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गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे कानपुर के युवा

गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे कानपुर के युवा

गुरुकुलम

गुरुकुलम में बच्चों को पढ़ते स्कूल संचालक उद्देश्य सचान

कानपुर के युवाओं ने अपना एक संगठन बनाया है, जिसे नाम दिया है राबेनहुड आर्मी. यह आर्मी गरीब बस्तियों में जाकर बच्चों के अंदर शिक्षा की अलख जगा रही है. शिक्षकों का मानना है कि वे देश की युवा पीढिय़ों में ज्ञान ज्योति जगाते हैं. सभी उम्मीद करते हैं कि शिक्षक नए आदर्श और कीर्तिमान स्थापित करें.

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    एक शिक्षक ही है जो सही शिक्षा देकर मनुष्य को सफलता की बुलंदियों पर पहुंचाता है और जीवन में सही और गलत को परखने का तरीका बताता है. कहा जाता है कि एक बच्चे के जीवन में उसकी पहली गुरु मां होती है, जो हमें इस संसार से अवगत कराती हैं. वहीं दूसरे स्थान पर शिक्षक होते हैं, जो हमें सांसारिक बोध कराते हैं यानी जीवन की महत्ता को बताते हैं. एक अच्छा शिक्षक समाज में अच्छे इंसान बनने और देश के अच्छे नागरिक बनने में हमारी मदद करता है. लेकिन आज में समय में शिक्षा का बाज़ारीकरण हो गया है, जिससे गरीब तबका इससे कहीं न कहीं अछूता रह जा रहा है. हालाँकि सरकार की ओर से लगातार इसके प्रयास किए जा रहा हैं, लेकिन वह काफ़ी हद तक नाकाफ़ी है. इसे देखते हुए कानपुर के युवाओं ने अपना एक संगठन बनाया है, जिसे नाम दिया है राबेनहुड आर्मी. यह आर्मी गरीब बस्तियों में जाकर बच्चों के अंदर शिक्षा की अलख जगा रही है. शिक्षकों का मानना है कि वे देश की युवा पीढिय़ों में ज्ञान ज्योति जगाते हैं. सभी उम्मीद करते हैं कि शिक्षक नए आदर्श और कीर्तिमान स्थापित करें.

    गुरुकुलम नाम से खोला है स्कूल
    राबेनहुड आर्मी के सदस्य व स्कूल के संचालक उद्देश्य सचान ने बताया कि वे लोग गरीब बस्तियों में जाकर बच्चों को बेसिक जानाकारी देते हैं. बच्चों के माता-पिता को भी शिक्षा की महत्ता के बारे में बताते हैं. जब उनकी बेसिक ट्रेनिंग पूरी हो जाती है तो उनका दाख़िला स्कूल में करा दिया जाता है. इसके लिए उन्होंने शहर के हंसपुरम इलाक़े में गुरुकुलम नाम से स्कूल खोला है. जहां पर क़रीब 150 बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है.

    बच्चों को अच्छी आदतें सिखाने पर रहता है फ़ोकस
    स्कूल के शिक्षक आयुष श्रीवास्तव ने बताया कि जब ये बच्चे पहली बार स्कूल आते हैं तो इनकी मानसिक स्थिति बिल्कुल अलग होती है. इन्हें बैठना व बात करना तक नहीं आता है. ऐसे में सबसे पहले इन बच्चों को बेसिक एटिकेट्स के बारे में बताया जाता है. इसके बाद इन्हें गिनती, वर्णमाला आदि सिखाया जाता है.आयुष बताते हैं कि उन बच्चों को रटाने से ज़्यादा सिखाने में फ़ोकस किया जाता है. जिससे ये विषय को आसानी से समझ सके. इसके अलावा कोशिश रहती है कि इन बच्चों के किसी भी विषय की जानकारी प्रेक्टिकल के ज़रिए दी जाए, ताकि ये विषय को जल्द व बारीकी से समझ सके. उनका ज़्यादातर फ़ोकस स्किल डेवलपमेंट पर रहता है. ताकि ये ये बच्चे बच्चे आगे चलकर आसानी से रोज़गार पा सकें.पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें स्केटिंग, डांस आदि की भी ट्रेनिंग दी जाती है.

    शहर के हरेक बच्चे को शिक्षित करना है उद्देश्य
    उद्देश्य बताते हैं कि वह पढ़ने में मेधावी थे.लेकिन वह पढ़ाई के बाद जब नौकरी के लिए गए तो उन्हें स्किल की कमी के चलते कहीं नौकरी नहीं मिली. परिवार से संपन्न न होने के कारण उन्होंने कुछ दिन तक एक ढाबे में काम किया. इसके बाद वह एक फ़ैक्ट्री में नौकरी करने लगे. इसी दौरान उनके दिमाग़ में आया कि उनके जैसै कई लोग देश में होंगे. जो शिक्षित तो हैं लेकिन स्किल की कमी के चलते रोज़गार नहीं मिल रहा हैं. ऐसे में उन्होंने पहले बस्ती में जाकर बच्चों के शिक्षित किया और अब स्कूल खोलकर उन्हें स्किल्ड एजुकेशन दे रहे हैं.उद्देश्य का सपना है कि वह अपने शहर के हरेक बच्चे को शिक्षित करना चाहते हैं.

    (रिपोर्ट आलोक तिवारी)

    Tags: Kanpur news

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