Kanpur: एक बार फिर उठ खड़ा होने लगा है पूरब का मैनचेस्टर, पढ़ें इतिहास से वर्तमान तक का सफर

कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन (File Photo)
कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन (File Photo)

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का प्रमुख औद्योगिक शहर कानपुर अपनी पुरानी पहचान हासिल करने को बेताब दिख रहा है. जानिए राजा हिंदू सिंह द्वारा स्थापना से लेकर अंग्रेजों की पसंद का शहर बनने और आजादी के बाद नई ऊंचाइयां हासिल करने की कहानी.

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  • Last Updated: September 22, 2020, 12:28 AM IST
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कानपुर. उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में कानपुर (Kanpur) का नाम अपनी अलग पहचान रखता है. कभी कानपुर को तमाम मिलें और उद्योग धंधे होने के चलते देश में 'मैनचेस्टर ऑफ़ द ईस्ट' (Manchestor of The East) कहा जाता था लेकिन समय के साथ मिलें बंद होती गईं और धीरे-धीरे इसकी पहचान भी गुम होती गई. अब ये शहर एक बार फिर उठ खड़ा होने का प्रयास कर रहा है. छोटे उद्योग धंधे यहां खड़े हो रहे हैं, शिक्षा के क्षेत्र में ये बेहतरीन कोचिंग संस्थानों का गढ़ बनता जा रहा है. मेट्रो सहित इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से सुधार के साथ कानपुर यूपी में पुरानी पहचान हासिल करने को बेताब दिख रहा है.

1803 में जिला घोषित हुआ कानपुर

माना जाता है कि कानपुर शहर की स्थापना सचेंदी राज्य के राजा हिन्दू सिंह ने की थी. कानपुर का मूल नाम कान्हपुर था. नगर की उत्पत्ति का सचेंदी के राजा हिंदू सिंह से अथवा महाभारत काल के वीर कर्ण से संबद्ध होना चाहे संदेहात्मक हो पर इतना प्रमाणित है कि अवध में नवाबों के शासनकाल के अंतिम चरण में यह नगर पुराना कानपुर, पटकापुर, कुरसवां, जूही और सीसामऊ गांवों के मिलने से बना था. पड़ोस के प्रदेश के साथ इस नगर का शासन भी कन्नौज और कालपी के शासकों के हाथों में रहा और बाद में मुसलमान शासकों के. 1773 से 1801 तक अवध के नवाब अलमास अली का यहां शासन रहा. 1773 की संधि के बाद यह नगर अंग्रेजों के शासन में आया. इसके बाद 1778 में यहां अंग्रेज छावनी बनी. साल 1803 में 24 मार्च को ईस्ट इंडिया कंपनी ने कानपुर को ज़िला घोषित किया था. ज़िले में उस समय जो 15 परगना शामिल किए गए उनमें बिठूर, शिवराजपुर, डेरापुर, घाटमपुर, भोगिनीपुर, सिकंदरा, अक़बरपुर, औरैय्या, कन्नौज, सलेमपुर, अमौली, कोढ़ा, साढ़, बिल्हौर और जाजमऊ शामिल हैं.



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कानपुर की प्रसिद्ध एल्गिन मिल (Source: Twitter)

 1857 के ग़दर में कानपुर ने अंग्रेजों को हिला दिया

गंगा के तट पर स्थित होने के कारण यहां यातायात और उद्योग धंधों की सुविधा थी इसलिए अंग्रेजों ने यहां उद्योग धंधे यहां लगाने शुरू किए और नगर का विकास शुरू हुआ. सबसे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां नील का कारोबार शुरू किया. 1832 में ग्रैंड ट्रंक सड़क बन जाने पर यह नगर इलाहाबाद से जुड़ गया. इसके बाद साल 1857 के ग़दर में कानपुर की धरती ख़ून से लाल हुई. 1864 में लखनऊ, कालपी आदि मुख्य स्थानों से सड़कों द्वारा जोड़ दिया गया. ऊपरी गंगा नहर का निर्माण भी हो गया. यातायात के इस विकास से नगर का व्यापार पुन: तेजी से बढ़ा.

