UP ATS जांच में बड़ा खुलासा, नक्सलियों को सप्लाई हो रहे थे कानपुर से असलहे

शहर में एक फिर फर्जी लाइसेंस जारी होने का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसी सक्रिय हो गई थी. 2017 में शहर में आईएसआईएस के मॉड्यूल के संदिग्ध आतंकी पकड़े गए थे.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 7, 2019, 7:20 PM IST
UP ATS जांच में बड़ा खुलासा, नक्सलियों को सप्लाई हो रहे थे कानपुर से असलहे
कानपुर से जाते थे नक्सलियों के लिए हथियार
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Updated: August 7, 2019, 7:20 PM IST
उत्तर प्रदेश (uttar pradesh) के कानपुर (kanpur) से खबर आ रही है कि यहां से खरीदे गए हथियार नक्सलियों तक पहुंचाए जा रहे हैं. सनसनीखेज खुलासा एटीएस की जांच में हुआ है. वर्ष 2014 से 2016 के बीच फर्जी शस्त्र लाइसेंस व फर्जी एनओसी पर प्रशासन ने ट्रांजिट लाइसेंस जारी कर दिए, जिस पर 25 रायफल यहां से खरीदकर बिहार में नक्सली गिरोह को सप्लाई की गईं.

शहर में एक फिर फर्जी लाइसेंस जारी होने का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसी सक्रिय हो गई थी. 2017 में शहर में आईएसआईएस के मॉड्यूल के संदिग्ध आतंकी पकड़े गए थे. इनके पास जो कारतूस बरामद हुए थे, वे शहर के जिन चार गन हाउस से खरीदे गए थे, वहीं से ये 25 रायफल भी खरीदकर नक्सलियों को सप्लाई की गई है.

दरअसल आईएसआईएस मॉड्यूल की जांच के दौरान एटीएस कारतूस सप्लायर काकादेव निवासी राघवेंद्र के जरिए चार गन हाउस मालिकों तक पहुंची. यहां 25 असलहों (रायफल) के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिली थी. जांच में पता चला है कि ये असलहा बिहार के खगड़िया में नक्सली गिरोह से जुड़े राजकिशोर राय को भेजे गए थे. अभी तक यह हत्थे नहीं चढ़ा है. ऐसे में आशंका है कि फिर से फर्जीवाड़ा कर असलहों की खरीद-फरोख्त शुरू हो गई है.

प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा है खेल

उस दौरान एटीएस ने बर्रा निवासी असलहा बाबू महेश सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. उसी ने असलहा तस्कारों, गन हाउस मालिकों से साठगांठ कर फर्जी एनओसी व फर्जी लाइसेंस पर ट्रांजिट लाइसेंस जारी किया था. एक बार फिर इसी तरह के खेल की आशंका है. जहां पैसों के लालच में असलहों की सप्लाई की जा रही है. इन ट्रांजिट लाइसेंस पर तत्कालीन चार बड़े अधिकारियों के हस्ताक्षर व मुहर लगी थी. जांच एजेंसी ने उनसे भी पूछताछ की थी.

क्या होती है ट्रांजिट लाइसेंस?
जानकारों के मुताबिक जब किसी शस्त्र लाइसेंस धारक को किसी दूसरे राज्य या शहर से असलहा खरीदना होता है तो उसके लिए ट्रांजिट लाइसेंस की जरूरत होती है. इसके लिए जिस शहर का लाइसेंस होता है, वहां जिलाधिकारी कार्यालय से एनओसी लेनी होती है. इसके बाद जिस शहर से असलहा लेना होता है वहां डीएम कार्यालय से इस एनओसी व शस्त्र लाइसेंस पर ट्रांजिट लाइसेंस जारी कराया जाता है. इसी आधार पर वहां के गन हाउस मालिक असलहा बेचते हैं. पर, यहां लाइसेंस व एनओसी फर्जी होने के बावजूद कानपुर जिला प्रशासन ने ट्रांजिट लाइसेंस जारी कर दिए. इसकी बदौलत असलहा तस्कर धड़ल्ले से असलहों की खरीदारी कर रहे हैं.
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First published: August 7, 2019, 6:57 PM IST
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