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कासगंज: पेड़ से टकराई तेज रफ्तार इनोवा कार, दूल्हा समेत चार लोगों की मौत, चार अन्य घायल

पेड़ से हुई यह टक्कर इतनी तेज थी की दूल्हा-दुल्हन को ले जा रहे इनोवा वाहन के परखच्चे उड़ गए

पेड़ से हुई यह टक्कर इतनी तेज थी की दूल्हा-दुल्हन को ले जा रहे इनोवा वाहन के परखच्चे उड़ गए

Uttar Pradesh News: शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन को लेकर लौट रहे इनोवा वाहन का ड्राइवर उस पर नियंत्रण नहीं रख सका और वो सड़क किनारे पेड़ से जाकर टकरा गई. इस दुर्घटना में चालक समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि दूल्हा-दुल्हन सहित पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान दूल्हा बिजेंद्र ने दम तोड़ दिया

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कासगंज. उत्तर प्रदेश के कासगंज (Kasganj) में एक तेज रफ्तार इनोवा गाड़ी पेड़ से टकरा गई. इस दुर्घटना (Accident) में इनोवा में सवार दूल्हा और उसके परिवार के तीन अन्य लोगों की मौत हो गई. जबकि दुल्हन समेत चार लोग घायल हुए हैं. घटना सिढ़पुरा थाना क्षेत्र के बाजिदपुर के पास गंजडुंडवारा रोड की है. सूचना मिलने पर घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन से घायलों को बाहर निकालकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया. पुलिस ने मृतकों के शवों का पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है.

मिली जानकारी के मुताबिक कासगंज जनपद के नगला भुजपुरा गांव से होरी लाल के पुत्र बिजेंद्र की बारात सिरसौल ग्राम पंचायत के नगला बरी निवासी कुंवर सिंह शाक्य के यहां गई थी. शादी की रस्में दिन में निभाई गई थी. शादी संपन्न होने के बाद बिजेंद्र अपनी दुल्हन की विदाई करा कर इनोवा गाड़ी से अपने गांव वापस लौट रहा था. बताया जा रहा है कि रास्ते में ड्राइवर वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और वो सड़क किनारे पेड़ से जाकर टकरा गई. यह टक्कर इतनी तेज और जोरदार थी कि इनोवा के परखच्चे उड़ गए. इस दुर्घटना में चालक समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि दूल्हा-दुल्हन सहित पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान दूल्हा बिजेंद्र ने दम तोड़ दिया.

मृतकों की पहचान दूल्हा बिजेंद्र, उसके पिता होरीलाल, इनोवा चालक कल्याण और प्रवीण नाम के व्यक्ति के रूप में हुई है. इस हादसे की सूचना मिलते ही दूल्हा और दुल्हन के परिवार में कोहराम मच गया. जिस घर में शादी की खुशियां थी पल भर में वहां मातम पसर गया.

दुर्घटना की सूचना मिलने पर सीओ पटियाली दीप कुमार पंत और थानाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह मय हमाराह के घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने वहां जुटे लोगों की मदद से कड़ी मशक्कत कर क्षतिग्रस्त गाड़ी में फंसे लोगों को बाहर निकाला. इसके बाद सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचवाया गया.

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कासगंज: UP में चल रही थी कारतूस की अवैध फैक्टरी, कई राज्यों में होती थी सप्लाई, 2 अरेस्ट

कासगंज की कारतूस फैक्टरी से जब्त की गईं चीजें और गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों के साथ पटियाली पुलिस.

Crime in UP : कासगंज के पुलिस अधीक्षक रोहन प्रमोद बोत्रे ने बताया कि पकड़े गए मो. आलम और जान आलम शातिर किस्म के अपराधी हैं. वे दिल्ली क्षेत्र से खोखे और विस्फोटक लाकर जिले के पटियाली क्षेत्र के भरगैन में कारतूस बनाने का काम करते थे.

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कासगंज. जनपद कासगंज में फिर से अवैध कारतूस की फैक्टरी का भंडाफोड़ हुआ है. पुलिस छापेमारी में यहां से भारी संख्या में खोखे, कारतूस और भारी मात्रा विस्फोटक पदार्थ बरामद हुए हैं. पुलिस के अनुसार दिल्ली क्षेत्र से खोखे और विस्फोटक लाकर कासगंज में कारतूस बनाए जाते थे. यहां बने कारतूस उत्तर प्रदेश के आसपास के प्रदेशों में सप्लाई किए जाते थे. इस छापेमारी में पटियाली पुलिस ने कारतूस फैक्टरी में काम कर रहे दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि फैक्टरी का संचालक पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया.

कासगंज के पुलिस अधीक्षक रोहन प्रमोद बोत्रे ने न्यूज 18 को बताया कि पकड़े गए मो. आलम और जान आलम शातिर किस्म के अपराधी हैं. वे दिल्ली क्षेत्र से खोखे और विस्फोटक लाकर जिले के पटियाली क्षेत्र के भरगैन में कारतूस बनाने का काम करते थे. कारतूस बनाने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश के पड़ोसी प्रदेशों में सप्लाई किया करते थे. इन आरोपियों के तार दिल्ली, पंजाब हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और जम्मू कश्मीर तक जुड़े हुए हैं. फरार अपराधी छिद्दन आलम भी शातिर किस्म का अपराधी है, जो करीब 10 वर्ष से इस धंधे में लिप्त है. उसकी तलाश की जा रही है. उसकी गिरफ्तारी के बाद ही पता चल सकेगा कि आखिर किस-किस प्रदेशों में यहां से कारतूस बनाकर सप्लाई किया करते थे. पुलिस के अनुसार, इनके तार आतंकवादियों से जुड़े हुए हो सकते हैं. एसपी ने स्पेशल टीम बनाकर छानबीन शुरू कर दी है.

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कासगंज जिले के 30 हजार की आबादी वाले गांव भरगैन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के माथे की लकीरें अब गहरी हो चली हैं. यहां पुलिस कार्रवाई और छापेमारी में अवैध हथियारों के जखीरे और निर्माण से जुड़े उपकरण भारी मात्रा में मिल रहे हैं. भरगैन में 99 फीसदी आबादी एक समुदाय विशेष की है. इसलिए भी सुरक्षा एजेंसियां इस इलाके को लेकर खास सतर्क हैं. 16 सितंबर को हुई छापेमारी में पटियाली पुलिस ने 315 बोर के 197 खोखे, 315 बोर के 61 कारतूस, 12 बोर के 107 छर्रे और 73 खोखे, 12 बोर के 42 कारतूस, 32 बोर के 24 कारतूस, 375 ग्राम बारूद, 1 किलो पोटाश, 315 बोर के 2 तमंचे, 1 रायफल और कारतूस भरने के उपकरण आदि जब्त किए हैं.

मिट्टी में दबी मिली एक पुरानी गुल्लक, फोड़ी तो मिले 400 साल पुराने सिक्के

सिक्के अब जिला प्रशासन को सौंपे जाएंगे और विरासत के तौर पर सहेजेंगे.

UP News: कासगंज के एक खाली प्लॉट में मिली प्राचीन गुल्लक, 15 बेशकीमती प्राचीन सिक्के मिले, 11 सिक्के पुलिस ने किए बरामद, वहीं सोने के चार सिक्के लेकर एक युवक हुआ फरार.

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कासगंज. जनपद के एक प्लॉट में जब मिट्टी डलवाई गई तो उसमें से कुछ ऐसा मिला कि अब उसकी चर्चा पूरे सूबे में हो रही है. यहां पर एक प्लॉट पर मिट्टी डलवाई गई इस पर कुछ कुछ बच्चे खेल रहे थे उन्हें अचानक वहां पर एक प्राचीन गुल्लक मिली. बच्चों ने उसे फोड़ा तो उसमें से कुछ सिक्के मिले. इन सिक्कों को दो बच्चों और एक युवक ने आपस में बांट लिया. इसके बाद बच्चे सिक्के लेकर अपने घर पहुंचे और परिजनों को दिखाए. इसके बाद किसी ने सोशल मीडिया पर इन सिक्कों के फोटो और जानकारी पोस्ट कर दी. पोस्ट वायरल होने पर इसकी सूचना पुलिस को भी मिली.
पुलिस के अनुसार मोहल्ला टोला इलाके में एक खाली प्लॉट में बच्चों को ये गुल्लक मिली. जिसके बाद पुलिस ने बच्चों की तलाश की और उनके घर पहुंचे तो परिजनों ने पूरे मामले की जानकारी दी और सिक्के भी पुलिस को सौंप दिए.

