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दिल्ली से रिक्शा चलाकर बिहार जा रहा सुखराम, बोला-अब कभी गांव नहीं छोडूंगा

दिल्ली से रिक्शा चलाकर बिहार जा रहा सुखराम, बोला-अब कभी गांव नहीं छोडूंगा

रिक्शे से बिहार के लिए निकला है सुखराम

रिक्शे से बिहार के लिए निकला है सुखराम

सुखराम का यह सफ़र 10-20 किमी का नहीं है बल्कि सैकड़ों किमी का है. रास्ते में किसी ने खाना दे दिया तो खा लिया वरना पानी पीकर ही इस गर्मी में दिल्ली से बिहार के सहरसा जिले का सफ़र तय कर रहा है.

कानपुर देहात. वैसे नाम तो सुखराम (Sukhram)है, लेकिन जिंदगी में सुख के नाम पर कुछ नहीं. दिल्ली में रिक्शा चलाकर परिवार का पेट भरता है सुखराम. लेकिन कोरोना महामारी (Corona Pandemic) ने यह भी छीन लिया. अब जब दिल्ली (Delhi) में कोरोना का प्रकोप बढ़ा और अनलॉक 1.0 (Unlock 1.0) की शुरुआत हुई तो अपनी पूरी जमा पूंजी रिक्शे पर लादकर गांव की ओर निकल पड़ा. लेकिन यह सफ़र 10-20 किमी का नहीं है बल्कि सैकड़ों किमी का है. रास्ते में किसी ने खाना दे दिया तो खा लिया वरना पानी पीकर ही इस गर्मी में दिल्ली से बिहार के सहरसा जिले का सफ़र तय कर रहा सुखराम. लॉकडाउन और कोरोना संकट के इस दौरा में सुखराम जैसे कई लोग हैं जिनका सब कुछ छीन गया. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. अब सुखराम परदेस कमाने नहीं जाएगा. गांव में ही रहकर परिवार को पालेगा.

रिक्शे पर लदी है छोटी सी गृहस्थी

अनलॉक वन में ऐसी एक तस्वीर न्यूज़18 के कैमरे में कैद हुई. तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच कानपुर से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर एक रिक्शा चालक अकेला चला जा रहा है. इसका नाम तो सुखराम है, लेकिन  इसने जिंदगी में दुख ज्यादा देखे हैं. सुखराम ने बताया कि वह 4 दिन पहले दिल्ली से रिक्शा लेकर निकला है. इस रिक्शे पर सुखराम की छोटी सी गृहस्थी का वह पूरा सामान है, जो इसने रिक्शा चलाकर कमाया था. जब दिल्ली में कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा दिख रहा है तो सुखराम अपनी गृहस्थी के साथ अपने गांव की ओर निकल पड़ा.

अब कभी न लौटने की कही बात

यह जानकार हैरानी होगी कि सुखराम का सफर दिल्ली से शुरू हुआ है जो बिहार जाकर खत्म होगी. चिलचिलाती धूप में जब फ्लाईओवर पर सुखराम के पैर लड़खड़ाया तो हिम्मत बांधते हुए उसने पैदल ही रिक्शे को खींच कर पुल के ऊपर तक चढ़ाया. सुखराम के परिवार में 9 सदस्य हैं. जिनका पालन-पोषण रिक्शा चलाकर करता था. सुखराम ने बताया कि रास्ते में अगर कोई कुछ खाने को देता है तो वह खा लेता है, नहीं तो पानी पीकर ही बीते 4 दिनों से उसका सफर जारी है. सुखराम को विश्वास है कि उसका यह सफर अगले 8 दिनों बाद मंजिल पर जाकर खत्म होगा.

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Tags: Kanpur city news, Kanpur news

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