कौशाम्बी में दलित महिला अधिकारी को नहीं पिलाया पानी

बताया जाता है कि काफी देर तक पानी न मिलने से डायबिटीज की मरीज महिला अधिकारी की तबियत बिगड़ने लगी और वह समीक्षा बैठक बीच में ही छोड़कर जिला मुख्यालय वापस लौट गई.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 1, 2018, 4:01 PM IST
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Updated: August 1, 2018, 4:01 PM IST
छुआछूत को खत्म करने के लिए तमाम कानून भले ही बनाये गए हो लेकिन जाति व्यवस्था में जकड़ा समाज अभी भी इस बुराई से मुक्त नहीं हो पाया है. कौशाम्बी जिले में एक दलित महिला अधिकारी को इसलिए पानी नहीं पिलाया गया क्योंकि वह दलित वर्ग से है. महिला अधिकारी ने इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से करने के साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है.

कौशाम्बी जिले में तैनात उप पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सीमा मंझनपुर ब्लाक के अम्बावा पूरब गांव गई हुई थीं. विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान जब महिला की बॉटल का पानी खत्म हो गया तब उन्होंने ग्राम प्रधान और अपने साथ मौजूद पंचायत सेकेट्री से पानी पिलाने को कहा. महिला अधिकारी का आरोप है कि दलित होने के नाते उनके साथ भेदभाव किया गया और उन्हें पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया.

बताया जाता है कि काफी देर तक पानी न मिलने से डायबिटीज की मरीज महिला अधिकारी की तबियत बिगड़ने लगी और वह समीक्षा बैठक बीच में ही छोड़कर जिला मुख्यालय वापस लौट गई. महिला अधिकारी इसके लिए ऊंची जाति से संबंध रखने वाले पंचायत सेकेट्री और ग्राम प्रधान को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, लेकिन पंचायत सेकेट्री और ग्राम प्रधान का कहना है कि पानी की व्यवस्था की जा रही थी लेकिन महिला अधिकारी बीच में ही बैठक छोड़कर वापस लौट गईं. महिला अधिकारी के आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन दलित महिला अधिकारी ने जिस तरीके से आरोप लगाये हैं उससे समाज की जमीनी हकीकत सामने आ गई है.

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