400 साल पुराने हैं सिक्के
पुलिस ने बताया कि दो बच्चों के पास से 11 सिक्के बरामद किए गए हैं. वहीं एक युवक 4 सिक्के लेकर फरार है. बताया जा रहा है कि ये सिक्के करीब 300 से 400 साल पुराने हैं. बरामद किए गए 11 सिक्कों की धातु का फिलहाल पता नहीं चल सका है लेकिन माना जा रहा है कि ये चांदी के हैं. वहीं सलमान नामक युवक 4 सिक्के लेकर फरार हो गया है और बच्चों ने बताया कि वे सिक्के सोने के थे.

धरोहर के तौर पर सहेजेंगे
वहीं पुलिस अधीक्षक रोहन प्रमोद बोत्रे ने बताया कि गुल्लक से करीब 15 सिक्के बरामद जिनमें से 11 सिक्कों को बच्चों से ले लिया गया है. वहीं एक सलमान नामक युवक फरार चल रहा है जिसके बाद 4 और सिक्के हैं. अब उसकी तलाश की जा रही है. उन्होंने बताया कि सिक्के किस समय के हैं उसका सही सही तो नहीं पता चल सका है लेकिन मामना जा रहा है कि ये 300 से 400 साल पुराने हैं. बोत्रे ने बताया कि अब इन सिक्कों को जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा. जिससे इन्हें धरोहर के तौर पर सहेजा जा सके. बोत्रे ने बताया कि फिलहाल मामले की और जांच की जा रही है.

कासगंज पहुंचीं कल्याण सिंह की अस्थियां, विसर्जन के साथ जय श्रीराम से गूंजा हरिपदी गंगाघाट

कासगंज पहुंचीं कल्याण सिंह की अस्थियां, हरिपदी गंगा घाट पर हुआ विसर्जन

Kasganj News : पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की अस्थि कलश यात्रा रविवार को कासगंज पहुंची. लोगों ने कलश यात्रा पर पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया, वहीं विधि-विधान से कल्याण सिंह की अस्थियों को सोरों की हरिपदी गंगा में विसर्जित कर दिया गया.

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कासगंज. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह (Kalyan Singh) की अस्थि कलश विसर्जन यात्रा रविवार को कासगंज (Kasganj) पहुंची. जहां लोगों ने कलश यात्रा पर पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया वहीं विधि-विधान पूर्वक मंत्र उच्चारण के साथ पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की अस्थियों को सोरों की हरिपदी गंगा में विसर्जित किया गया.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह अपने पिता कल्याण सिंह की अस्थि विसर्जन यात्रा को लेकर सबसे पहले कासगंज पहुंचे. एटा और कासगंज की सभी विधानसभा में अस्थि कलश यात्रा को घुमाया गया. अस्थि कलश विसर्जन यात्रा के साथ सैकड़ों गाड़ियों का काफिला साथ चल रहा था. अस्थि कलश यात्रा पर जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा की, जिसके बाद कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह अपने पिता की अस्थियों को लेकर सोरों की हरिपदी गंगा पहुंचे. यहां मौजूद वेद व्यास ब्राह्मण पंडित दिलीप वशिष्ठ और उनके सहयोगियों के द्वारा विधि विधान पूर्वक मंत्रोच्चारण के साथ अस्थियों का विसर्जन कराया गया.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह की अस्थियों का गंगा में विसर्जन होते ही कल्याण सिंह अमर रहें और जय श्री राम के नारों से हरिपदी गंगा घाट गूंज उठा. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री की अस्थियों को विधि विधान से विसर्जन कारने वाले तीर्थ पुरोहित प. दिलीप वशिष्ठ ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राम मंदिर के लिए अपनी सरकार का बलिदान देने वाले स्वर्गीय कल्याण सिंह के अस्थि विसर्जन का कार्यक्रम विधि विधान से किया गया है. उन्होंने बताया यह तीर्थ स्थल प्राचीन तीर्थ स्थल है. इसकी मान्यता है कि यहां जो भी अपने पूर्वजों की अस्थियों को लाकर विसर्जन करता है उसकी अस्थियां 3 दिन में ही रेणु रूप ले लेती हैं, यानी पानी में घुल जाती हैं.

उन्होंने बताया यहीं भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अस्थियों का भी विसर्जन किया गया था और भारत के ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की अस्थियों को भी यहीं लाकर विसर्जन किया गया था. इसके अलावा भारत देश के तमाम बड़े नेताओं की अस्थियां यहां विसर्जन हो चुकी हैं.

इस बार कल्याण सिंह के नाम पर होगा कासगंज का नामकरण, जिला पंचायत भेजेगी शासन को प्रस्ताव

कासगंज जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में कासगंज का नाम बदलकर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कल्याण सिंह के नाम पर रखने का प्रस्ताव पारित हो गया है.

मायावती सरकार के समय 17 अप्रैल 2008 को एटा से अलग होकर कासगंज नया जिला बना. कुछ वक्त बाद इसका नाम कांशीराम नगर किया गया. सपा सरकार ने 2012 में फिर इसका नाम कासगंज कर दिया. अब एकबार फिर इसका नाम बदले जाने की तैयारी की जा रही है.

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कासगंज. जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में कासगंज (Kasganj) का नाम बदलकर पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यपाल स्वर्गीय कल्याण सिंह (Kalyan Singh) के नाम पर रखने का प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया है. अब कासगंज जिला पंचायत (Kasganj District Panchayat) जिले का नाम बदलने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश शासन को भेजेगी.

हाल ही में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन के बाद कासगंज जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में उनके नाम से जिले का नाम रखे जाने का प्रस्ताव आया. शनिवार 4 सितंबर को कासगंज जिला पंचायत बोर्ड की बैठक अध्यक्ष रत्नेश कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित हुई. कासगंज जिला पंचायत वॉर्ड संख्या 4 की सदस्य सितारा कश्यप ने बैठक में प्रस्ताव रखा कि जिला कासगंज का नाम बदलकर स्वर्गीय कल्याण सिंह के नाम पर रखा जाए. सदस्यों ने इस प्रस्ताव को बहुमत से पारित कर दिया. जिला पंचायत अध्यक्ष रत्नेश कश्यप ने जानकारी दी कि कासगंज बोर्ड में पारित इस प्रस्ताव को अब उत्तर प्रदेश शासन को भेजा जाएगा.

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आपको बताते चलें कि मायावती सरकार में उत्तर प्रदेश के जिला कासगंज का गठन 17 अप्रैल 2008 को हुआ था. पहले यह एटा जिले का हिस्सा था. उस दौरान भी कासगंज जिले का नाम बदलकर कांशीराम नगर रखा गया था. बाद में वर्ष 2012 में सूबे की सरकार बदलने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कासगंज जिले का नाम कांशीराम नगर से बदलकर फिर से कासगंज कर दिया था. अब एक बार फिर से कासगंज जिले का नाम बदलकर स्वर्गीय कल्याण सिंह के नाम पर रखे जाने की तैयारी हो रही है, जिसके बाद राजनैतिक सरगर्मी बढ़ गई है. कासगंज जिले का एक बार फिर से नाम बदलने का प्रस्ताव ऐसे समय पर पारित हुआ है, जब स्थानीय लोग कासगंज जिले का नाम बदलकर संत तुलसीदास नगर अथवा भगवान वराह नगर रखने की मांग कर रहे हैं.

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वहीं कासगंज जिले के स्थानीय निवासी व अखंड आर्यावर्त निर्माण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेश शर्मा ने कासगंज जिले का नाम बदलकर कल्याण सिंह के नाम पर रखने को लेकर कहा कि सर्वसमाज में स्वर्गीय कल्याण सिंह एक सम्मानीय व्यक्ति के तौर पर हैं. जिला अलीगढ़ का अतरौली उनका गृह क्षेत्र है, इसलिए अतरौली क्षेत्र को एक नया जिला सृजित कर उसे कल्याण सिंह नगर का नाम दिया जाना चाहिए.

पत्‍नी और बच्‍चों की हत्‍या करने के बाद 3 साल तक हुलिया और ठिकाने बदलता रहा शातिर, जानें कैसे पकड़ में आया मास्‍टरमाइंड

महिला पुलिसकर्मी के प्‍यारे में राकेश ने अपनी पत्‍नी और बच्‍चों समेत दोस्‍त का मर्डर किया था.

