• Home
  • »
  • News
  • »
  • uttar-pradesh
  • »
  • मेगा लेदर क्लस्टर को कानपुर के चमड़ा व्यापारी बता रहे सभी समस्याओं का समाधान

मेगा लेदर क्लस्टर को कानपुर के चमड़ा व्यापारी बता रहे सभी समस्याओं का समाधान

50

50 फीसद उत्पादन क्षमता के साथ कानपुर की टेनरियों में हो रहा उत्पादन

उपायुक्त उद्योग सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि कानपुर में लेदर उद्योग को एक ज़िले एक उत्पाद के तहत चयनित किया गया है. ज़िले के रमईपुर इलाक़े में क़रीब 68 एकड़ भूमि पर मेगा लेदर क्लस्टर का विकास किया जाएगा. इसकी लागत क़रीब 200 करोड़ होगी.

  • Share this:

    चमड़ा नगरी के नाम से मशहूर उत्तर प्रदेश के कानपुर में चर्म उद्योग पर पिछले कुछ दिन से संकट के बादल छाए हैं. लेकिन, कानपुर के रमईपुर क्षेत्र में मेगा लेदर क्लस्टर बनने से कानपुर के चमड़ा उद्यमियों को खासा उम्मीदें है. उनका मानना है कि मेगा लेदर क्लस्टर बनने के बाद लेदर उद्योग के पुराने दिन वापस आने वाले हैं. यहां उन्हें सभी मूलभूत सुविधाएं एक साथ मिलेगी. जिससे कानपुर में लेदर उद्योग को एक बार फिर विकास के पंख लगेंगे.

    68 एकड़ भूमि में बनेगा मेगा क्लस्टर
    उपायुक्त उद्योग सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि कानपुर में लेदर उद्योग को एक ज़िले एक उत्पाद के तहत चयनित किया गया है. ज़िले के रमईपुर इलाक़े में क़रीब 68 एकड़ भूमि पर मेगा लेदर क्लस्टर का विकास किया जाएगा. इसकी लागत क़रीब 200 करोड़ होगी. इसके लिए कुछ ज़मीन किसानों से कुछ ज़मीन उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण से अधिगृहीत कर ली गई है. उन्होंने बताया कि जाज़मऊ में जो टेनरियां है, उनसे गंगा नदी व पर्यावरण में काफ़ी प्रदूषण हो रहा है. इसे देते हुए मेगा क्लस्टर को ग्रीनफील्ड की अवधारणा के तहत विकसित किया जाएगा. यहां से निकलने वाले सभी तरही के वेस्ट को शोधित किया जाएगा.

    कामन फ़ैसिलिटी सेंटर से छोटे उद्यमियों को मिलेगी रफ़्तार
     टेनरी मालिक अशरफ़ रिज़वान के मुताबिक मेगा लेदर क्लस्टर उद्यमियों की समस्याओं के समाधान की चाबी है. यहां पर एक ही जगह पर लेदर उद्योग के लिए ज़रूरी मूलभूत सुविधाएं मौजूद होंगी. यहां पर एक स्किल डेवलेपमेंट सेंटर बनाया जाएगा. जिसमें कुशल श्रमिकों को तैयार किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि किसी भी उद्योग को चलाने में कुशल कारीगर अहम रोल निभाते हैं. इसके अलावा यहां कामन फ़ैसिलिटी सेंटर स्थापित किया जाएगा. जिसमें लेदर उद्योग से संबंधित हरेक मशाीनरी मौजूद होगी. इससे छोटे उद्यमियों को अपने उत्पाद तैयार करने में काफ़ी सुविधा होगी. अभी तक उन्हें अपने उत्पाद तैयार करने के लिए कई लोगों से कांटैक्ट करना पड़ता है. इसके अलावा समय से डिलीवरी मिलने में भी काफ़ी परेशानी होती है.
    50 फ़ीसद क्षमता के साथ हो रहा संचलान
    रिज़वान ने बताया कि फ़िलहाल 50 फ़ीसद क्षमता के साथ ही टेनियों में गीला व सूखा काम हो रहा है. इसके पीछे की वजह कोविड प्रटोकाल के साथ-साथ सीमित शोधन क्षमता है. उन्होंने पिछली सरकारों को इसके लिए ज़िम्मेदार बताते हुए कहा कि शोधन क्षमता की ओर गौर किए बग़ैर लोगों को टेनरियों के संचालन के लाइसेंस बांट दिए गए. जिसका ख़ामियाज़ा आज भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने मेगा लेदर क्लस्टर को चमड़ा उद्योग की उम्मीदों का क्लस्टर बताते हुए कहा कि एक बार फिर चर्म उद्योग पटरी पर लौट सकता है.
    न्यूज 18 लोकल के लिए आलोक तिवारी की रिपोर्ट

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज