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कानपुर की सड़कों पर सादगी का चोला ओढ़कर घूमता था कालेधन का कुबेर पीयूष जैन

कानपुर के इतिहास में कालेधन के कुबेर का अध्याय जुड़ गया.इत्र कारोबारी पीयूष जैन के कानपुर और कन्नौज के मकान से बरामद अर ...अधिक पढ़ें

    कानपुर के इतिहास में कालेधन के कुबेर का अध्याय जुड़ गया.इत्र कारोबारी पीयूष जैन के कानपुर और कन्नौज के मकान से बरामद अरबों रुपये यह सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं, कि आखिर इतनी रकम आई कहां से है.अपना वैभव छिपाने के लिए उसने जो तरीका अपनाया था,अब उस पर भी लोगों को यकीन नहीं हो रहा है.सादगी दिखाकर वह काले धन के कुबेर बन गया.एक पखवाड़े पहले तक भी वह स्कूटर से ही परिचितों के यहां गया था.

    शहर में किसी को नही हो रहा विश्वास
    शहर में वर्षों पुराना स्कूटर और सैंट्रो कार लेकर घूमने वाले पीयूष जैन ने इतनी संपत्ति अर्जित कर ली है, इस पर किसी को सहज विश्वास नहीं हो रहा.अब लोग उनके रहन-सहन और सादगी के बारे में दबे सुर में बताने लगे हैं.लेकिन, कैमरे के सामने कोई भी बोलने को तैयार नहीं है.शहर में कई बड़े इत्र कारोबारी हैं, जिनके पास कीमती कारें हैं.वह इनसे ही घूमते हैं, लेकिन पीयूष जैन शादी समारोह में पुराने स्कूटर या सैंट्रो कार से ही आते-जाते थे.कपड़े भी साधारण ही पहनते थे,जिससे कोई यह अंदाजा नहीं लगा सकता था कि उनके घरों में इतनी नकदी रखी होगी.जीएसटी इंटेलीजेंस के छापों के बाद जब कानपुर और कन्नौज के मकानों से अरबों रुपये बरामद हुए तो लोग हतप्रभ हैं.अभी तक लोग जिले के टाप-10 अमीरों में भी इनका नाम शामिल नहीं कर रहे थे.

    8 साल पहले आनंदपुरी में लिया था मकान

    पीयूष जैन ने भी 8-9 साल पहले आनंदपुरी में बंगला खरीदा था.एक्सपोर्ट के लिहाज से मुंबई में भी एक दफ्तर के अलावा परिवार के कुछ सदस्य रहते हैं.आनंदपुरी में पीयूष का घर कुछ ऐसे बना है कि बाहर से अंदर की गतिविधियां नजर आना लगभग असंभव है. ऐसे पड़ोसियों को भी भनक नहीं चल पाई कि जिसे वह साधारण कारोबारी का घर समझ रहे है असल में वह काले धन के कुबेर की काली कमाई का खजाना है.

    प्रतिदिन जैन मंदिर में दर्शन करने जाता था पीयूष
    पीयूष की दिनचर्या आम आदमियों से बिल्कुल अलग थी.मोहल्ले के लोगों का कहना है कि उनके मकान के दरवाजे हमेशा बंद रहते थे.किसी को भी पता नहीं चलता था कि अंदर क्या हो रहा है.जब वह यहां होते थे तो प्रतिदिन दोपहर 12 बजे के करीब वह घर से बाहर निकलकर जैन मंदिर में दर्शन करने जाते थे.इसके बाद फिर से घर में कैद हो जाते थे.रात में वह कंपाउंड तैयार करते थे, इस वजह से सुबह देर से उठते थे.जब भी कानपुर जाते तो वह रोडवेज बस का इस्तेमाल करते थे. लोगों का कहना था कि भिखारियों को भिक्षा देने के लिए भी कोई घर से नहीं निकलता था. त्योहारों पर वह पड़ोसियों को मिठाई जरूर देता था. कुछ महीने पहले इस कॉलोनी में ही पीयूष ने 200 गज का एक और मकान खरीदा था.

    समाजवादी इत्र लांच करने के बाद आया था चर्चा में
    नवंबर में समाजवादी इत्र की लॉन्चिंग में पीयूष का भी सहयोग होने की बात बताई जाती है.इसके बाद से ही चर्चा में आना शुरू हो गया था.लेकिन, वह समाजवादी पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में नहीं देखे गए.हालांकि अब उनकी सपा से नजदीकियों की चर्चा जरूर हर जुबान पर है.

    (रिपोर्ट आलोक तिवारी)

    Tags: Kanpur news

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