मिलों की नगरी की पहचान मिली

समय बीता और कानपुर एक औद्योगिक नगरी के तौर पर विकसित होने लगा. कई मिलें खुलीं इनमें लाल इमली, म्योर मिल, एल्गिन मिल, कानपुर कॉटन मिल और अथर्टन मिल काफ़ी प्रसिद्ध हुईं. कानपुर को मिलों की नगरी की पहचान मिली. बाद में इतिहास की किताबों में ये शहर 'मैनचेस्टर ऑफ़ द ईस्ट' कहलाया जाने लगा.

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कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन (Source: News18)


आजादी के बाद कई संस्थान खुले

आज़ादी के बाद भी कानपुर ने तरक़्क़ी की. यहां आईआईटी खुला, ग्रीन पार्क इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम बना, ऑर्डनेंस फैक्ट्रियाँ स्थापित हुईं. इस सबके बाद कानपुर का परचम दुनिया में फहराने लगा. लेकिन समय के साथ अधिकांश फैक्ट्रियां बंद होती गईं और यूपी का ये प्रमुख औद्योगिक शहर अपनी पहचान खोता गया.

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद कानपुर का विकास बहुत तेजी से हुआ. यहां मुख्य रूप से बड़े उद्योग-धंधों में सूती वस्त्र उद्योग, चमड़े का कोराबार, ऊनी वस्त्र उद्योग तथा जूट की दो मिलों ने नगर की प्रसिद्धि को बढ़ाया दिया. इसके अलावा शहर में छोटे प्लास्टिक के उद्योग, इंजीनियरिंग और इस्पात के कारखाने, बिस्कुट आदि बनाने के कारखाने पूरे शहर में फैले.

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कानपुर आईआईटी (Source: Facebook)


मान्यता

माना जाता है कि कानपुर में ही ध्रुव ने जन्म लेकर परमात्मा की प्राप्ति के लिए बाल्यकाल में कठोर तप किया और ध्रुवतारा बनकर अमरत्व की प्राप्ति की. गंगा तट पर स्थित ध्रुवटीला किसी समय लगभग 19 बीघा क्षेत्रफल में फैलाव लिए था. टीले के बीच में बना ध्रुव मंदिर भी कटान के साथ गंगा की भेंट चढ़ गया. इसके बाद मंदिर की प्रतिमा को टीले के किनारे बने दत्त मंदिर में स्थापित कर दिया गया. पेशवा काल में इसकी देखरेख की जिम्मेदारी राजाराम पंत मोघे को सौंपी गई. तब से यही परिवार दत्त मंदिर में पूजा अर्चना का काम कर रहा है.

कानपुर के प्रमुख दर्शनीय स्थल

शोभन मंदिर, बिठूर का नानाराव पार्क, चिड़ियाघर, राधा-कृष्ण मन्दिर, सनाधर्म मन्दिर, कांच का मन्दिर, हनुमान मन्दिर पनकी, सिद्धनाथ मन्दिर, जाजमऊ आनन्देश्वर मन्दिर परमट, जागेश्वर मन्दिर, सिद्धेश्वर मन्दिर, बिठूर साईं मन्दिर, गंगा बैराज, छत्रपति साहूजी महाराज विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), हरकोर्ट बटलर प्रौद्योगिकी संस्थान (HBTI), चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, ब्रह्मदेव मंदिर, रामलला मंदिर प्रमुख हैं.

