कानपुर शूटआउट: विकास दुबे के एक और साथी को UP STF ने किया गिरफ्तार, 50 हजार का था इनाम
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कानपुर शूटआउट: विकास दुबे के एक और साथी को UP STF ने किया गिरफ्तार, 50 हजार का था इनाम
कानपुर शूटआउट में यूपी एसटीएफ को एक और कामयाबी मिली है.

बिकरू गांव में आठ पुलिसवालों की हत्या में शामिल गैंगस्टर विकास दुबे (Gangster Vikas Dubey) के एक और साथी राम सिंह यादव को एसटीएफ (Special Task Force) ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया.

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  • Last Updated: August 2, 2020, 11:03 PM IST
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कानपुर. उत्‍तर प्रदेश के कानपुर के चौबेपुर (Chaubeypur) के बिकरू गांव में आठ पुलिसवालों की हत्या में शामिल गैंगस्टर विकास दुबे (Gangster Vikas Dubey) के एक और साथी राम सिंह यादव को एसटीएफ (Special Task Force) ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया. उस पर 50 हजार का इनाम घोषित था. इस मामले में आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि राम सिंह यादव पुत्र छोटेलाल निवासी चौबेपुर को एसटीएफ टीम ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है.

अब तक 5 लोग एनकाउंटर में ढेर
बहरहाल, कानपुर हत्याकांड के बाद यूपी सरकार और जिला प्रशासन ने सख्‍त रुख अपनाया हुआ है. जबकि एसटीएफ और कानपुर पुलिस ने इस मामले में आरोपितों को तलाशने में कई टीमें लगा दी थीं. हालांकि इस मामले में शामिल गैंगस्‍टर विकास दुबे समेत उसके पांच साथी एनकाउंटर में ढेर हो चुके हैं तो अब तक 17 लोगों को जेल भेजा जा चुका है.





एनकाउंटर में 10 जुलाई को विकास दुबे हुआ ढेर
बीते 10 जुलाई को मध्य प्रदेश के उज्जैन से कानपुर लाए जा रहे कानपुर शूटआउट का मुख्य आरोपी विकास दुबे एक एनकाउंटर में ढेर हो गया था. पुलिस के मुताबिक, भागने की कोशिश में उसे गोलियां लगीं. एनकाउंटर से पहले उस गाड़ी का एक्सीडेंट भी हुआ था, जिसमें विकास को लाया जा रहा था. इस बारे में एसएसपी कानपुर दिनेश कुमार पी ने बताया कि कैसे कुछ गाड़ियों से पीछा छुड़ाने के लिए पुलिस को स्पीड में गाड़ी दौड़ानी पड़ी और दुर्घटना हो गई. इस दौरान यूपी एसटीएफ भी साथ थी. एसएसपी के मुताबिक, इस मौके का फायदा उठाकर विकास दुबे भागने की कोशिश में था. हमारे एसटीएफ जवान इस गाड़ी को पीछे से फॉलो कर रहे थे. उन्होंने कॉम्बिंग की. इस दौरान फायरिंग हुई और सेल्फ डिफेंस में विकास दुबे पर गोली चलाई गई. इसमें वह मारा गया.

कौन हैं अमिताभ यश
विकास की खोज से लेकर उसके एनकाउंटर तक सारी मुहिम को IPS अमिताभ यश ने ही देखा. ये वही अफसर हैं, जिन्हें यूपी के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर भी जाना जाता है. अमिताभ 1996 बैच के आईपीएस अफसर हैं. बिहार के अमिताभ 4 सितंबर 1996 को पुलिस फोर्स में नियुक्त हुए थे. इसके बाद से ही वे अपने तेज-तर्रार रवैए के लिए जाने जाने लगे. मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले अमिताभ ने पटना से पढ़ाई की और आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गए. दिल्ली में केमेस्ट्री से बीएससी ऑनर्स के बाद पढ़ाई-लिखाई में काफी प्रतिभाशाली अमिताभ को आईआईटी कानपुर में केमेस्ट्री में मास्टर्स के लिए दाखिला मिल गया. इसी के साथ वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते रहे और साल 1996 में पुलिस सेवा के लिए चुने गए.
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