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शैलेन्द्र के भाई बोले- भइया कहीं गए नहीं, देश की रक्षा के लिए शहीद हो गए

शैलेन्द्र के भाई बोले- भइया कहीं गए नहीं, देश की रक्षा के लिए शहीद हो गए

शहीद

शहीद शैलेन्द्र के पार्थिव शरीर को वाहन से भैरव घाट ले जाते हुए.

कानपुर के नौबस्ता के रहने वाले बीएसएफ जवान शैलेंद्र परिवार पर इस महामारी के प्रकोप से भी भयंकर मंजर गुजर रहा था. परिवार का चिराग बुझने से घरवालों का रो-रो कर बुरा हाल था. लेकिन, तिरंगे में लपटा उनका शव देखकर देश की रक्षा करते हुए शहादत होने का गर्व भी उनके चेहरे में साफ झलक रहा था. 

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    जहां एक ओर लोग कोरोना संक्रमण का कहर कम होने के चलते  दशहरे के मेले का लुत्फ उठा रहे थे. वहीं कानपुर के नौबस्ता के रहने वाले बीएसएफ जवान शैलेंद्र परिवार पर इस महामारी के प्रकोप से भी भयंकर मंजर गुजर रहा था. परिवार का चिराग बुझने से घरवालों का रो-रो कर बुरा हाल था. लेकिन, तिरंगे में लपटा उनका शव देखकर देश की रक्षा करते हुए शहादत होने का गर्व भी उनके चेहरे में साफ झलक रहा था. शैलेंद्र के भाई बार- बार कह रहे थे कि उनका भाई कहीं गया नहीं, बल्कि देश के लिए शहीद हो गया.आप को बता दें कि पश्चिम बंगाल में ड्यूटी के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में नदी में गिरकर नौबस्ता के रहने वाले बीएसएफ जवान शैलेंद्र दुबे की मौत हो गई थी. शैलेंद्र का पार्थिव शरीर शुक्रवार देर रात उनके घर पहुंचा. घर के बाहर पार्थिव शरीर को लोगों के दर्शन के लिए रखा गया. सुबह हजारों लोगों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. जिसके बाद राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा भैरव घाट के लिए रवाना हुई.
    जब तक सूरज चांद रहेगा, शैलेंद्र तेरा नाम रहेगा
     जब उनकी अंतिम यात्रा भैरव घाट के लिए रवाना हुई तो देश भक्ति से सराबोर हजारों लोगों की भीड़ उनको अंतिम विदाई देने के मौजूद रही. इस दौरान बच्चे से लेकर बूढ़े तक हर कोई बस एक ही बात कह रहा था. जब तक सूरज चांद रहेगा शैलेंद्र तेरा नाम रहेगा. वहीं, भैरव घाट में शैलेंद्र के शव का अंतिम संस्कार के दौरान भारत माता की जय के उद्घोष से पूरा आकाश गुंजायमान हो उठा.
    राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
    शैलेन्द्र के पार्थिव शरीर को राजकीय सम्मान के साथ का अंतिम विदाई दी गई.इस दौरान कैबिनेट मंत्री सतीश महाना,सांसद देवेंद्र सिंह भोले और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहें.इस दौरान कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने जवान की शहादत को देश के लिए अपूरणीय क्षति बताया. उन्होंने कहा कि देश ने अपना एक वीर सपूत को दिया है.
    बेटी-बेटा बोले, पापा बोल क्यों नहीं रहे
    शैलेंद्र अपने पीछे चार साल के बेटे शिवांश व छह साल की बेटी शिवांशी के छोड़ गए हैं. शैलेंद्र का पार्थिव शरीर देखकर दोनों अपनी मां से पूंछते रहे कि पापा को क्या हो गया. वह बोल क्यों नहीं रहे. वहीं उनकी पत्नी का भी रो-रो कर बुरा हाल था.
    (रिपोर्ट-आलोक तिवारी)

    Tags: Kanpur news

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