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कानपुर विश्वविद्यालय में तैयार होंगे टेक फ्रैंडली विद्वान

कानपुर

कानपुर विश्वविद्यालय में जल्द शुरू होगा कर्मकांड का प्रोफेशनल कोर्स

इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य ऐसे कर्मकांडी विद्वान तैयार करना है जो संस्कृत के साथ-साथ अंग्रेजी और कंप्यूटर को भी अच्छे से जानते हो.

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    विश्वविद्यालयों में प्रोफेशनल कोर्स की तरह ही ज्योतिष,योग और कर्मकांड विषयों की भी शिक्षा मिलेगी.कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय अब ज्योतिष और कर्मकांड के कोर्स शुरू करने जा रहा है. विश्वविद्यालय प्रशासन अगले सत्र से इन कोर्सों को शुरू करेगा जिसमें छात्र एडमिशन ले सकेंगे. इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य ऐसे कर्मकांडी विद्वान तैयार करना है जो संस्कृत के साथ-साथ अंग्रेजी और कंप्यूटर को भी अच्छे से जानते हो.

    कर्मकांड और ज्योतिष को प्रोफेशनल कोर्स बनाकर लांच‌ करने की तैयारी
    पूजा करना और कर्मकांड कराना आमतौर पर पीढ़ी दर पीढ़ी ट्रांसफर होने वाला काम है.साथ ही गुरुकुल में भी कर्मकांड और ज्योतिष की शिक्षा दी जाती रही है.कानपुर का छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय अब कर्मकांड और ज्योतिष को प्रोफेशनल कोर्स बनाकर लांच करने की तैयारी में है.अगले सत्र से यूनिवर्सिटी में ज्योतिष और कर्मकांड के सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स शुरू हो जाएंगे. विश्वविद्यालय में इन कोर्सेज को शुरू करने का उद्देश्य है कि कर्मकांड और ज्योतिष का ज्ञान रखने वाला शख्स अंग्रेजी और कंप्यूटर को भी अच्छे से जानता हो.जिससे वह देश की संस्कृति का प्रचार प्रसार विदेशों में भी कर सके.वहीं विदेशों में रह रहे भारतीयों के लिए ऑनलाइन कर्मकांड करा सके.जिस तरीके से डिजिटलाइजेशन बढ़ रहा है ऐसे में आने वाले समय में कर्मकांड भी ऑनलाइन कराए जाएंगे.भविष्य की ऐसी संभावनाओं को देखते हुए ही विश्वविद्यालय इन कोर्स को शुरू करने जा रहा है.

    अंग्रेजी के साथ-साथ संस्कृत के जानकार भी होंगे युवा
    विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक का कहना है कि कानपुर ब्रह्माव्रत की नगरी कही जाती है. कानपुर और वाराणसी जो गंगा किनारे बसे हुए नए नगर हैं वह ज्ञान विज्ञान और सभ्यता को समाहित किए हुए हैं. मुझे लगता है आज पुराना विज्ञान, संस्कृत, ज्योतिष कर्मकांड इन सब के जो विषय हैं वह लोगों को बहुत उत्सुक कर रहे हैं. हमारी नई युवा पीढ़ी भी इन सबकी जानकारी करना चाहती है.उसके डिग्री,सर्टिफिकेट और कोर्सेज के साथ ही रिसर्च वर्क तक का कार्य हम लोग यहां पर शुरू करेंगे.इसके साथ ही योग और आयुष के भी कोर्स हम शुरु करेंगे. उन्होंने कहा कि बीते 60 सालों में हम लोग तकनीक तो सीख रहें हैं लेकिन अपने संस्कारों से भी दूर हुए हैं.साथ ही कहा कि आज युवा कंप्यूटर भी जाने अंग्रेजी भी जाने और संस्कृत का भी जानकार होना चाहिए.

    न्यूज 18 लोकल के लिए आलोक तिवारी की रिपोर्ट

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