UP Panchayat Chunav Results: गैंगस्टर विकास दुबे के बिकरू गांव में 25 साल बाद लोगों ने चुना अपना प्रधान

गैंगस्‍टर विकास दुबे 1995 में पहली बार प्रधान बना था.

गैंगस्‍टर विकास दुबे 1995 में पहली बार प्रधान बना था.

UP Panchayat Election Results 2021. गैंगस्‍टर विकास दुबे (Gangster Vikas Dubey) के गांव बिकरू में 25 साल बाद लोगों ने निष्पक्ष मतदान से महिला प्रत्‍याशी मधु को ग्राम प्रधान चुना है. आरक्षित सीट पर मधु ने अपनी विरोधी बिंदु कुमारी को 54 वोटों से हराया है.

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कानपुर. यूपी पंचायत चुनाव (UP Panchayat Election) को लेकर आज मतगणना का दौर जारी है. इस बीच कानपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. गैंगस्‍टर विकास दुबे (Gangster Vikas Dubey) के गांव बिकरू में 25 साल बाद निष्पक्ष मतदान से प्रधान का चुनाव किया गया है.

बिकरू गांव की आरक्षित सीट पर मधु ने अपनी विरोधी बिंदु कुमारी को 54 वोटों से हराकर जीत दर्ज की है. इससे पहले यहां विकास दुबे अपने परिवार के लोगों या चहेतों को लड़ाता था और उसका प्रत्याशी निर्विरोध जीतता था. मतलब प्रधान की घोषणा विकास दुबे ही कर देता था, चुनाव तो खानापूर्ति ही महज होते थे. साफ है कि विकास की सरपरस्ती में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की जीत बाहुबल के दम पर लगभग तय होती थी. यही नहीं, कई बार तो चुनाव असलहों के दम पर निर्विरोध ही जीता जाता था.

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बिकरू गांव के प्रधान पद के लिए मधु ने अपनी विरोधी बिंदु कुमारी को 54 वोटों से हराकर जीत दर्ज की है.


विकास दुबे 1995 में बना था प्रधान
गैंगस्‍टर विकास दुबे 1995 में पहली बार अपने रुतबे की दम पर प्रधान बना था. जिसके बाद बिकरू समेत आसपास के इलाकों में विकास और उसके साथियों की दहशत के साए में ही चुनाव होते थे. विरोध करने वाले प्रत्याशियों को धनबल के जरिए दबा दिया जाता था. जबकि इस बार आरक्षित सीट पर 10 उम्मीदवारों ने निर्भीक होकर पर्चा भरा है और अपनी अपनी जीत के लिए न सिर्फ जमकर प्रचार किया बल्कि गांव की गलियां और विकास के जमींदोज हुए मकान को भी प्रत्याशियों ने पोस्टर चिपकाकर पाट दिया था. यकीनन डेढ़ हजार आबादी वाली इस पंचायत के लोग इस बार विकास दुबे की दहशत से आजादी के बाद अपने मनपंसद प्रत्‍याशी को ग्राम प्रधान चुना है.

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गौरतलब है कि 2 जुलाई 2020 की रात चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में दबिश देने गई पुलिस टीम पर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी. इस शूटआउट में 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. इसके बाद एक्शन में आई पुलिस ने उसके चार गुर्गों को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया था, लेकिन मुख्य आरोपी विकास दुबे फरार चल रहा था. 9 जुलाई को विकास दुबे ने बड़े नाटकीय ढंग से उज्जैन के महाकाल मंदिर में सरेंडर कर दिया. इसके बाद उज्जैन से वापस लाते समय पुलिस की गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे पुलिस की पिस्टल लेकर भागा था, जिसके बाद पीछा करने पर उसने पुलिस पर फायरिंग की थी. पुलिस ने जवाबी फायरिंग की और विकास दुबे की मुठभेड़ में मौत हो गई थी. यही नहीं, न्यायिक जांच में इस मुठभेड़ को भी सही माना गया है.
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