Crime News: दिल्‍ली से सटे यूपी के ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) के बिसरख थाना क्षेत्र में तीन साल पहले एक शख्‍स ने महिला पुलिसकर्मी के प्यार में अपनी पत्‍नी और दो मासूम बच्चों की हत्या (Murder) कर शव घर के बेसमेंट में दफना दिए थे. यही नहीं, इन हत्‍याओं को राज न खुले इसके लिए उसने अपने दोस्‍त को भी मौत के घाट उतार दिया. इसके बाद वह तीन साल तक अपनी पहचान छुपाने और खुद को ‘मृत’ घोषित रखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी (Plastic Surgery) समेत कई जतन करता रहा.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 04, 2021, 09:15 IST
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नोएडा. दिल्‍ली से सटे यूपी के ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) के बिसरख थाना के अंतर्गत चिपियाना बुर्ज गांव की पंच बिहार कॉलोनी में हुईं चार हत्‍याओं (Murder) का सनसनीखेज खुलासा कई दिनों से चर्चा में है. यही नहीं, अपनी पत्नी, दो बच्चों और दोस्त के कथित हत्यारे ने तीन साल तक अपनी पहचान छुपाने और खुद को ‘मृत’ घोषित रखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी (Plastic Surgery) कराने से लेकर जगह बदलते रहने जैसे तमाम जतन नहीं किये, लेकिन अंतत: वह पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया. कासगंज पुलिस ने बताया कि 34 वर्षीय राकेश को दो दिन पहले हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि राकेश का एक पुलिसकर्मी रूबी के साथ विवाहेतर संबंध था, जिसके कारण उसने अपने परिवार के सदस्यों को मार डाला और उनके शव को बिसरख स्थित घर के तहखाने में दफना दिया. आरोपी ने कथित तौर पर उसी साल कासगंज में अपने दोस्त राजेंद्र की हत्या कर दी थी, ताकि पुलिस को यह विश्वास हो सके कि वह वही था, क्योंकि उसकी ऊंचाई और कद समान था.

ऐसे आरोपी तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने कहा कि यह मामला तब सामने आया जब फाइलों को फिर से खोला गया और सिर कटी लाश से डीएनए के नमूने लिए गए. कासगंज के एसपी बोत्रे रोहन प्रमोद ने कहा कि हम जिले के पुराने मामलों की समीक्षा कर रहे थे. जब हमने इस मामले की जांच शुरू की तो पाया कि लैब के नमूनों की जांच नहीं की गई थी. हमने आगरा में एफएसएल विभाग से संपर्क किया और डीएनए रिपोर्ट से पता चला कि तीन साल पहले मिला शव उस व्यक्ति का नहीं था जिसकी पहचान परिवार ने नहीं की थी. उसके बाद हम राकेश को ढूंढ निकालने में जुट गये और एक महीने बाद यह मामला सुलझ सका. आरोपी ने पहचान छुपाने के लिए अपना हुलिया भी बदला और ठिकाने भी.

बचने के लिए ये जतन करता रहा राकेश
पुलिस ने बताया कि फरवरी 2018 में, राकेश के खिलाफ ग्रेटर नोएडा में उसकी पत्नी रत्नेश और दो बच्चों के गायब होने के बाद अपहरण का मामला दर्ज किया गया था. महीनों बाद कासगंज में बिना सिर और कलाई का एक शव मिला, जिसकी पहचान राकेश के रूप में उसके भाई ने की थी. पुलिस ने कहा कि दोनों मामलों में जांच लंबित थी.

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पुलिस के अनुसार, हत्याओं के बाद राकेश ने अपनी नाक की प्लास्टिक सर्जरी करवाई और अपना सिर, मूंछें और दाढ़ी मुंडवा ली. फिर वह हरियाणा भाग गया और दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करना शुरू कर दिया. इसके बाद राकेश कुछ समय के लिए जम्मू गया और फिर उत्तर प्रदेश वापस आ गया. इस बीच वह अपनी पहचान बदलता रहा. उसका एक उपनाम दिलीप शर्मा था और इसी नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया गया था.

पुलिस ने बताया कि ठिकाना बदलते रहने के बावजूद राकेश अपनी प्रेमिका के सम्पर्क में लगातार बना रहा. जब वह कासगंज में रूबी से मिलने गया था तब उसे गिरफ्तार कर लिया गया. कासगंज पुलिस ने रूबी, राकेश के पिता बनवारी लाल, उसके भाई राजीव और दो अन्य रिश्तेदारों, इंद्रावती और प्रवेश को भी कथित हत्या और साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया है.

जानकारी के अनुसार, इसी मकान में राकेश रहता था जिसकी शादी 2012 में एटा में रहने वाली महिला रत्नेश के साथ हुई थी, लेकिन राकेश का प्रेम प्रसंग गांव में रहने वाली रूबी से चल रहा था, जो कि 2015 में पुलिस में कांस्टेबल पद पर तैनात हुई थी. जब रूबी ने राकेश पर शादी का दबाव बनाया तब उसने 14 फरवरी 2018 को अपनी पत्नी रत्नेश और दोनों बच्चों (3 साल के अर्पित और 2 साल की अवनी) को मार डाला और उनके शवों को घर के बेसमेंट में दफना दिया. यही नहीं, किसी को पता ना चले इसलिए उसके ऊपर सीमेंट का फर्श बना दिया. राकेश के पिता पुलिस से रिटायर्ड हैं.

Kasganj News: कोर्ट ने बीजेपी विधायक को 11 साल पुराने मामले में सुनाई सजा, फिर एक लाख के मुचलके पर रिहा

11 पुराने  मारपीट के एक मामले में बीजेपी विधायक को कोर्ट ने सुनायी एक साल की सजा

Kasganj BJP MLA Sentenced: देवेंद्र सिंह राजपूत कासगंज सदर सीट से विधायक हैं. सिंह एवं उनके सहयोगी दोनों मंगलवार को स्पेशल कोर्ट के समक्ष हाजिर हुए थे. जिसके बाद फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया था और कहा था कि अभियोजन पक्ष ने अपना केस स्थापित और साबित किया है.

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कासगंज. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कासगंज (Kasganj) जिले की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 2010 के एक आपराधिक मामले में बीजेपी विधायक देवेन्द्र सिंह राजपूत (BJP MLA Devendra Singh Rajput) और उनके सहयोगी कौशल को दोषी ठहराया और 15-15 हजार के जुर्माने के साथ एक-एक साल की सजा सुनाई. हालांकि सजा सुनाने के ठीक बाद दोनों को एक वर्ष के लिए प्रोबेशन पर रिहा करने का आदेश दिया. साथ ही कोर्ट ने दोनों को फैसले की तारीख से 10 दिनों के भीतर डिस्ट्रिक्ट प्रोबेशन ऑफिसर के समक्ष एक-एक लाख रुपये के बॉण्ड भरने का निर्देश दिया है.

अपर जिला जज गगन कुमार भारती ने दोनों को ‘अच्छे व्यवहार और शांति बनाये रखने’ के आधार पर जमानत दी है. देवेंद्र सिंह राजपूत कासगंज सदर सीट से विधायक हैं. सिंह एवं उनके सहयोगी दोनों मंगलवार को स्पेशल कोर्ट के समक्ष हाजिर हुए थे. जिसके बाद फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया और 15 हजार के जुर्माने के साथ एक साल की सजा सुनाई था और कहा था कि अभियोजन पक्ष ने अपना केस स्थापित और साबित किया है.

ये है पूरा मामला
एक दशक से अधिक समय पहले, विधायक एवं उनके सहयोगियों- ब्रजपाल और कौशल- के ऊपर एक दुकान को लेकर हुए विवाद के सिलसिले में चोखेलाल नामक व्यक्ति के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया था. उनके खिलाफ आईपीसी की धाराओं 323, 325, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. इस मामले में 25 जनवरी 2010 को आरोप पत्र दायर किये गये थे. अभियोजन के अनुसार, एक जनवरी 2010 को चोखेलाल ने विधायक और उनके सहयोगियों बृजपाल और कौशल के खिलाफ गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) दर्ज करायी थी. चोखेलाल ने आरोप लगाया था कि सिंह और उनके सहयोगियों ने लाठियों से मारा था और खुलेआम जनता के सामने गालियां दी थी. उसके आरोपी घटनास्थल से भाग गये थे और पीड़ित को अस्पताल पहुंचाया गया था जहां उन्हें चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करायी गयी थी.

सरकारी वकील ने कही ये बात
कासगंज के सरकारी वकील एसएस रघुवंशी ने कहा, “कोर्ट ने मंगलवार को यह कहते हुए देवेंद्र सिंह और कौशल को दोषी ठहराया था कि अभियोजन ने मुकदमा स्थापित और साबित किया है. बाद में केस के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए, कोर्ट ने दोषियों को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर एक्ट के प्रावधानों का लाभ दिया. उनलोगों को प्रोबेशन पर रिहा किया गया.”

तीसरे अभियुक्त की हो चुकी है मौत
कोर्ट ने कहा कि प्रोबेशन की इस अवधि में ये किसी भी असामाजिक गतिविधियों में शामिल होते हैं या रिहाई के किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें सजा के लिए कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना होगा. तीसरा अभियुक्त बृजपाल की पहले ही मौत हो चुकी है.

Noida News: महिला पुलिसकर्मी के प्यार में पत्‍नी और 2 बच्‍चों का किया मर्डर, अपनी मौत का स्वांग रचने के लिए दोस्‍त की ली जान

महिला पुलिसकर्मी के प्यार में पत्नी और 2 बच्चों के साथ दोस्‍त का किया मर्डर.

