कानपुर जू की अब यादों में ही रहेगी अमर-अकबर-एंथोनी की कहानी, गोरखपुर जा रहा 'आखिरी' टाइगर

कानपुर चिड़ियाघर से एक बाघ अमर को अब गोरखपुर भेजा जा रहा है, (सांकेतिक तस्वीर)

कानपुर चिड़ियाघर से एक बाघ अमर को अब गोरखपुर भेजा जा रहा है, (सांकेतिक तस्वीर)

Kanpur News: कभी कानपुर जू में बाघ के 4 शावक अमर, अकबर, एंथोनी और अंबिका दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहते थे. लेकिन समय के साथ ये सब बिछड़ते गए. अब इनमें से आखिरी टाइगर अमर को गोरखपुर जू भेजा जा रहा है.

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कानपुर. कानपुर चिड़ियाघर (Kanpur Zoo) में मशहूर फिल्म के किरदार पर रखे गए तीन शावकों के नाम अमर अकबर एंथोनी. 4 साल से दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र रहे टाइगर (Tiger) अमर को अब गोरखपुर चिड़ियाघर (Gorakhpur Zoo) भेजा जा रहा है. उसके जाने के साथ ही कानपुर प्राणी उद्यान से अमर अकबर एंथोनी की कहानी और रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा.

कानपुर जू के सहायक निदेशक एके सिंह ने बताया कि अप्रैल 2017 में बाघिन ने तीन नर और एक मादा शावक को जन्म दिया था. प्रशासन ने इन नर शावकों के नाम अभिनेता अमिताभ बच्चन की मशहूर फिल्म अमर अकबर एंथोनी के किरदारों पर रखे थे. चौथे शावक का नाम अंबिका रखा गया था. यह नन्हें शावक खेल और उछल-कूद से वहां आने वाले दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करते थे. उनकी चौकड़ी खासी लोकप्रिय रही है.

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एंथोनी और अंबिका गए जोधपुर, अकबर की हुई मौत
इसके बाद जानवरों की अदला-बदली के तहत अप्रैल 2018 में एंथोनी और अंबिका को जोधपुर चिड़ियाघर को दे दिया गया. इनके बदले में वहां से तीन भेड़िए आए हैं. उन दोनों के जाने के बाद यहां अमर और अकबर ही बच्चे थे. इसके बाद जून 2018 में 14 माह के अकबर की हार्ट अटैक से मौत हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि उसकी सांस की नली के ऊपरी हिस्से में मांस के टुकड़े फंसे थे.

अकेला अमर अब भाई बादल के साथ जाएगा गोरखपुर

इसके बाद से शावकों की इस चौकड़ी में अमर अकेला रह गया है. उसे बादल के साथ गोरखपुर भेजा जाएगा. बादल दरअसल अमर का बड़ा भाई है. इसका जन्म 2015 में कानपुर चिड़ियाघर में ही हुआ है. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में नया चिड़ियाघर बनाया गया है. इसमें लखनऊ कानपुर सहित देश के विभिन्न चिड़ियाघरों से वन्यजीवों का पहुंचना भी शुरू हो गया है. अब कानपुर प्राणी उद्यान में दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र अमर अकबर एंथोनी की कहानी अब यादों में ही दर्ज होके रह जाएगी.
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