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कानपुर जेके मंदिर (Source: Twitter)


जाजमऊ

जाजमऊ को प्राचीन काल में सिद्धपुरी नाम से जाना जाता था. यह स्थान पौराणिक काल के राजा ययाति के अधीन था। वर्तमान में यहां सिद्धनाथ और सिद्ध देवी का मंदिर है. साथ ही जाजमऊ लोकप्रिय सूफी संत मखदूम शाह अलाउल हक के मकबरे के लिए भी प्रसिद्ध है. इस मकबरे को 1358 ई. में फिरोज शाह तुगलक ने बनवाया था. 1679 में कुलीच खान की द्वारा बनवाई गई मस्जिद भी यहां का मुख्य आकर्षण है. 1957 से 58 के बीच यहां खुदाई की गई थी जिसमें अनेक प्राचीन वस्तुएं प्राप्त हुई थी.

फूल बाग

फूल बाग को गणेश उद्यान के नाम से भी जाना जाता है. इस उद्यान के मध्य में गणेश शंकर विद्यार्थी का एक मैमोरियल बना हुआ है. प्रथम विश्वयुद्ध के बाद यहां ऑथरेपेडिक रिहेबिलिटेशन हॉस्पिटल बनाया गया था. यह पार्क शहर के बीचों बीच मॉल रोड पर बना है.

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कानपुर का फूलबाग (Source: Twitter)


यातायात

कानपुर का अपना हवाईअड्डा है, इसे हम गणेश शंकर विद्याथी चकेरी एयरपोर्ट के नाम से जानते हैं. यहां से डोमेस्टिक फ्लाइट की सुविधा है. इसका विस्तार भी लगातार हो रहा है. अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लखनऊ में है, जो करीब 80 किलोमीटर दूर है.

वहीं रेल रूट की बात करें तो कानपुर देश के प्रमुख रेल रूट का अहम हिस्सा है. कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन देश के विभिन्न हिस्सों से अनेक रेलगाड़ियों के माध्यम से जुड़ा हुआ है. दिल्ली से पूर्वी भारत को जाने वाली अधिकतर ट्रेनें कानपुर से ही होकर गुजरती हैं. वहीं सड़क मार्ग में एनएच-2 इसे दिल्ली, आगरा, प्रयागराज और कोलकाता से जोड़ता है. वहीं दूसरा प्रमुख हाईवे एनएच-25 है, जो लखनऊ से होते हुए झांसी और शिवपुरी तक जाता है. यही नहीं अब कानपुर को अपनी मेट्रो ट्रेन भी मिलने जा रही है. इस पर यूपी सरकार ने तेजी से काम शुरू कर दिया है.

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कानपुर का ग्रीन पार्क अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम (File Photo)


जनसंख्या

2011 की जनसंख्या के अनुसार कानपुर नगर की आबादी 45,81268 थी. साक्षरता दर यहां की करीब 82 प्रतिशत है. यहां की 76 प्रतिशत आबादी हिंदू है, वहीं 20 प्रतिशत मुस्लिम आबादी निवास करती है. इसके अलावा जैन, सिख आदि मतावलंबी हैं. कानपुर नगर में 1000 पुरुषों के मुकाबले 852 महिलाओं का अनुपात हैँ. यहां की करीब 93 प्रतिशत आबादी हिंदी भाषी है, जबकि 5 प्रतिशत उर्दू और एक प्रतिशत से भी कम पंजाबी बोलने वाले लोग हैं.

कानपुर से चर्चित शख्सियतें

देश के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कानपुर के ही हैं. ये शहर गणेश शंकर विद्यार्थी का रहा. इसके अलावा कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव इस शहर की पहचान हैं.

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कानपुर में गंगा नदी (Source: Twitter)


प्रमुख शिक्षण संस्थान

कानपुर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों की बात करें तो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकराउंटेंट्स ऑफ इंडिया, चन्द्र शेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय शर्करा संस्था, राष्ट्रीय दलहन अनुसंधान, भारतीय वन एवं पौध प्रशिक्षण संस्थान, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, प्रशिक्षण एवं शिक्षुता कार्यालय, शोध विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान, गणेश शंकर विद्यार्थी राजकीय मेडीकल कालेज, जेके ह्रदय संस्थान, जवाहरलाल नेहरू होम्योपैथिक कालेज, छत्रपति साहू जी महाराज यूनिवर्सिटी, एचबीटीआई, उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल तकनीकी संस्थान, डॉ बीआर अम्बेडकर दिव्यांग तकनीकी संस्थान, राजकीय चर्म संस्थान प्रमुख हैं.