UP Crime News: यूपी के गौतम बुद्ध नगर (Gautam Buddha Nagar) के बिसरख थाना से हत्‍या का सनसनीखेज मामला सामने आया है. महिला पुलिसकर्मी के प्यार में दीवाने एक शख्‍स ने अपनी पत्‍नी और दो मासूम बच्चों की हत्या (Murder) कर शव घर के बेसमेंट में न सिर्फ दफना दिए बल्कि उस पर सीमेंट का फर्श भी बना दिया. यही नहीं, इन हत्‍याओं को राज न खुले इसके लिए उसने अपने दोस्‍त को भी मौत के घाट उतार दिया. जानें खौफनाक कहानी के बारे में सबकुछ...

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हिमांशु शुक्‍ला 

नोएडा. यूपी के नोएडा (Noida) में महिला पुलिसकर्मी के प्यार में दीवाने हुए एक शख्स ने अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों की हत्या (Murder) कर शव घर के बेसमेंट में दबा दिए. इसके बाद अपने दोस्त की हत्या कर अपनी निशानी छोड़ कर खुद की मौत का स्वांग रचा और अपनी प्रेमिका के साथ पहचान छुपा कर रह रहा था, लेकिन दोस्त की हत्या की जांच कर रही कासगंज पुलिस (Kasganj Police) ने शक के आधार पर उसे धर दबोचा. जब मामला खुला तो उसने अपनी पत्नी और अपने दो बच्चों की हत्या की बात कबूल ली. अब पुलिस बेसमेंट की खुदाई कर उसके बयान की पुष्टि करने के साथ सबूत जुटाने में जुटी है.

यह मामला गौतम बुद्ध नगर (Gautam Buddha Nagar) के बिसरख थाना के अंतर्गत चिपियाना बुर्ज गांव की पंच बिहार कॉलोनी का है. जबकि खुदाई का काम उत्तर प्रदेश के कासगंज की पुलिस द्वारा किया जा रहा है. जानकारी के अनुसार, इसी मकान में राकेश रहता था जिसकी शादी 2012 में एटा में रहने वाली महिला रत्नेश के साथ हुई थी, लेकिन राकेश का प्रेम प्रसंग गांव में रहने वाली रूबी से चल रहा था, जो कि 2015 में पुलिस में कांस्टेबल पद पर तैनात हुई थी. जब रूबी ने राकेश पर शादी का दबाव बनाया तब उसने 14 फरवरी 2018 को अपनी पत्नी रत्नेश और दोनों बच्चों (3 साल के अर्पित और 2 साल की अवनी) को मार डाला और उनके शवों को घर के बेसमेंट में दफना दिया. यही नहीं, किसी को पता ना चले इसलिए उसके ऊपर सीमेंट का फर्श बना दिया. इस अपराध में राकेश के पिता बनवारी लाल, मां इंदुमती, भाई राजीव और प्रवेश शामिल थे. राकेश के पिता पुलिस से रिटायर्ड हैं.

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फिर रचा अपनी मौत का स्‍वांग
राकेश इन हत्याओं के बाद अपनी पहचान छुपा कर प्रेमिका रूबी के साथ रह रहा था. उसे डर था कि कहीं उसकी पहचान उजागर न हो जाए, इसलिए उसने एक और हत्या करने की योजना बनाई और 25 अप्रैल 2021 को अपने दोस्त का मर्डर कर दिया. उसके शव को बुरी तरह कुचल दिया, ताकि उसकी पहचान ना हो सके. इसके बाद अपना आधार कार्ड और एलाईसी के पेपर रख दिए ताकि पुलिस को यह लगे उसकी हत्या हुई है. जब कासगंज की ढोलना पुलिस ने हत्या की जांच शुरू की तो शक की सुई राकेश तक पहुंच गई और जब पुलिस ने उसे पकड कर सख्‍त तरीके से पूछताछ की, तो उसने अपनी पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या राज उगल दिया. यही नहीं, अब कासगंज पुलिस तथ्यों की पुष्टि और सबूतों की बरामदगी के लिए ये खुदाई करवा रही है.

Kasganj News: 10 साल पुराने मामले में बसपा के पूर्व विधायक सहित 9 को 7 साल की सजा

पूर्व बसपा विधायक हसरतुल्लाह शेरवानी को सात साल की सजा

Kasganj News: सजा के ऐलान के बाद दोषियों को जेल भेज दिया गया. कोर्ट ने तत्‍कालीन कलेक्‍टर और एसएसपी के खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा की है.

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कासगंज. उत्‍तर प्रदेश के कासगंज (Kasganj) जिला कोर्ट ने बुधवार को बीएसपी (BSP) के पूर्व विधायक हसरतउल्ला शेरवानी (Hasratullah Sherwani) सहित 9 अभियुक्‍तों को 10 साल पुराने मामल में दोषी करार देते हुए 7 साल कैद की सजा सुनाई है. बीते दिनों 21 अगस्त को कोर्ट ने इसी प्रकरण में पूर्व विधायक हसरतउल्ला शेरवानी समेत 9 को दोषी करार दिया था और तीन दिन बाद 24 अगस्त को 7 साल की सज़ा का ऐलान किया. सजा के ऐलान के बाद दोषियों को जेल भेज दिया गया.

आपको बताते चलें कि 10 साल पहले 22 मई 2011 को  कासगंज जिले के थाना ढोलना की हवालात में तत्कालीन बसपा विधायक हसरतउल्ला शेरवानी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और पुलिसकर्मियों से कहा कि मुल्जिम शमशाद कहां है. शमशाद के हाथ पैर अभी तक किसी ने क्यों नहीं तोड़े. थाने वालों की वर्दी उतरवा दूंगा. यह कहते हुए विधायक हसरतउल्ला शेरवानी व उनके समर्थकों ने एक राय होकर अपनी बंदूकों, लाठी-डंडों से थाना ढोलना की हवालात के गेट पर ही शमशाद पर जानलेवा हमला बोल दिया. समय पर पुलिस ने हस्‍तक्षेप कर शमशाद को बचा लिया. इस मामले में 14 सितम्बर 2012 को मुकदमा दर्ज हो सका. 21 अगस्त 2021 को कासगंज कोर्ट ने पूर्व विधायक हसरतउल्ला शेरवानी समेत 9 लोगों को उक्त प्रकरण में दोषी करार देकर जेल भेज दिया था. 24 अगस्त 2021 दिन बुधवार को 7 साल की सश्रम सज़ा का ऐलान भी कर दिया.

तत्कालीन DM-SSP के खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा
कासगंज कोर्ट के अपर जिला जज गगन कुमार भारती ने अपने आदेश में कहा कि हसरतउल्ला शेरवानी, वजाहत शेरवानी, शमीम, युसुफ, दिलशाद, हबीब, समरुद्दीन, कमर और समर को मुकदमा संख्या 408/12 में धारा 147, 148, 149, 307, 323, 332, 353, 452, 504, 506 के अंतर्गत 7 साल सश्रम कारवास दिया जाता है. कोर्ट ने कासगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी के के खिलाफ कर्तव्य निर्वहन न करने और अभियुक्‍तों को अनुचित लाभ पहुंचाते हुए कोई कार्रवाई न करने को दृष्टिगत रखते हुए उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक एवं विधिक कार्रवाई करने की अनुशंसा भी की है.

Kasganj News: सिपाही की राइफल लूटने वाले बदमाश का एनकाउंटर, पैर में लगी गोली

Kasganj: सिपाही की राइफल लूटने वाला बदमाश पुलिस मुठभेड़ में घायल

Kasganj Police Encounter: मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने कोतवाली सोरों क्षेत्र के कासगंज बरेली हाईवे के निकट गंगा की गठरी में गोला कुआं के पास एक बदमाश को बाइक पर जाते हुए रोकने का प्रयास किया, तभी बदमाश ने भागने की कोशिश करते हुए पुलिस पर फायरिंग कर दी.

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कासगंज. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कासगंज (Kasganj) जिले में पुलिस (Police) ने गंगा की कटरी में सिपाही से राइफल लूटने वाले एक बदमाश को एनकाउंटर (Encounter) के बाद गिरफ्तार कर लिया. मुठभेड़ के दौरान बदमाश के पैर में गोली लगी. गिरफ्तार बदमाश को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. बदमाश के कब्जे से एक अपाचे बाइक सहित एक तमंचा और बीते दिनों सिपाही से लूटी गई रायफल भी बरामद की गई है.

बता दें कि 18 व 19 अगस्त की रात कोतवाली सदर क्षेत्र में अमेजन स्टोर पर कुछ बदमाश ताला तोड़कर सामान चोरी कर रहे थे, तभी गश्त कर रहे कोबरा आरक्षी रवि कुमार और अभिषेक प्रताप सिंह ने बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की . बदमाश लोहे की रॉड और सरिया से पुलिसकर्मियों पर हमला करते हुए आरक्षी अभिषेक प्रताप सिंह की इंसास रायफल मय मैग्जीन लूटकर होण्डा कार से फरार हो गए थे. इसके बाद कोतवाली सदर पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ सिपाही से रायफल लूट की घटना का मामला दर्ज कर लिया था और तभी से लगातार पुलिस बदमाशों की तलाश में आसपास के कई जिलों में दबिश देकर बदमाशों को पकड़ने की कोशिश कर रही थी.

