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रेप पीड़िता को बिना केस दर्ज किए थाने से भगाया

ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 13, 2018, 9:08 PM IST
रेप पीड़िता को बिना केस दर्ज किए थाने से भगाया
रेप पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर
ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 13, 2018, 9:08 PM IST
कौशाम्बी जिले में एक रेप पीड़ित किशोरी के परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बिना मुकदमा दर्द किए पीड़िता को भला बुरा कहकर वहां से भगा दिया. पिछले एक महीने से इंसाफ के लिए रेप पीड़िता पुलिस के आलाधिकारियों से गुहार लगाती रही, लेकिन अफसरों से भी उसे इंसाफ नहीं मिला. आखिरकार पीड़िता के फरियाद पर जिलाधिकारी के आदेश के बाद मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़िता का मेडिकल कराया जा रहा है.

महिला अपराधों को लेकर प्रदेश की योगी सरकार ने भले की आला अफसरों को कार्रवाई के सख्त आदेश जारी किए हो, लेकिन कौशाम्बी जिले में पुलिस अधिकारी योगी के आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं. ऐसा ही एक बड़ा मामला पिपरी कोतवाली से सामने आया है, जहां दलित किशोरी के साथ रेप की घटना के बावजूद पुलिस ने मुकदमा नहीं दर्ज किया. आरोप है कि पीड़ित किशोरी जब अपने परिजनों के साथ शिकायत लेकर पिपरी थाने पहुंची तो न सिर्फ थानेदार साहब ने उसे भला बुरा कहा, बल्कि महिला कांस्टेबिल से उसे पिटवाने के बाद दुत्कार कर भगा दिया.

दरअसल छह दिसंबर की शाम खेतो की तरफ शौच को गई किशोरी के साथ गांव के ही युवक ने रेप किया. जिसके बाद किशोरी इंसाफ के लगातार पिछले एक महीने से दर-बदर की ठोकरें खाने को मजबूर थी. वहीं आरोपी युवक, किशोरी के परिवार वालों को जान से मारने के लिए धमकी दे रहा था. जिसके बाद 12 जनवरी को पीड़ित किशोरी अपने परिजनों के साथ कौशाम्बी के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा से मिली और आप बीती सुनाई.

डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर दीपक को चिट्ठी जारी करते हुए मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़ित किशोरी का मेडिकल चेकअप कराए जाने का आदेश दिया. जिसके बाद महिला कांस्टेबिल पीड़ित किशोरी को लेकर जिला अस्पताल पहुंची, लेकिन महिला डॉक्टर के अवकाश पर होने के चलते रेप पीड़िता का मेडिकल परीक्षण नहीं हो सका. अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर दीपक सेठ के मुताबिक 16 जनवरी को पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा.
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