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कानपुर का जेड स्क्वायर मॉल (Source: Facebook)


सियासत

उत्तर प्रदेश में कानपुर सीट चुनाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है. कानपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की पांच सीटें आती हैं, जिनमें गोविन्द नगर, सीसामऊ, आर्यनगर, किदवई नगर और कानपुर कैंट शामिल हैं. इस सीट से 1951 में कांग्रेस के हरिहरनाथ शास्त्री पहले सांसद रहे थे. फिर 1957 से 77 तक निर्दलीय एसएम बनर्जी ने इस शहर पर लगातार चार बार कब्जा बनाए रखा. 1977 में जनता पार्टी के मनोहर लाल जीते, उसके बाद कांग्रेस के आरिफ मोहम्मद खान 80 में और 84 में नरेश चंद्र चतुर्वेदी जीते. 1989 में यहां से कम्युनिस्ट पार्टी की सुभासिनी अली जीतीं, उसके बाद 1991 से 1998 तक BJP के जगत वीर सिंह द्रोणा ने जीत दर्ज कर हैट्रिक की थी. फिर इसी का बदला कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल ने 1999 से 2009 तक जीत दर्ज कर लिया.

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी (File Photo)


फिर 2014 के चुनाव में बीजेपी ने वापसी की और दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी यहां से संसद पहुंचे. 2019 में यहां से बीजेपी के सत्यदेव पचौरी ने जीत दर्ज की.

अर्थव्यवस्था

कानपुर शहर की पहचान अब छोटे उद्योग बनते जा रहे हैं. लेदर, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग, डिटरजेंट, हौजरी, गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, पैकेजिंग, आयरन, स्टील बर्तन, बिस्कुट, मसाले, पान मसाला और वनस्पति से जुड़े लघु उद्योग तेजी से उभर रहे हैं. दादानगर, फजलगंज, सरेसबाग, रूमा, कालपी रोड, जाजमऊ, चौबेपुर मंधना, पनकी, भौती में ये लघु उद्योग बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. इसके अलावा कल्याणपुर, गुमटी, नवीन मार्केट, गोविंद नगर, शास्त्रीनगर, स्वरूप नगर, लाल बंगला, ग्वालटोली जैसे कई इलाकों में बन रहे बाजार लगातार जरूरत के हिसाब से खुद को ढाल रहे हैं.

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कानपुर (Source: Facebook)


धीरे-धीरे कानपुर नौकरी पेशा लोगों का ठिकाना बन रहा है. इसकी वजह से कानपुर में फ्लैट्स संस्कृति बढ़ी है. पार्वती बागला रोड, स्वरूप नगर, तिलक नगर, विष्णुपुरी, गोविंद नगर जैसे इलाके रियल एस्टेट कल्चर को अपनाकर विकास के नए आयाम गढ़ रहे हैं. वहीं कानपुर से बिठूर मार्ग, वॉटर पार्क, मैनावती मार्ग और जाजमऊ में मल्टी स्टोरी भवनों का निर्माण शुरू हो रहा है. शहर का पुराना झकरकटी बस अड्डा रोज आने वाली 1,200 बसों का बोझ नहीं सह पा रहा. अब जाम से निबटने के लिए विकासनगर में आधुनिक बस अड्डा बनाने को हरी झ्ंडी दिखाई गई है.

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कानपुर में मेट्रो का काम तेजी चल रहा है (सांकेतिक तस्वीर)


शहर की प्रमुख ताकत

मजदूरों और औद्योगिक कारीगरों की उपलब्धता, इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई से जुड़े बेहतरीन शिक्षा संस्थान, कोचिंग व्यवसाय का प्रमुख केंद्र.

इनपुट: विकीपीडिया
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