मुखबिर की सूचना पर की घेराबंदी
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने कासगंज बरेली हाईवे के पास गंगा की गठरी में गोला कुआं के पास बाइक सवार बदमाश को रोकने का प्रयास किया, बदमाश ने पुलिस पर फायरिंग कर दी. पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बदमाश की घेराबंदी कर पकड़ लिया. बदमाश पवन के पैर में गोली लगी. इसके बाद आनन-फानन में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है.

एसपी ने कही ये बात
कासगंज एसपी रोहन पी बोत्रे ने बताया कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि बदमाश पुलिस कर्मियों से लूटी रायफल को ठिकाने लगाने के लिए कहीं जा रहा है. इस सूचना पर पुलिस ने मुखबिर की बताई जगह पर आने जाने वाले व्यक्तियों व वाहनों की चेकिंग शुरु की . इसी दौरान कोतवाली सोरों इलाके में गोला कुआं गंगा कटरी के पास एक व्यक्ति मोटर साइकिल पर आता हुआ दिखाई दिया. जिसके पीछे थैला बंधा हुआ था. पुलिस कर्मियों ने रोका तो मोटर साइकिल सवार बदमाश ने पुलिसकर्मियों पर जान से मारने की नीयत से अवैध तमंचे से फायर किया. पुलिस ने खुद को बचाते हुए आड़ लेकर जवाबी फायर किया गया तो एक गोली बदमाश के दाहिने पैर में लगी, जिससे वह घायल होकर गिर गया. नाम पता पूछने पर उसने अपना नाम पवन पुत्र श्यामवीर निवासी कंचनपुर थाना सुन्नगढ़ी जनपद कासगंज बताया. मौके से एक तमंचा 315 बोर व खोखा जिन्दा कारतूस बरामद करने के बाद उसके पास से मिले बैग को खोलकर देखा गया तो उक्त बैग में बीते दिनों कासगंज में पुलिसकर्मियों से लूटी गई इन्सास रायफल कपड़े में लिपटी हुई मिली.

UP News: कासगंज में दबंग प्रधान ने हाथ पैर बांधकर 3 लोगों को दी तालिबानी सजा, FIR

कासगंज में दबंग प्रधान ने हाथ पैर बांधकर 3 लोगों को दी तालिबानी सजा

कासगंज के एसपी (SP) रोहन पी बोत्रे ने बताया कि रस्सियों में बंधे व जमीन पर लेटे हुए कुछ 3 लोगों का वीडियो वायरल हुआ है.

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कासगंज. उत्तर प्रदेश के कासगंज (Kasganj) ज‍िले में रविवार को सनसनीखेज मामला सामने आया है. ज‍िले में दबंग ग्राम प्रधान ने तालिबानी तरीके से 3 लोगों को रस्सियों से हाथ पैर बांधकर जमकर पीटा. पीड़ितों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है कि दबंग प्रधान की ओर से एक प्लॉट पर जबरन निर्माण कार्य कराया जा रहा था. प्लॉट के असली मालिक को जब इस बात की जानकारी हुई तो वह मौके पर पहुंचकर निर्माण का विरोध करने लगा.

विरोध बढ़ता देख दबंग प्रधान ने अपने दर्ज़नभर गुर्गों के साथ मिलकर निर्माण का विरोध कर रहे पक्ष के तीन लोगों को जमकर पीटा. इसके बाद रस्सियों से एक पोल के साथ बांध द‍िया. मामले की जानकारी होते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने पीड़ितों की रस्सियों को खोलकर उन्हें कासगंज के जिला चिकित्सालय में इलाज के लिए भर्ती कराया.

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पीड़ित गोपाल ने बताया कि ग्राम वाहिदपुर उनका पैत्रक गांव है. वहां उनकी संपत्‍त‍ि है. लेकिन वर्तमान में वह अपने पैत्रक गांव वाहिदपुर से 7 किलोमीटर दूर कस्बा बिलराम में रहते हैं. जब उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि वाहिदपुर का दबंग प्रधान उनके प्लॉट पर अवैध कब्जे के साथ निर्माण कर रहा है तो वह तत्काल ही ओमवीर और दिनेश के साथ मौके पर जा पहुंचे. निर्माण का विरोध करने पर दबंग प्रधान ने अपने दर्जन भर गुर्गों के साथ मिलकर उन्हें और ओमवीर और दिनेश को अलग अलग रस्सियों में बांधकर बुरी तरह पीटा. उन्होंने बताया कि अगर समय पर पुलिस न पहुंचती तो उनकी मौके पर ही हत्या भी हो सकती थी.

आरोपियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई- एसपी
कासगंज के एसपी रोहन पी बोत्रे ने बताया कि रस्सियों में बंधे व जमीन पर लेटे हुए कुछ 3 लोगों का वीडियो वायरल हुआ है. संज्ञान में आया है कि थाना ढोलना अंतर्गत ग्राम वाहिदपुर में किसी प्लॉट को लेकर कोई विवाद था, जिसमें हाथापाई की सूचना है. मामले की जांच पड़ताल की जा रही है. एसपी के मुताबिक, तहरीर व जांच के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में कार्रवाई की जाएगी.

UP Live News Update: स्वतंत्रता दिवस पर कासगंज में तिरंगा यात्रा की अनुमति नहीं

UP: कासगंज में जिला प्रशासन ने तिरंगा यात्रा की अनुमि नहीं दी है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

Uttar Pradesh News, 14th August 2021: उत्तर प्रदेश के कासगंज में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा यात्रा नहीं निकाली जा सकेगी. जिला प्रशासन द्वारा 72 लोगों को पाबंद किया गया है. दरअसल 26 जनवरी, 2018 को जिले में तिरंगा यात्रा के दौरान हिंसा हुई थी. तभी से प्रशासन गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा यात्रा की अनुमति नहीं देता है.

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UP Live News Update: उत्तर प्रदेश के कासगंज (Kasganj) में स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के अवसर पर तिरंगा यात्रा नहीं निकाली जा सकेगी. जिला प्रशासन द्वारा 72 लोगों को पाबंद किया गया है. दरअसल तीन साल पहले 26 जनवरी 2018 को जिले में तिरंगा यात्रा के दौरान हिंसा हुई थी. तभी से प्रशासन एहतियातन गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा यात्रा की अनुमति नहीं देता है. पुलिस की टुकड़ियां सुरक्षा इंतजाम और चौकसी के साथ शहर में गली-गली पैदल मार्च कर रही हैं. एसपी रोहन प्रमोद बोत्रे ने जिले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं.

Sawan 2021: जब 8 लाख की 'जमानत' पर लौटे महादेव, जानिए कासगंज के इस मंदिर का रहस्य

Sawan 2021: जब 8 लाख की 'जमानत' पर लौटे महादेव (File photo)

मूर्ति (Statue) वापस लाने के लिए सोरों और आस पास के कई ग्रामीण भारी संख्या में एकत्रित होकर अलीगढ़ (Aligarh) के पाली मुकीमपुर थाने में जा पहुंचे, पर पुलिस ने उन्हें मूर्ति वापस नहीं दी.

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कासगंज. यूपी के कासगंज (Kasganj) जिले के तीर्थ नगरी सोरों में महादेव (Mahadev) का एक ऐसा मंदिर है. जहां 8 लाख की ‘जमानत’ पर बाबा भोलेनाथ अपने पुराने मंदिर में वापस लौटे हैं. हम बात कर रहे हैं तीर्थ नगरी सोरों के भागीरथी गुफा के सामने बने वन खंडेश्वर महादेव मंदिर की. जहां करीब 48 वर्ष पूर्व चोरों ने मंदिर से मूर्ति को चुराकर अलीगढ़ ले गए थे, उसके बाद मूर्ति को वापस लाने के लिए तीर्थ नगरी सोरों के भक्तों को 8 लाख की जमानत देनी पड़ी थी.

बता दें कि आज से करीब चार दशक पूर्व 26 फरवरी 1973 को वन खंडेश्वर महादेव मंदिर की बेहद शिल्पित और 4 फिट ऊंची लंबी मूर्ति को अलीगढ़ के आधा दर्जन चोर चुरा कर ले गए थे. इस अति प्राचीन मूर्ति के चोरी होने से स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश पनप गया था. थाना सोरों में मूर्ति चोरी का अभियोग पंजीकृत कराया गया. बताया जाता है कि मूर्ति को चुराने वाले चोर एक के बाद एक संक्रामक बीमारियों से मरने लगे, घबराए चोरों ने अलीगढ़ के थाना पाली मुकीमपुर में खबर भेजी कि वह उनके द्वारा चोरी की गयी मूर्ति को बरामद कर ले जाएं.

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चोरी की वारदात के बीस वर्ष बाद 22 मई 1993 को पाली मुकीमपुर थाना में अभियोग संख्या 59/1993 के अंतर्गत चोरों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्रवाई की गयी थी. तत्पश्चात इस चमत्कारी मूर्ति को पुलिस ने थाना परिसर में ही स्थापित कर दिया था. सोरों वासियों को कैसे भी खबर लग गयी कि उनके यहां से चोरी हुई मूर्ति अलीगढ़ के पाली मुकीमपुर थाना परिसर में स्थापित है. मूर्ति वापस लाने के लिए सोरों और आस पास के कई ग्रामीण भारी संख्या में एकत्रित होकर अलीगढ़ के पाली मुकीमपुर थाने में जा पहुंचे, पर पुलिस ने उन्हें मूर्ति वापस नहीं दी.

कोर्ट का खटखटाया दरवाजा
मूर्ति पाने की दावेदारी के लिए सोरों वासियों ने अलीगढ़ के अदालत का दरवाजा खटखटाया. वाद संख्या 256/1999 के अंतर्गत चली सुनवाई और पेश किये गए सुबूतों के आधार पर अलीगढ़ की अदालत ने यह तय किया कि 8 लाख रुपये की जमानत पर ही इस मूर्ति को दावेदारों के सुपर्द किया जायेगा. भगवान को पाने के लिए 8 लाख रुपये की जमानत देनी होगी. यह सुनकर यहां के बाशिंदे अवाक रह गए. अदालत के फैसले के बाद 4 जमानतदारों जिनमें श्यामपुरी, शिवपुरी, मुरारी व सुभाष उर्फ पप्पू चौधरी ने अपनी अपनी 2-2 लाख की भूमि को बंधक कराकर आज से 20 वर्ष पूर्व मूर्ति को आजाद कराया था. जिसके बाद बड़े ही हर्षोल्लास के साथ फिर उसी मंदिर में वनखण्डेश्वर महादेव की मूर्ति को पुनः विधि विधान से स्थापित किया गया. जहां से वो चोरी हुए थे, आज भी यहां भगवान वनखण्डेश्वर महादेव जमानत पर चल रहे हैं.

UP: सरकारी एम्बुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से मरीज की तड़प कर मौत, ड्राइवर-हेल्पर फरार

UP: कासगंज में सरकारी एंबुलेंस में ऑक्सीजन अचानक खत्म होने से एक मरीज की मोत हो गई.

Kasganj News: कासगंज के सीएमओ डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि जिस मरीज की मौत हुई है, वह पूर्व से ही टीबी का मरीज था. उसकी हालत बेहद क्रिटिकल थी, इसलिए उसे कासगंज से अलीगढ़ को रेफर किया गया था. एम्बुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने के मामले की गंभीरता से छानबीन की जाएगी.

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कासगंज. उत्तर प्रदेश के कासगंज (Kasganj) जिले में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) की बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां एक सरकारी एंबुलेंस (Government Ambulance) से रेफर किए गए युवक की ऑक्सीजन (Oxygen) रास्ते में खत्म होने से तड़प-तड़प कर मौत (Death) हो गई. युवक को कासगंज के सरकारी अस्पताल से अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था. वहीं, हादसे के बाद एंबुलेंस का ड्राइवर और हेल्पर मौके से फरार हो गए.

बताया जाता है कि जैसे ही एम्बुलेंस ऑक्सीजन सपोर्ट मरीज को कासगंज के सरकारी अस्पताल से निकली. 5 किलोमीटर बाद ही एम्बुलेंस में लगे सिलेंडर की ऑक्सीजन अचानक से खत्म हो गई. ऑक्सीजन खत्म होते ही मरीज की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गयी. जैसे ही मरीज की मौत हुई, वैसे ही एम्बुलेंस को छोड़कर उसके ड्राइवर और हेल्पर मौके से फरार हो गए.

मरीज की मां शकुंतला देवी ने बताया कि उनके बेटे नंदकिशोर को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, इसलिए उसे 5 अगस्त की दोपहर को कासगंज के जिला अस्पताल में भर्ती कराया था. यहां से उसे बेहतर उपचार के लिए कासगंज के ही एक दूसरे सरकारी अस्पताल अशोक नगर, सीएचसी में भर्ती कराया गया.

हालत में सुधार न होने के चलते अशोक नगर सीएचसी से बेटे नंदकिशोर को सरकारी एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया. करीब 5 किलोमीटर की दूर आते ही अचानक से एम्बुलेंस में लगे सिलेंडर की ऑक्सीजन खत्म हो गई. ऑक्सीजन खत्म होने से उसकी सांस उखड़ने लगी. एम्बुलेंस के ड्राइवर ने कहा कि एम्बुलेंस में लगे सिलेंडर की ऑक्सीजन खत्म हो गई है. ऑक्सीजन की कमी से उसमें सवार मरीज नंदकिशोर की कुछ ही देर में मौके पर ही मौत हो गई.

मरीज के भाई ने बताया कि जैसे ही उसके भाई की मौत हुई, वैसे ही एम्बुलेंस के ड्राइवर और हेल्पर मौके से फरार हो गए. उसका आरोप है कि सरकारी एम्बुलेंस के ड्राइवर ने उनसे एम्बुलेंस और ऑक्सीजन को लेकर 1200 रुपये भी मांगे थे.

वहीं मामले में कासगंज के सीएमओ डॉ अनिल कुमार ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी के चलते जिस मरीज की रास्ते में मौत हुई है, वह  पूर्व से ही टीबी का मरीज था. उसकी हालत बेहद क्रिटिकल थी, इसलिए उसे कासगंज से अलीगढ़ को रेफर किया गया था. जहां तक एम्बुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने का सवाल है, तो वह इस मामले की गंभीरता से जांच पड़ताल करेंगे. वैसे एम्बुलेंस कर्मियों की हड़ताल के बाद नए ड्राइवर की भर्ती हुई है. नए ड्राइवर अभी पूरी तरह से प्रशिक्षित नहीं हैं, इसलिए भी इस तरह की घटना होना संभव है.

UP News Live Update: HC में गोरखपुर के डॉ कफील खान की याचिका पर सुनवाई आज

UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज डॉ कफील खान की याचिका पर सुनवाई होगी. (File Photo)

Uttar Pradesh News, 4 August, 2021 Live: गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ कफील खान की याचिका पर सुनवाई आज हाईकोर्ट में होनी है. कोर्ट ने दोपहर 3:30 बजे याचिका नवीन वाद के रूप में पेश करने का निर्देश दिया है. जस्टिस गौतम चौधरी की एकल पीठ मामले की सुनवाई करेगी. कफील खान ने सीएए/एनआरसी मुद्दे पर अलीगढ़ में भड़काऊ भाषण देने के मामले में दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की है.

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UP News Live Update: गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ कफील खान की याचिका पर सुनवाई आज हाईकोर्ट में होनी है. कोर्ट ने दोपहर 3:30 बजे याचिका नवीन वाद के रूप में पेश करने का निर्देश दिया है. जस्टिस गौतम चौधरी की एकल पीठ मामले की सुनवाई करेगी. दरअसल कफील खान पर सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर अलीगढ़ में भड़काऊ भाषण देने के मामले में एनएसए लगा था. हाईकोर्ट ने पिछले साल ही एनएसए को रद्द कर दिया था. डॉ कफील की याचिका में अलीगढ़ में दर्ज FIR को भी रद्द किए जाने की मांग की गई है.

UP: 4 जिलों के SP सहित 7 आईपीएस अफसरों का ट्रांसफर, देखें लिस्ट

यूपी में 7 आईपीएस अफसरों के तबादले हुए हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

UP News: यूपी सरकार ने 7 आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर कर दिए हैं, इनमें सिद्धार्थनगर, जालौन, कासगंज और हमीरपुर के एसपी भी बदल दिए गए हैं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 आईपीएस अफसरों (7 IPS Transfer) के ट्रांसफर कर दिए हैं. इनमें 4 जिलों के कप्तान भी बदले गए हैं. जिन जिलों में एसपी पद पर फेरबदल किया गया है, उनमें सिद्धार्थनगर, जालौन, कासगंज और हमीरपुर शामिल हैं. गृह विभाग द्वारा जारी ट्रांसफर लिस्ट के अनुसार यशवीर सिंह एसपी सिद्धार्थनगर बनाए गए, यहां अब तक तैनात रहे राम अभिलाष त्रिपाठी को एसपी, ग्रामीण अभिसूचना, गोरखपुर भेज दिया गया है. बता दें यशवीर सिंह अभी तक जालौन में एसपी पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, वहां अब उनकी जगह  रवि कुमार को एसपी जालौन भेजा गया है.

