कानपुर में Covid-19 की जंग जीत घर लौटी 3 वर्षीय बेटी, मां ने रोते हुए कहा-आज दिवाली है
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कानपुर में Covid-19 की जंग जीत घर लौटी 3 वर्षीय बेटी, मां ने रोते हुए कहा-आज दिवाली है
प्रतीकात्मक तस्वीर

कानपुर में तीन साल की बच्ची कोरोना वायरस (COVID-19) को परास्त करके अपने घर लौटी. बच्ची के घर पहुंचने पर उसकी मां का खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वह खुशी से रो पड़ीं.

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कानपुर. कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर जारी है. इसकी रोकथाम के लिए उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा हरसंभव प्रयास कर रहा है. कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज ठीक होकर अपने घर भी लौट रहे हैं. कानपुर (Kanpur) में 18 मई यानी आज सुबह तीन साल की बच्ची कोरोना वायरस को परास्त करके अपने घर लौटी. बच्ची के डिस्चार्ज होने पर स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों, अस्पताल के कर्मचारी, वार्डबॉय, पैरामेडिकल स्टाफ और एंबुलेंस ड्राइवर ने तालियां बजाई. बच्ची को घर जाते समय लोगों ने उसे चॉकलेट भी गिफ्ट किए. बच्ची के घर पहुंचने पर उसकी मां का खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वह खुशी से रो पड़ी.

20 दिन तक अकेले रहकर कराया इलाज

दरअसल, नन्हीं बच्ची 20 दिन तक लगातार कानपुर स्थित कांशीराम ट्रॉमा सेंटर में अकेली ही अपना ट्रीटमेंट करा रही थी. इस बच्ची का जोश और डॉक्टर्स की टीम को सहयोग करने के जज्बे के चलते पूरा हॉस्पिटल बहुत खुश था. बच्ची को डिस्चार्ज करके जब मेडिकल टीम अनवरगंज थाना परिसर स्थित घर उसे छोड़ने गई तो वहां सरकारी आवास में दृश्य देखने योग्य था. 3 वर्षीय बेटी को देखकर उसकी मां की आंखें खुशी से छलक उठीं. वह कभी बेटी को गले लगाकर दुलार करती तो कभी उसका माथा चूमती. मां-बेटी के इस मिलन का दृश्य देखकर वहां उपस्थित सभी की आंखें नम हो गईं. बच्ची के पिता कॉन्स्टेबल हैं.



बच्ची के पिता सिपाही अश्वनी कुमार रायपुरवा थाने में तैनात हैं. इटावा के रहने वाले अश्वनी अपनी पत्नी और 3 साल की बेटी तन्वी के साथ अनवर गंज थाना परिसर के आवास में रहते हैं. 26 अप्रैल को वह कोरोना से संक्रमित हुए और उनके साथ ही बेटी को भी कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां स्वस्थ होने पर आज उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया.
बच्ची को देखने उमड़ी भीड़, प्रशासन ने की ये व्यवस्था

कोरोना से जंग जीतकर आई 3 साल की बेटी को देखने के लिए थाना परिसर और आसपास के इलाके से लोगों का तांता लगने लगा. लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान भी रखना था, इसलिए पांच-पांच लोग आते गए. सभी इस बच्ची को देखकर उसके हौसले की तारीफ कर रहे थे.

हंसते-हंसते इलाज कराने गई थी बच्ची

बच्ची की मां रूबी ने बताया कि उसकी बेटी बहुत बहादुर है. जिस दिन उसे एडमिट कराने के लिए अस्पताल की टीम आई तो उसके चेहरे पर कहीं कोई शिकन नहीं था. वह हंसते-हंसते एंबुलेंस पर बैठकर अस्पताल चली गई. आज जब उसकी बेटी वापस घर आई है तो यह दिन उनके लिए किसी दिवाली, होली या दशहरा से कम नहीं है. रूबी ने स्वास्थ्य महकमा और सरकार को बच्ची को स्वस्थ लौटाने के लिए धन्यवाद दिया.

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