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गंगा को साफ करने के चक्कर में बंद हुआ चर्म उद्योग, बेरोजगार हुए लाखों मजदूर

कुंभ के मद्देनजर कानपुर में पिछले 2 महीने से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी टेनिरिया को बंद करने के आदेश के बाद लाखों मजदूरों के सर पर रोजी रोटी का संकट गहराता जा रहा है.

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कुंभ के मद्देनजर कानपुर में पिछले 2 महीने से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी टेनिरिया को बंद करने के आदेश के बाद लाखों मजदूरों के सर पर रोजी रोटी का संकट गहराता जा रहा है. इसे लेकर  मजदूरों ने धरना भी दिया साथ और सरकार से मांग की कि गंगा में प्रदूषण के नाम पर उनसे जो वसूली की जाती है उसे बंद कर दिया जाए. साथ ही जल निगम के जो शुद्धीकरण संयंत्र हैं उसको आधुनिक बनाया जाए.

सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे मजदूरों का कहना है कि पिछले 2 महीने से उनके हाथ से रोजगार छिन गया है. वह भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं. चमड़ा कारोबार पूरी तरीके से बंद हो गया है, ऐसी स्थिति में वो करें तो क्या करें. एक तरफ सरकार मेक इन इंडिया की बात कर रही है वहीं दूसरी तरफ चमड़ा कारोबार पर बार-बार छापेमारी की कार्रवाई कराई जा रही है.

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चर्म उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि जल निगम को शोधन हेतु हर माह 14 लाख का भुगतान किया जाता है. मगर उसके बाद भी सही तरीके से ट्रीटमेंट प्लांट को नहीं चलाया जा रहा, जिसके चलते गंगा मैली होती है. उल्टा आरोप उनके ऊपर लगाया जाता है यदि इसके बाद भी सरकार उनकी मांग को नहीं मानती है तो वह लखनऊ जाकर विधानसभा का घेराव करेंगे.
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