इनके अलावा बोत्रे रोहन प्रमोद एसपी कासगंज होंगे, जबकि कमलेश कुमार दीक्षित एसपी हमीरपुर बने. इनके अलावा राम अभिलाष त्रिपाठी एसपी अभिसूचना गोरखपुर बनाए गए हैं, जबकि मनोज सोनकर सेनानायक 12वीं पीएसी फतेहपुर और नरेंद्र कुमार सिंह सेनानायक 15वीं पीएसी आगरा भेजे गए हैं.

ट्रांसफर लिस्ट

यशवीर सिंह- एसपी जालौन से एसपी सिद्धार्थनगर

रवि कुमार- पुलिस उपायुक्त, लखनऊ से एसपी जालौन

बोत्रे रोहन प्रमोद- अपर पुलिस अधीक्षक, नगर आगरा से एसपी कासगंज

कमलेश कुमार दीक्षित- एसपी ग्रामीण, अभिसूचना, गोरखपुर से एसपी हमीरपुर

7 आईपीएस अफसरों की ट्रांसफर लिस्ट

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आईपीएस ट्रांसफर लिस्ट


राम अभिलाष त्रिपाठी- एसपी सिद्धार्थनगर से एसपी ग्रामीण अभिसूचना, गोरखपुर

मनोज सोनकर- एसपी, कासगंज से सेनानायक, 12वीं वाहिनी पीएसी, फतेहपुर

नरेंद्र कुमार सिंह- एसपी हमीरपुर से सेनानायक, 15वीं वाहिनी पीएसी, आगरा

इनपुट: ऋषभ मणि त्रिपाठी

Kasganj News: महिला सिपाही ने की फांसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश, कोतवाल पर गंभीर आरोप

कासगंज में एक महिला सिपाही ने फांसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश की है.

Kasganj News: पीड़ित महिला सिपाही वैशाली ने बताया कि वह अकेली महिला सिपाही नहीं है, जो प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार मीणा से परेशान है. पिछले 1 महीने से राजेश कुमार मीणा कोतवाली में तैनात सभी महिला सिपाहियों को लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं.

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कासगंज. उत्तर प्रदेश के कासगंज (Kasganj) जिले में एक महिला सिपाही ने अपने ही कोतवाल से परेशान होकर आत्महत्या करने की कोशिश (Attempt to Suicide) की. महिला सिपाही की हालत नाजुक बनी हुई है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उधर इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है. महिला सिपाही ने अपने कोतवाल राजेश कुमार मीणा पर पिछले 1 महीने से लगातार प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. फिलहाल घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भी पहुंच गए. अब देखना होगा के आरोपी प्रभारी निरीक्षक पर पुलिस अधीक्षक कार्रवाई करते हैं या पीड़ित महिला सिपाही पर ही गाज गिराई जाएगी.

महिला सिपाही का आत्महत्या के प्रयास का मामला कासगंज जिले के कोतवाली सहावर का है. यहां तैनात वैशाली पुंडीर नामक महिला सिपाही ने अपने कोतवाल राजेश कुमार मीणा से लगातार प्रताड़ित होने से परेशान होकर आत्महत्या करने का प्रयास किया. इतना ही नहीं उसने आत्महत्या के प्रयास करने से पहले ही एक सुसाइड नोट भी लिखा है. उसने लिखा है, “मैं अपने प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार मीणा से तंग आकर आत्महत्या कर रही हूं. इसकी जिम्मेदार सिर्फ राजेश कुमार मीणा है.”

बताया जाता है कि महिला सिपाही की ड्यूटी बैंक पर लगाई गई थी लेकिन निजी परेशानी की वजह से उसने कोतवाल से निवेदन किया. उसने बताया कि वह पर्सनल परेशानी से ग्रसित है इसलिए उसे कुछ घंटों के लिए ड्यूटी से छूट दी जाए. लेकिन उसके बावजूद भी आरोपी राजेश कुमार मीणा ने पीड़ित महिला सिपाही को यह कहकर भगा दिया कि यह परेशानी तुम्हे अकेली को नहीं है, सभी महिलाओं को होती है. जाकर अपनी ड्यूटी करो.

इसी बात से क्षुब्ध होकर पीड़ित सिपाही ने अपने आवास पर जाकर फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की और फांसी लगाने से पहले उसने आरोपी प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार मीणा के खिलाफ  सुसाइड नोट भी लिखा है. पीड़ित महिला सिपाही वैशाली ने बताया कि वह अकेली महिला सिपाही नहीं है, जो प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार मीणा से परेशान है. पिछले 1 महीने से राजेश कुमार मीणा कोतवाली में तैनात सभी महिला सिपाहियों को लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं. इसकी वजह से मेरे अलावा और अन्य महिला सिपाही भी परेशान हैं.

पीड़ित सिपाही वैशाली पुंडीर ने आरोपी प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार मीणा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. अब देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक इंस्पेक्टर राजेश कुमार मीणा के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं? या फिर पीड़ित महिला सिपाही पर ही गाज गिरती है.

कोरोना टीकाकरण में रिकॉर्ड तोड़ रहा UP, जानिए अब तक के 5 टॉप और फिसड्डी जिले

यूपी में एक जुलाई से वैक्सीनेशन का महा अभियान शुरू होने जा रहा है.

Vaccination in UP: उत्तर प्रदेश में टीकाकरण अभियान में कई जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है. अभियान में लखनऊ टॉप पर चल रहा है. वहीं चित्रकूट ज़िला कोरोना टीकाकरण में सबसे फिसड्डी है.

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लखनऊ. कोरोना की जंग को जीतने के लिए उत्तर प्रदेश में टीकाकरण का अभियान (Vaccination Drive) ने बेहद तेज रफ्तार से चल रहा है. तेजी का आलम ये है कि इस महीने सरकार ने लक्ष्य रखा था कि एक करोड़ टीका उत्तर प्रदेश के लोगों को लगा दिया जाएगा. वह लक्ष्य उत्तर प्रदेश ने 6 दिन पूरे पहले ही पूरा कर लिया है. अब 1 जुलाई से अब रोजाना 10 लाख लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है. 31 जुलाई 2021 तक पूरे उत्तर प्रदेश को वैक्सीन लगा लेने का लक्ष्य रखा गया है.

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ देवेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि वैक्सीनेशन को लेकर हमारी तैयारियां पूरी हैं. साथ में हम तीसरी लहर से भी लड़ने के लिए तैयार हैं. हमारे तमाम ग्राउंड स्टाफ ट्रेंड किए जा चुके हैं. साथ ही उन्हें बात की ताकीद की गई है कि वैक्सीनेशन को लगातार प्राथमिकता पर रखा जाए.

वैसे इस टीकाकरण अभियान में कई जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है. उन्होंने लगातार नया रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन कई जिले ऐसे भी हैं, जिनका प्रदर्शन नाकाफी है. टीकाकरण अभियान में लखनऊ टॉप पर चल रहा है. वहीं चित्रकूट ज़िला कोरोना टीकाकरण में सबसे फिसड्डी है.



आइए जानते हैं टॉप-5 जिले

1- लखनऊ 13,28,311 कोरोना टीकाकरण

2- गौतम बुद्ध नगर में अब तक 10,97,946 वैक्सीनेशन

3- गाजियाबाद में 9,40,523 वैक्सीनेशन

4- मेरठ में 8,90,893 वैक्सीनेशन

5- कानपुर नगर में 8,40,530 लोगों का वैक्सीनेशन हुआ.

ये हैं टॉप-5 फिसड्डी ज़िले

1- चित्रकूट में अब तक 1,08,227 लोगों का हुआ वैक्सीनेशन ।

2- कासगंज में 1,37,836 लोगों का हुआ वैक्सीनेशन

3- ललितपुर में 1,46,308 लोगों का हुआ वैक्सीनेशन

4- कौशांबी में 1,56,200 लोगों का हुआ वैक्सीनेशन

5- औरैया में 1,50,426लोगों का हुआ वैक्सीनेशन

कासगंज: जब गांव के लोगों ने कर दिया इनकार, तब 96 साल की दादी ने दिखाई टीकाकरण की राह

कासगंज में एक 96 साल की बुजुर्ग महिला ने टीकाकरण कराकर अपने पूरे गांव को राह दिखा दी.

Vaccination in UP: कासगंज जिले में एक 96 वर्ष की बुजुर्ग महिला कोरोना वैक्सीनेशन की 'ब्रांड एम्बेस्डर' बन गई हैं. जिस गांव में लोग टीका नहीं लगवा रहे थे, वहां बुजुर्ग दादी के टीका लगवाते ही 176 लोगों का वैक्सीनेशन हो गया.

