मां-बेटी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांगी ‘इच्छा मृत्यु‘ की इजाजत

कानपुर में ‘मस्क्युलर डिस्ट्राफी’ नामक गम्भीर बीमारी से पीड़ित मां-बेटी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर ‘इच्छा मृत्यु‘ की इजाजत मांगी है.

भाषा
Updated: March 12, 2018, 10:18 PM IST
मां-बेटी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांगी ‘इच्छा मृत्यु‘ की इजाजत
कानपुर में ‘मस्क्युलर डिस्ट्राफी’ नामक गम्भीर बीमारी से पीड़ित मां-बेटी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर ‘इच्छा मृत्यु‘ की इजाजत मांगी है.
भाषा
Updated: March 12, 2018, 10:18 PM IST
कानपुर में ‘मस्क्युलर डिस्ट्राफी’ नामक गम्भीर बीमारी से पीड़ित मां-बेटी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर ‘इच्छा मृत्यु‘ की इजाजत मांगी है.

नौबस्ता स्थित यशोदा नगर की रहने वाली और लगभग लाइलाज बीमारी ‘मस्क्युलर डिस्ट्राफी‘ से पीड़ित शशि मिश्रा (56) और उनकी बेटी अनामिका मिश्रा (33) ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है.

नगर मजिस्ट्रेट राज नारायण पाण्डेय ने आज यहां बताया कि वह पत्र सीधे राष्ट्रपति को भेजा गया है। राज्य सरकार से वित्तीय मदद मुख्यमंत्री राहत कोष से जारी होगी. इसकी प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

अनामिका ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को भी पत्र लिखकर आग्रह किया था कि या तो उनके इलाज के लिये समुचित मदद की जाए या फिर इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी जाए.

अपनी इन मांगों को लेकर कल से अपने घर पर ही धरने पर बैठी अनामिका ने बताया कि उनके पिता गंगा मिश्रा भी ‘मस्क्युलर डिस्ट्राफी’ से पीड़ित थे और करीब 15 साल पहले उनकी मौत हो गयी. उसके बाद से उनके परिवार की देखभाल करने वाला कोई नहीं है.

उन्होंने बताया कि उनकी मां को वर्ष 1985 में इस बीमारी से पीड़ित होने के बारे में पता लगा था. उसके बाद से ही वह बिस्तर पर हैं. करीब छह साल पहले खुद वह भी इस बीमारी की जद में आ गयीं. फिलहाल भारत में इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है. विदेश में जरूर इसका उपचार है, मगर इसके लिये उनके पास धन नहीं है.

उन्होंने यह आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी है कि उन्होंने सरकार को अपने इलाज के लिए मदद देने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन उन्हें कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है.

अनामिका मिश्रा कहती हैं, 'मैंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा और सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि,' या तो हमें इलाज मुहैया कराया जाए नहीं तो इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाए. मैं यह भूख हड़ताल तब तक जारी रखूंगी जब तक मुझे जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उचित जवाब नहीं मिल जाता है.'

अनामिका ने दावा किया कि उन्होंने पूर्व में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को खून से पत्र लिखकर मदद मांगी थी. उस वक्त 50 हजार रुपये की मदद मिली थी, जो चंद दिनों में ही खर्च हो गई.

 
News18 Hindi पर Jharkhand Board Result और Rajasthan Board Result की ताज़ा खबरे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें .
IBN Khabar, IBN7 और ETV News अब है News18 Hindi. सबसे सटीक और सबसे तेज़ Hindi News अपडेट्स. Uttar Pradesh News in Hindi यहां देखें.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर