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कानपुर सिख दंगा: SIT की जांच में 67 दंगाई चिह्नित, आरोपियों की जल्द होगी गिरफ्तारी

कानपुर सिख दंगा: SIT की जांच में 67 दंगाई चिह्नित, आरोपियों की जल्द होगी गिरफ्तारी

एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद कानपुर के सिख समाज में खुशी की लहर है.

एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद कानपुर के सिख समाज में खुशी की लहर है.

Kanpur Sikh Riots: एसआईटी के एसपी बालेंदु भूषण ने बताया कि फाइनल रिपोर्ट लगे 20 मुकदमों को अग्रिम विवेचना के लायक माना गया और जांच शुरू की गई, जिसमें से 11 की विवेचना पूरी हो गई है. इन मामलों में 146 दंगाई चिह्नित हुए, लेकिन इनमें से 79 की पूर्व में ही मौत हो चुकी है. ऐसे में जीवित बचे दंगाइयों की संख्या 67 रह गई है. हालांकि, इनमें से भी 20-22 आरोपित ऐसे हैं, जिनकी आयु 75 वर्ष से ज्यादा है या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. गिरफ्तारी के सवाल पर उन्होंने बताया कि शासन को रिपोर्ट दी है. अनुमति मिलते ही बाकी बचे 45 आरोपितों की गिरफ्तारी प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

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कानपुर. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Former PM Indira Gandhi) की हत्या के बाद कानपुर (Kanpur) शहर में हुए दंगों को लेकर गठित एसआईटी (SIT) ने पुन: विवेचना वाले 11 मामलों में अब तक 67 आरोपित चिह्नित किए हैं. एसआईटी ने शासन को इन नामों की सूची सौंप दी है. आदेश मिलते ही आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. हालांकि, अफसरों का मानना है कि चिह्नित आरोपितों में से केवल 45 ही गिरफ्तारी लायक हैं. इसमें कुछ नामचीन लोग और जनप्रतिनिधि हैं. बाकी लोगों की अधिक उम्र और गंभीर बीमारियों के चलते गिरफ्तारी मुश्किल होगी. बता दें कि कानपुर में हुुए दंगों में 127 सिखों की हत्या हुई थी. एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद कानपुर के सिख समाज में खुशी की लहर है.

उस दौरान कानपुर नगर में हत्या, लूट और डकैती आदि धाराओं में 40 मुकदमे दर्ज हुए थे. पुलिस ने इनमें से 29 मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी. 27 मई, 2019 को इस मामले में प्रदेश सरकार ने एसआइटी गठित की थी. एसआइटी ने विभिन्न राज्यों में रह रहे पीड़ित परिवारों के लोगों से मिलकर बयान दर्ज किए और अभिलेख तलाशे थे. एसआईटी के एसपी बालेंदु भूषण ने बताया कि फाइनल रिपोर्ट लगे 20 मुकदमों को अग्रिम विवेचना के लायक माना गया और जांच शुरू की गई, जिसमें से 11 की विवेचना पूरी हो गई है.

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इन मामलों में 146 दंगाई चिह्नित हुए, लेकिन इनमें से 79 की पूर्व में ही मौत हो चुकी है. ऐसे में जीवित बचे दंगाइयों की संख्या 67 रह गई है. हालांकि, इनमें से भी 20-22 आरोपित ऐसे हैं, जिनकी आयु 75 वर्ष से ज्यादा है या गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. गिरफ्तारी के सवाल पर उन्होंने बताया कि शासन को रिपोर्ट दी है. अनुमति मिलते ही बाकी बचे 45 आरोपितों की गिरफ्तारी प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

क्यों हुए थे दंगे?
1984 में इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी. जिसके बाद देश के कई शहरों में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे. कहा जाता रहा है कि कांग्रेस पार्टी के कुछ कार्यकर्ता इसमें सक्रिय रूप से शामिल थे. इंदिरा गांधी की हत्या सिखों के एक अलगाववादी गुट ने उनके द्वारा अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में करवाई गई सैनिक कार्रवाई के विरोध में कर दी थी.

Tags: CM Yogi, Indira Gandhi, Kanpur news, Sikh Community, Sikhs for justice, कानपुर

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