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कासगंज. उत्तर प्रदेश के कासगंज (Kasganj) के एक गांव में कोरोना टीकाकरण (Corona Vaccination) को लेकर तमाम भ्रांतियां थीं. काफी समझाने के बाद भी जब गांव के लोग टीकाकरण को राज़ी नहीं हुए तो गांव की 96 साल की बुजुर्ग महिला ने सबसे पहली टीका लगवाकर लोगों को समझाया. बुजुर्ग दादी के टीका लगाने के बाद अधिकारियों के कहने पर नहीं मान रहे ग्रामीण फौरन टीकाकरण कराने में जुट गए.

जिले के गांव खड़ेरी में चल रहे कोरोना टीकाकरण के दौरान एक दादी ब्रांड एम्बेस्डर बनकर सामने आयीं हैं. जहां स्वास्थ्यकर्मियों और अधिकारियों के तमाम मान मनौव्वल के बावजूद भी गांव के लोग टीकाकरण के लिए राजी नहीं हुए. उस वक्त एक 96 साल उम्र की दादी आधार कुमारी ने सामने आकर सबसे पहले खुद को टीका लगवाया. टीका लगवाकर दादी ने गांव के सभी लोगों को टीके के फायदे गिनाये और कुछ इस तरह समझाया कि लोग टीकाकरण के लिए राज़ी हो गए.

कासगंज के तहसीलदार अजय कुमार ने बताया कि मंगलवार को वह टीकाकरण करने वाली एक टीम के साथ दतलाना पंचायत के ग्राम नगला खड़ेरी में पहुंचे हुए थे. टीकाकरण टीम को देखकर गांव के लोग अपने घरों को छोड़कर छुपने के लिए पेड़ों के पीछे और खेतों की ओर भागने लगे. वहां उपस्थित अधिकारियों और स्वास्थय कर्मियों ने गांव वालों को थोड़ा भरोसे में लेकर जैसे-तैसे अपने पास बुलाया और टीका लगवाने के लिए काफी समझाने का प्रयास किया. लेकिन तमाम मान मनौव्वल के बावजूद भी गांव के लोग टीकाकरण के लिए राजी नहीं हुए.

टीका लगवाने खुद आगे आईं बुजुर्ग आधार कुमारी

kasganj woman, vaccination
कासगंज में एक 96 साल की बुजुर्ग महिला ने टीकाकरण कराकर अपने पूरे गांव को राह दिखा दी.


तब एक 96 साल उम्र की दादी जिनका नाम आधार कुमारी पत्नी सोनपाल है, ने आगे आकर सबसे पहले टीका लगवाया. बाद में दादी की अपील पर एक के बाद एक गांव के अन्य लोगों ने भी टीका लगवाना शुरू कर दिया.

सामुदायिक स्वास्थय केंद्र सोरों के चिकित्सा अधीक्षक हरीश कुमार ने बताया कि गांववालों को दादी के समझाने का असर कुछ इस कदर हुआ कि 250 की कुल आबादी वाले इस गांव खड़ेरी में अब तक 176 लोगों ने कोरोना का टीका लगवा लिया है. दादी की अपील के बाद पहले ही दिन गांव खड़ेरी में 136 लोगों का टीकाकरण हुआ तो वहीं अगले दिन बुधवार की शाम तक कुल 176 लोगों ने अपना टीकाकरण करा लिया था.

टीका लगवाकर बोलीं- देखो क्या मुझे कुछ हुआ?

kasganj woman, vaccination
टीका लगवातीं बुजुर्ग आधार कुमारी


अन्य अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने यह भी बताया कि जब दादी ने टीकाकरण को लेकर गांव वालों को प्यार से यह समझाया कि देखो मैं कितनी बूढ़ी हूं. मैंने भी तो टीका लगवाया है. क्या मुझे कुछ हुआ? मैं पहले की तरह ही स्वस्थ हूं इसलिए आप सभी गांव के लोग अपने अन्दर पल रही अफवाहों और भ्रांतियों को मिटाकर अपने जीवन की रक्षा के बारे में सोचते हुए टीकाकरण तत्काल कराएं. दादी की इस अपील के बाद गांव के सभी लोग टीकाकरण कराने के लिए राज़ी हो गए.

गंगा किनारे बसे इस छोटे से गांव खड़ेरी में दादी आधार कुमारी विल्कुल अकेली एक टूटे से झोपड़े में रहती हैं. उनका बेटा उनसे अलग दूसरे घर में रहता है. दैनिक क्रियाकलाप करने के साथ दादी अपना भोजन खुद पकातीं हैं. गांव में उनके स्नेहपूर्ण व्यवहार से सभी लोग उन्हें बेहद आदर की दृष्टि से देखते हैं. उम्र के 9 दशक पार कर चुकीं दादी गांववालों के लिए अचार व्यवहार हिम्मत हौसला और आदर्श की प्रेरणा स्रोत मानीं जातीं हैं.

UP का एक गांव, जहां न तो किसी ने वैक्सीन लगवाई न ही कराई कोरोना की जांच, ये है बड़ी वजह

उत्तर प्रदेश में 30 हजार की आबादी वाले एक गांव में किसी ने भी कोरोना का टीका नहीं लगवाया.

कासगंज जिले का एक गांव जिसकी आबादी 30 हजार है, इसके बावजूद भी एक व्यक्ति ने कोरोना का टीका नहीं लगवाया है और ना ही कोरोना की जांच कराई है.

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कासगंज. उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के एक गांव भरगैन के लोग भ्रांतियों के इस कदर शिकार हैं कि कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के भयावह दौर में भी इस गांव के किसी व्यक्ति ने कोरोना (Corona Virus) की जांच नहीं कराई. इतना ही नहीं इस गांव का कोई भी व्यक्ति कोरोना का अब तक टीका लगवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के कैंप में नहीं गया है. गांव की आबादी 30 हजार से अधिक है. आबादी वाले जहां समूची दुनिया कोरोना के कहर से कराह रही है, वहीं इस गांव में रहने वाले बाशिंदे इस बीमारी को महज एक अफवाह मानकर बैठे हैं. जिस दौर में सब जगह बेड और अस्पताल की कमी चल रही है, उस दौर में यहां के अस्पताल के गेट पर ताला लटका है.

जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMHO) अनिल कुमार का कहना है कि अभी बीते दिनों भरगैन में कोरोना की जांच और टीकाकरण को लेकर उन्होंने वहां की पंचायत अध्यक्षा व गांव के अन्य सभ्रांत नागरिकों के साथ एक बैठक का आयोजन किया था, लेकिन उन्होंने पहले किये गए प्रयास अब तक बेनतीजा नहीं रहे हैं. पटियाली क्षेत्र के चिकित्सा अधीक्षक विनोद शर्मा ने बताया कि भरगैन में टीकाकरण को लेकर उनकी टीमों में स्थानीय लोगों को टीका लगवाने के लिए मनाने की काफी कोशिश की गयी है. लेकिन तमाम मान मनौव्वल के बावजूद कोई भी टीका लगवाने को तैयार नहीं हुआ.

भरगैन स्वास्थय केंद्र की प्रभारी चिकित्सक डॉक्टर शिवाश्री तिवारी बतातीं हैं कि इस स्वास्थय केंद्र पर कोई काम न होने के चलते उन्हें हाल ही में भरगैन से हटाकर कासगंज अटैच कर दिया गया है, अभी जब बीते दिनों हर गांव गली घर-घर लोग बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहे थे, उस दौरान भी इस गांव का कोई भी व्यक्ति कोरोना की जांच कराने को तैयार नहीं हुआ, और अब टीका लगवाने के लिए भी लोग सामने नहीं आ रहे हैं. भरगैन के अधिशाषी अधिकारी कुलकमल सिंह ने बताया कि कोरोना जांच और टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने गली-गली मुनादी करवाई है, वहीं प्रशासन द्वारा नियुक्त निगरानी समितियां भी घर-घर जाकर लोगों को कोरोना जांच और टीकाकरण के लिए जागरूक कर रहीं हैं.

इस गांव से सम्बंधित अधिकतर फ्रंटलाइन वर्कर ने अपना टीकाकरण करा लिया है। वहीं भरगैन की पंचायत अध्यक्षा जैतून बानो के हवाले से उनके प्रतिनिधि पुत्र अहमद हुसैन ने बताया कि उनके गांव के जो पढ़े लिखे लोग गुजरात मुंबई या दिल्ली रहते हैं, उनके वहां जांच और टीकाकरण करने की जानकारी तो मिली है, लेकिन गांव में रहने वाले लोग अभी भ्रांतियों अफवाहों के शिकार बने हुयी हैं. कोरोना के दुष्प्रभावों व उससे बचाव को लेकर अभी भी लोगों को बेहतर तरीके से समझाने की जरुरत है. टीकाकरण की शुरुआत के लिए कासगंज स्वास्थय विभाग व जिलाप्रशासन को एक पहल और करनी चाहिए.
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