UP STF की बड़ी कार्रवाई, कानपुर में Remidisvir के 265 इंजेक्‍शन बरामद

यूपी एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है.  (सांकेतिक फोटो)

यूपी एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. (सांकेतिक फोटो)

मिलिट्री इंटेल के इनपुट पर की गई कार्रवाई, दवाई की कालाबाजारी करते तीन लोग गिरफ्तार.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 11:05 PM IST
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कानपुर. एक तरफ कोरोना (Corona) से लोगों की जान जा रही है, अस्पतालों में बेड की कमी है, वहीं दूसरी तरफ इस मौके का फायदा उठाने वाले भी कम नहीं हैं. इसका उदाहरण कानपुर में देखने को मिला जब यूपी एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छापा मारा और रेमडेसिविर दवाई के इंजेक्‍शन के 265 वॉयल बरामद किए. इस दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया. जानकारी के अनुसार बाबू पुरवा इलाके में इस दवाई की खेप होने का मिलिट्री इंटेलिजेंस से यूपी एसटीएफ को इनपुट मिला था. इसके बाद एसटीएफ तत्काल हरकत में आई और यहां पर छापेमारी की. इस इंजेक्‍शन की बाजार में कमी होने के बाद इसकी ब्लैक मार्केटिंग की जा रही थी.

इससे पहले राज्य में हो रही रेमडेसिविर की कमी को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टेट प्लेन अहमदाबाद भेजकर 25 हजार डोज मंगवाई थीं. साथ ही सीएम योगी ने प्रदेश में रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता और बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. इस बाबत उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट भी तलब की है. सीएम योगी ने तीसरी बार स्टेट प्लेन को लोगों के जीवन को बचाने में काम आने वाली दवा लाने के लिए अहमदाबाद भेजा है. इससे पहले उन्होंने पिछले साल नौ जून को ट्रूनेट मशीनें मंगाने के लिए स्टेट प्लेन को गोवा भेजा था. सात अप्रैल को बैंगलोर से राजकीय विमान भेजकर मेडिकल इक्यूपमेंट मंगवाया था. सीएम योगी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया है कि बाजार में निर्धारित दरों पर रेमडेसिविर इंजेक्शन लोगों को मिले, इसे सुनिश्चित किया जाए.

सीएम योगी के निर्देश पर रेमडेसिविर इंजेक्शन सहित कोरोना के इलाज में उपयोग की जा रही आठ दवाओं की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है. जिसके तहत राज्य के हर जिले में रेमडेसिविर, आईवरमैक्टिन, पैरासिटामोल, डाक्सिसाईक्लिन, एजिथ्रोमायसिन, विटामिन सी, जिंक टेबलेट, विटामिन बी काम्पलेक्स और विटामिन डी 3 की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. इन दवाइयों की किसी भी जिले में कोई कमी ना होने पाए, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दवा निर्माता कंपनियों से बात की है.
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