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यहां विजयदशमी को मनाया जाता है रावण का जन्‍मदिन

यहां विजयदशमी को मनाया जाता है रावण का जन्‍मदिन

विजयदशमी यानी सामाजिक बुराइयों के अंत का दिन, असत्य पर सत्य की जीत का दिन, अधर्म पर धर्म की विजय का दिन. देश भर में दशहरे का त्यौहार मनाया जा रहा है. आज अधर्म के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया गया, जबकि यूपी के कानपुर में सुबह से रावण की पूजा की जा रही है.

विजयदशमी यानी सामाजिक बुराइयों के अंत का दिन, असत्य पर सत्य की जीत का दिन, अधर्म पर धर्म की विजय का दिन. देश भर में दशहरे का त्यौहार मनाया जा रहा है. आज अधर्म के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया गया, जबकि यूपी के कानपुर में सुबह से रावण की पूजा की जा रही है.

विजयदशमी यानी सामाजिक बुराइयों के अंत का दिन, असत्य पर सत्य की जीत का दिन, अधर्म पर धर्म की विजय का दिन. देश भर में दशहरे का त्यौहार मनाया जा रहा है. आज अधर्म के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया गया, जबकि यूपी के कानपुर में सुबह से रावण की पूजा की जा रही है.

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    विजयदशमी यानी सामाजिक बुराइयों के अंत का दिन, असत्य पर सत्य की जीत का दिन, अधर्म पर धर्म की विजय का दिन. देश भर में दशहरे का त्यौहार मनाया जा रहा है. आज अधर्म के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया गया, जबकि यूपी के कानपुर में सुबह से रावण की पूजा की जा रही है.

    यहां पर रावण का अनोखा मंदिर है, जिसे दशहरे के दिन ही पूजा के लिए खोला जाता है. रावण की मृत्यु के दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है. जबकि शारदीय नवरात्र के बाद दशमी के दिन ही रावण का जन्म भी हुआ था. इसी दिन रावण का जन्मदिन भी मनाया जाता है.

    कानपुर के शिवाला में रावण का मंदिर स्थित है, जिसे विजयदशमी के दिन खोला जाता है. रावण की प्रतिमा की पूजा करने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पर आते हैं. प्रकांड विद्वान दशानन की पूजा आस्था के साथ की जाती है. रावण के पुतले के दहन के बाद एक बार फिर पूजा करके मंदिर को बंद कर दिया जाता है, जो एक साल तक बंद रहता है.

    ऐसी मान्यता है कि यहां पर महिलाओं द्वारा पूजा करने पर उनके बच्चों को बुद्धि मिलती है. साथ ही उन्हें सुहागन रहने का वरदान मिलता है. प्रयागराज शिवाला में कई मंदिरों की श्रृंखला है. यहां पर रावण की प्रतिमा की स्थापना मां दुर्गा के पहरेदार के रूप में की गई है.

    रावण का यह अनोखा मंदिर दशहरे के दिन ही खुलता है. सुबह मंदिर के पट खोले जाने के साथ ही श्रद्धालुओं का तांता जुटना शुरू कर दिया जाता है. रावण की अच्छाइयों को ग्रहण करने के लिए श्रद्धालु यहां पर विधि-विधान से पूजा करते हैं. इसके साथ ही अपने परिवार के कल्याण की दुआ मांगते हैं.

    ऐसी मान्यता है कि विजयदशमी के दिन रावण के दरबार में पूजा करने वाला खाली हाथ नहीं जाता. उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही वजह है कि दूर-दूर से लोग लंकेश की पूजा के लिए यहां पहुंचते हैं.

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    Tags: Uttar pradesh news, कानपुर

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