मनमोहन सिंह का भी बचाव किया था.

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    एसपी-बीएसपी गठबंधन उम्मीदवार

    एसपी-बीएसपी गठबंधन ने इस सीट पर 1977 में भारतीय लोकदल से कानपुर संसदीय सीट से सांसद चुने गए मनोहर लाल के पुत्र एडवोकेट रामकुमार को कैंडिडेट बनाया है. रामकुमार के बारे में कहा जा रहा है कि यहां एसपी-बीएसपी गठबंधन ने कमजोर उम्मीदवार दिया है. रामकुमार के भाई दीपक कुमार 1999 में उन्नाव से सांसद रह चुके हैं. अखिल भारतीय लोधी निषाद बिंद कश्यप एकता समता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकुमार वर्तमान में जाजमऊ के वाजिदपुर में रहते हैं.

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    जातीय समीकरण

    2011 की जनगणना के अनुसार पूरी जनसंख्या 22,26,317 है. अनुसूचित जाति की 11.72 फीसदी और अनुसूचित जनजाति की 0.12 फीसदी आबादी यहां रहती है. इसके अलावा ब्राह्मण, वैश्य और मुस्लिम मतदाता के अलावा पंजाबी वोटर भी निर्णयक भूमिका में हैं.

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