गंगा की अनदेखी 6 अधिकारियों को पड़ी महंगी, जांच के बाद हुआ निलंबन

370 करोड़ रुपये से गंगा किनारे के वार्डों में सीवर लाइनों की सफाई, मरम्मत और सीवर कनेक्शन देने का काम कर रही सृष्टि कंपनी की लापरवाही भी सामने आई है.

Amit Ganju | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 1, 2019, 3:43 PM IST
गंगा की अनदेखी 6 अधिकारियों को पड़ी महंगी, जांच के बाद हुआ निलंबन
केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें गंगा सफाई को लेकर बेहद संवेदनशील हैं.
Amit Ganju | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 1, 2019, 3:43 PM IST
नालों और ट्रीटमेंट प्लांट का गंदा पानी गंगा में जाने की वजह से कानपुर में 6 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. इन अधिकारियों की लापरवाही की वजह से गंदे नालों को मोड़ने का काम समय पर नहीं हुआ और गंगा मैली होती रही.

बहरहाल, कानपुर में गंगा में प्रदूषित पानी को जाने से न रोक पाने नालों को मोड़ने के काम में देरी एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) के संचालन में लापरवाही जैसी कई वजह रहीं, जिनके चलते जल निगम के छह अधिकारियों को शासन ने निलंबित कर दिया है.

जांच में सामने आईं खामियां
दरअसल, केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें गंगा सफाई को लेकर बेहद संवेदनशील हैं. कमिश्नर की जांच में जब ये सारी खामियां सामने आईं तो शासन की ओर से छह अधिकारियों पर कार्यवाई कर सख्त संदेश दिया गया. हालांकि निलंबन का आदेश समय पर न आने की वजह से अधिकारी दफ्तरों में कामकाज करते रहे. गंगा में गिर रहे सबसे बड़े नाले (सीसामऊ नाला) सहित छह नालों को मोड़कर गंदा पानी जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक ले जाने के लिए शासन ने 30 अक्टूबर डेड लाइन निर्धारित की.

इसी तरह जाजमऊ स्थित एसटीपी, सीईटीपी तक टेनरियों का जहरीला पानी ले जाने वाले कन्वेंस चैनल, गहरी सीवर लाइनों की सफाई ,छबीलेपुरवा सीवेज पंपिंग स्टेशन, वाजिदपुर सीवेज पंपिंग स्टेशन और बुढ़ियाघाट सीवेज पंपिंग स्टेशन की मरम्मत कराने की अंतिम तारीख 30 नवंबर थी. हालांकि ये काम समय पर पूरे नहीं गुए तो एक महीने की और मोहलत दी गई. इसके बाद भी अधिकारियों की लापरवाही जारी रही और काम पूरे नहीं हो सके.

इस बीच शासन के आदेश पर कमिश्नर की अध्यक्षता में मई में टीम ने निरीक्षण किया. इस दौरान सीईटीपी पंपिंग स्टेशनों में गड़बड़ि‍यां मिलीं. जबकि कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज सिंह ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के 6 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है.

370 करोड़ के बाद भी नहीं मिली सफलता
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पता चला है कि जांच में 370 करोड़ रुपये से गंगा किनारे के वार्डों में सीवर लाइनों की सफाई, मरम्मत और सीवर कनेक्शन देने का काम कर रही सृष्टि कंपनी की लापरवाही भी सामने आई है. अफसरों ने कंपनी को नोटिस देने के साथ जुर्माना लगाया पर वसूला नहीं गया. उल्टे करीब 150 करोड़ का भुगतान कर दिया. इस कंपनी की तरफ से गहरी सीवर लाइनों में जगह-जगह रोक लगाकर छोड़ दिया गया था. इसी वजह से पिछले दिनों हुई बारिश से शहर में जलभराव हुआ था. पता चला है कि कमिश्नर की जांच में दो अन्य अफसरों की लापरवाही सामने आई है, जिन पर भी डंडा चल सकता है.

आठ करोड़ की रकम बाकी है और सीईटीपी-सीईटीपी (कॉमन क्रोम एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) के संचालन और रखरखाव में कठिनाई हो रही है. प्लांट को काम चलाऊ ढंग से चलवाया जा रहा है. इसकी वजह नगर निगम और टेनरी संचालकों पर प्लांट के संचालन और रखरखाव के मदद में करीब 8 करोड़ रुपये बकाया होना है. इसमें से 5 करोड़ 64 लाख 79,925 रुपये नगर निगम पर ही बाकी हैं. जबकि गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक के अनुसार नगर निगम ने आठ महीने से भुगतान नहीं किया है. पैसे के कारण 3.6 करोड़ लीटर क्षमता के सीईटीपी के संचालन में कठिनाई हो रही है. जबकि भुगतान के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिखा गया है.

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First published: August 1, 2019, 3:41 PM IST
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