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कानपुर के विकास दुबे कांड की जांच रिपोर्ट SIT ने ED को सौंपी

विकास दुबे (फाइल फोटो)
विकास दुबे (फाइल फोटो)

कानपुर (Kanpur) के बिकरू गांव में जुलाई में 8 पुलिसकर्मियों की सामूहिक हत्या की गई थी. इसकी जांच के बाद एसआईटी ने घटना के मास्टरमाइंड रहे विकास दुबे द्वारा जुटाई गई 150 करोड़ रुपये की संपत्ति की ईडी से जांच की सिफारिश की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 12, 2021, 11:17 AM IST
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कानपुर. उत्तर प्रदेश में कानपुर के बिकरू कांड (Bikru Case) या विकास दुबे कांड (Vikas Dubey Case) की जांच विशेष जांच दल (SIT) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपी दी है. एसआईटी ने अपनी जांच मे विकास दुबे और उसके नेटवर्क के लोगों के खिलाफ 150 करोड़ रुपये की अवैध चल और अंचल सम्पत्ति के दस्तावेज़ी सबूत जुटाए थे. अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अगुवाई मे एसआईटी का गठन यूपी सरकार ने किया था, जिसकी जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट पहले शासन को दी गई थी.

रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है. अब ये रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय को इसलिये दी गई है ताकि विकास दुबे के मामले मे सबूतों के आधार पर मनी लॉड्रिंग की जांच की जा सके.

150 करोड़ की संपत्ति की जांच की सिफारिश



बता दें कानपुर (Kanpur) के बिकरू गांव में जुलाई में 8 पुलिसकर्मियों की सामूहिक हत्या की गई थी. इसकी जांच दौरान एसआईटी ने घटना के मास्टरमाइंड रहे विकास दुबे द्वारा जुटाई गई 150 करोड़ रुपये की संपत्ति की ईडी से जांच की सिफारिश की. गैंगस्टर विकास दुबे 10 जुलाई को कानपुर में यूपी एसटीएफ से कथित मुठभेड़ में मारा गया था.
अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अगुआई में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने गैंगस्टर द्वारा अवैध तरीके से हासिल की गई 150 करोड़ रुपये की संपत्ति की प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गहराई से जांच कराए जाने की सिफारिश की है. एसआईटी ने सरकार को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में यह भी कहा है कि दुबे और उसके गैंग की मदद करने वाले सभी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए.

रिपोर्ट में हुए कई खुलासे

जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि विकास दुबे को मुखबिरी के चलते पहले से ही पुलिस की दबिश के बारे में जानकारी मिल गई थी. दो-तीन जुलाई की मध्यरात्रि कानपुर के बिकरू गांव में दुबे को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर गैंगस्टर के साथियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं, जिसमें एक क्षेत्राधिकारी और एक थानाध्यक्ष समेत 8 पुलिसकर्मी मारे गए थे. वहीं पांच पुलिसकर्मी, एक होमगार्ड और एक आम नागरिक घायल हुआ था.

80 से ज्यादा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दोषी पाए गए

इसके बाद तीन सदस्यीय एसआईटी की जांच रिपोर्ट में 80 से अधिक पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मियों को दोषी पाया गया. जांच रिपोर्ट के करीब 700 पेज मुख्य हैं, जिनमें दोषी पाए गए अधिकारियों व कर्मियों की भूमिका के अलावा करीब 36 संस्तुतियां शामिल हैं. 100 से ज्यादा गवाहियों के आधार पर एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार की है. 12 जुलाई, 2020 को एसआईटी ने अपनी जांच शुरू की जो 20 अक्टूबर को पूरी हुई. एसआईटी ने मुख्य रूप से 9 बिंदुओं पर जांच को आधार बनाकर रिपोर्ट तैयार की है.
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