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कानपुर के मुफ्ती की बड़ी पहल: निकाहनामे में दी गई हिंदी और अंग्रेजी भाषा को भी मान्यता

कानपुर के मुफ्ती की बड़ी पहल: निकाहनामे में दी गई हिंदी और अंग्रेजी भाषा को भी मान्यता

कानपुर में मुफ्ती हनीफ बरकाती ने निकाहनामे मेें उर्दू के अलावा हिंदी और अंग्रेजी को भी मान्यता दे दी है.

कानपुर में मुफ्ती हनीफ बरकाती ने निकाहनामे मेें उर्दू के अलावा हिंदी और अंग्रेजी को भी मान्यता दे दी है.

Uttar Pradesh News: यूपी के कानपुर में मुफ्ती हनीफ बरकाती ने निकाहनामे मेें उर्दू के अलावा हिंदी और अंग्रेजी को भी मान्यता दे दी है. विवादों के कई मसले सामने आने के बाद निकाह नामे में दो नई भाषाओं को भी जोड़ा गया है. इसके लिए बाकायदा निकाह नामे छपवा भी लिए गए हैं. इन भाषाओं को जोड़ने के पीछे मुफ्ती हनीफ बरकाती की मानें तो अब तक जो भी निकाह नामे पढ़े जाते थे वो पूरी तरह से उर्दू में होते थे. इससे उन्हें कानूनी मसला होने या फिर विदेश जाने में परेशानियां होती थीं.

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कानपुर. यूपी के कानपुर (Kanpur) में मुफ्ती हनीफ बरकाती (Mufti Hanif Barkati) निकाहनामे (Nikahnama) को लेकर एक नई पहल की है. इस पहल के बाद अब मुस्लिम जोड़े का निकाह नामा सिर्फ उर्दू में ही नहीं होगा, बल्कि निकाह नामे में दो नई भाषाओं को भी जोड़ा गया है. जो भाषाएं जोड़ी गईं उनमें राष्ट्र भाषा हिंदी और दूसरी अंग्रेजी होगी. इसके लिए बाकायदा निकाह नाम छपवा भी लिए गए हैं.

इन भाषाओं को जोड़ने के पीछे मुफ्ती हनीफ बरकाती की मानें तो अब तक जो भी निकाह नामे पढ़े जाते थे वो पूरी तरह से उर्दू में होते थे. जिसके चलते कभी भी शादी शुदा जोड़े में कोई कानूनी मसला हो जाता तो उर्दू में निकाहनामा होने के चलते उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. जैसे अगर कोई उर्दू का जानकार न हुआ तो थानों से न्यायालय में ट्रांसलेटर की जरूरत पड़ती थी. वहीं बेगम और शौहर में से किसी को विदेश जाने के लिए आवेदन करने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. इसी को ध्यान में रखकर अब नई दो भाषाओं को जोड़ने से बेहद आराम से उनकी समस्याओं का निस्तारण किया जा सकेगा.

निकाह की इबारत में दो नई भाषाओं को जोड़े जाने का मुस्लिम समाज के लोगों ने भी स्वागत किया है. उन्होंने बताया कि दोनों ही भाषाएं आसान हैं और इन्हें हर कोई समझता है. अकसर विवादों में या अन्य मसलों में उर्दू भाषा में निकाहनामा होने के चलते लोगों को काफी मुसीबत होती थी. सबसे ज्यादा मुसीबत पति पत्नी के बीच विवाद के बाद सामने आती थी. उर्दू भाषा के जानकार काफी कम हैं.

कोई विवाद जब थाने पहुंचता था तो पुलिस को ट्रांसलेटर की मदद लेनी पड़ती थी. इसके बाद मामले में हलफनामा लगाया जाता था. हिंदी में निकाह नामे के गवाहों के नाम पते दर्ज करा कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाती थी. वहीं विदेश यात्रा के लिए जाते वक्त दस्तवेजों में निकाहनामे में उर्दू भाषा होने के चलते मुसीबत होती थी.

Tags: Kanpur news, Nikahnama Language Hindi English, UP news

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