कानपुरः रावण की पूजा करने को साल में सिर्फ एक दिन खुलता है मंदिर का द्वार, नवरात्र पर उमड़ी भीड़

शाम को मंदिर के दरवाजे एक साल के लिए फिर बंद कर दिए जाते हैं.
शाम को मंदिर के दरवाजे एक साल के लिए फिर बंद कर दिए जाते हैं.

Dussehra 2020: यूपी के कानपुर (Kanpur) के शिवाला में स्थित दशानन मंदिर में दशहरा के दिन होती है विशेष पूजा-अर्चना. वर्ष में सिर्फ एक बार विजयादशमी के दिन ही इस रावण मंदिर (Ravana Temple) का द्वार खोला जाता है.

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कानपुर.  विजयादशमी के दिन पूरे देश में रावण दहन (Ravana Dahan) कर खुशियां मनाई जाती हैं. लेकिन वहीं कुछ लाेग ऐसे भी हैं जाे इस दिन रावण की पूजा करते हैं. ऐसा ही एक मंदिर यूपी के कानपुर (Kanpur) में भी है. 150 साल पुराने रावण के इस मंदिर में दशहरा के दिन रावण की विशेष आराधना की जाती हैं. सुबह से ही इस मंदिर में रावण की पूजा (Ravana Puja) करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगने लगती है. कहा जाता है कि इस मंदिर में पूजा करने के लिए भक्तगण दूर-दूर से आते हैं.

जानकारी के मुताबिक, यह मंदिर कानपुर के शिवाला में स्थित है. दशानन के इस मंदिर में दशहरा के दिन सुबह से ही भक्त रावण की पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं. खास बात यह है कि मंदिर साल में एक बार सिर्फ विजयादशमी के दिन ही खुलता है. दशानन मंदिर में शक्ति के प्रतीक के रूप में रावण की पूजा होती है. श्रद्धालु तेल के दिए जलाकर मन्नतें मांगते हैं. परंपरा के अनुसार सुबह आठ बजे मंदिर के कपाट खोले दिए जाते हैं और रावण की प्रतिमा का साज श्रृंगार किया जाता है. इसके बाद आरती की जाती है.


मंदिर के दरवाजे एक साल के लिए फिर बंद कर दिए जाते हैं
वहीं, शाम को मंदिर के दरवाजे एक साल के लिए फिर बंद कर दिए जाते हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण महाराज गुरु प्रसाद शुक्ल ने कराया था. मंदिर के पुजारी केके तिवारी ने कहा कि रावण प्रकांड पंडित होने के साथ-साथ भगवान शिव का परम भक्त था. इसलिए शक्ति के प्रहरी के रूप में यहां कैलाश मंदिर परिसर में रावण का मंदिर बनाया गया, जहां रावण की पूजा की जाती है. पुजारी का कहना है कि रावण का जन्म भी दशहरे के दिन ही हुआ था.



रावण का फूंकते हैं पुतला
असत्य पर सत्य की जीत को याद कर देशभर में दशहरे के मौके पर रावण का दहन किया जाता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, रावण का वध  मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने किया था. उसके मरते समय राम ने लक्ष्मण से इस महान पंडित का आशीर्वाद लेने की सलाह दी थी. कानपुर के दशानन मंदिर के पुजारी ने बताया कि भगवान राम ने रावण के दुर्गुणों की वजह से उसका अंत किया पर उसकी विद्वता का भी मान रखा था. उसी परंपरा का निर्वहन आज कानपुर के श्रद्धालु भी कर रहे हैं.
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