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हॉकी खरीदने के लिए कप प्लेट धो रहा स्टेट लेवल का प्लेयर

हॉकी खरीदने के लिए कप प्लेट धो रहा स्टेट लेवल का प्लेयर

आर्थिक

आर्थिक तंगी के चलते चाय की दुकान पर काम‌ करने को मजबूर है नन्हा खिलाड़ी

पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को‌ सम्मान स्वरूप करोड़ों की धन राशि दी गई. लेकिन जीमन स्तर पर कुछ खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है. इसकी एक बानगी कानपुर के ग्रीनपार्क‌ स्टेडियम में सामने आई है

    भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल बाद ओलंपिक में पदक जीतकर अपना परचम लहराया है. टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम के पदक जीतने के बाद खेल रत्न अवार्ड भी हॉकी के जादूगर ध्यान चंद के नाम समर्पित कर दिया गया. वहीं, पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को‌ सम्मान स्वरूप करोड़ों की धन राशि दी गई. लेकिन जीमन स्तर पर कुछ खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है. इसकी एक बानगी कानपुर के ग्रीनपार्क‌ स्टेडियम में सामने आई है. यहां प्रदेश स्तर का नन्हा खिलाड़ी जिसे अभी दीन दुनिया की समझ तक नहीं हैं वह आर्थिक तंगी के चलते चाय की दुकान में काम करने को मजबूर है.
    कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में हाॅकी की प्रैक्टिस करने वाला 12 साल का गोलू एक‌ चाय की दुकान में प्लेट धो रहा है. स्टेडियम के पास ही परमट गांव में रहने वाले गोलू का कहना है कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. पिता जी गोलगप्पे बनाने का काम करते हैं. जिसके चलते इक्यूपमेंट खरीदने के पैसे नहीं है. वह कई दिनों से टूटी हांकी के जरिये ही प्रैक्टिस कर रहा है. ध्यानचंद जयंती पर हो रहे टूर्नामेंट में भी वह टूटी हांकी के साथ ही प्रतिभाग कर रहा है. उसके पास पहनने को किट भी नहीं है. इसके अलावा हर माह 300 रुपये एकेडमी की फीस भी देनी होती है. इन सब के चलते वह वह चाय की दुकान पर काम करने को मजबूर है.

    पिता बोले, परिवार पालना तक हो रहा मुश्किल
    गोलू के पिता गोपाल वर्मा ने बताया कि उनके परिवार में छह लोग हैं. बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है. अभी दो बेटियों की शादी और करनी है. गोलगप्पे के काम में मुश्किल से 200 से 300 रुपये दिनभर की कमाई हो पाती है. जिससे परिवार का पालन पोषण करना तक मुश्किल होता है. ऐसे में गोलू की जरूरतों को कैसे पूरा करें. गोलू के मेडल दिखाते हुए उन्होंने गर्व के साथ बताया कि प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में बरेली में यह मेडल मिला था. इसके अलावा शहर के तत्कालीन डीएम ब्रह्मदेव तिवारी भी उसे सम्मानित कर चुके हैं.
    तम्मनाएं न पूरी कर पाने का मां को है गम
    गोलू की मां मोहाना वर्मा ने कहा कि गोलू की तम्मनाएं न पूरी कर पाने का उन्हें बहुत गम है. उन्होंने बताया कि बेटा जरूरत के सामान के लिए रो-रो कर रह जाता है, लेकिन हम उसकी इच्छाें पूरी नहीं कर पाते हैं.
    न्यूज 18 लोकल के लिए आलोक तिवारी की रिपोर्ट

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