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अयोध्या में इस दलित ने किया था राम मंदिर का शिलान्यास, अब कही ये बड़ी बात!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: October 17, 2019, 2:17 PM IST
अयोध्या में इस दलित ने किया था राम मंदिर का शिलान्यास, अब कही ये बड़ी बात!
नवंबर 1989 में राम मंदिर की नींव में पहली ईंट रखने वाले कामेश्वर चौपाल (File Photo)

Ayodhya Ram Mandir Case: अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir ) का शिलान्यास करने वाले कामेश्वर चौपाल (Kameshwar Chaupal ) ने कहा-वो क्षण मेरे और दलितों के लिए गर्व का विषय

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  • Last Updated: October 17, 2019, 2:17 PM IST
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नई दिल्ली. बात 9 नवंबर, 1989 की है. अयोध्या (Ayodhya) में वीएचपी (विश्व हिंदू परिषद) ने राम मंदिर (Ram Mandir) शिलान्‍यास कार्यक्रम आयोजित किया. साधु-संतों और बड़ी राजनैतिक हस्तियों के बीच 35 साल के एक दलित युवा को नींव की पहली ईंट (Foundation Stone) रखने के लिए चुना गया. उनका नाम था कामेश्वर चौपाल (Kameshwar Chaupal ). अयोध्या विवाद पर 134 साल की अदालती लड़ाई अब खत्म हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. ऐसे में न्यूज18 हिंदी ने चौपाल से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि वो पहली ईंट रखने वाला पल मैं जीवन भर  नहीं भूल पाउंगा. वो क्षण हमें हमेशा गर्व का एहसास करवाता रहता है. वो कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

कामेश्वर चौपाल अब 65 साल के हो चुके हैं. कहते हैं कि अब बहुत हो चुका, इस मसले पर जल्द से जल्द फैसला आना चाहिए. इस आंदोलन का हिस्सा कैसे बने? इसके जवाब में चौपाल बताते हैं कि श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के बैनर तले सीतामढ़ी से निकाली गई श्रीराम जानकी रथ यात्रा से इस आंदोलन में जुड़ा. इस समिति के अध्यक्ष थे महंत अवैद्यनाथ. 8 अप्रैल 1984 को विज्ञान भवन (Vigyan Bhawan) दिल्ली में मंदिर को लेकर जो धर्म संसद आयोजित की गई उसमें सक्रिय रूप से भागीदार रहा.

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9 नवंबर, 1989 को अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर शिलान्‍यास कार्यक्रम आयोजित किया (File Photo)


कैसे हुआ मंदिर का शिलान्यास

1989 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे. राम मंदिर को लेकर लगातार बन रहे राजनीतिक दवाब के बीच वो नहीं चाहते थे कि उनकी हिंदू विरोधी छवि बने. माना जाता है कि शाहबानों केस के बाद नाराज हिंदू वोटबैंक को लुभाने के लिए कांग्रेस पर दबाव था. इसलिए नवंबर 1989 में सरकार ने हिंदू संगठनों (Hindu Organizations) को विवादित स्थल के पास राम मंदिर शिलान्यास की इजाजत दे दी.

लेकिन कांग्रेस का दांव उल्टा पड़ता गया. बीजेपी मंदिर आंदोलन को हाईजैक कर चुकी थी. वीएचपी ने अयोध्या में मंदिर आंदोलन की धार तेज कर दी थी. जब अयोध्या में राम मंदिर के बनाने के लिए संघर्ष चल रहा था. तब वीएचपी के आह्वान पर लाखों लोग ईंट को लेकर अयोध्या पहुंच रहे थे. इसी में कामेश्वर चौपाल भी थे. उस वक्त चौपाल संघ में संयुक्त बिहार के सह सचिव थे.

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अयोध्या विवाद पर 134 साल की अदालती लड़ाई अब खत्म हो चुकी है!

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मंदिर की पहली ईंट रखवाने पर संतों को देते हैं धन्यवाद

सुपौल (बिहार) के रहने वाले चौपाल कहते हैं कि संतों द्वारा एक दलित व्यक्ति से मंदिर का शिलान्यास करवाना मेरे लिए वैसा ही था जैसे राम जी द्वारा शबरी को बेर खिलाना. यह ऐतिहासिक पल मेरे और दलितों के लिए गर्व का विषय है. इस काम ने चौपाल को इतना मशहूर कर दिया कि वे दो बार बिहार विधानसभा के सदस्य भी बने. इस समय वो बीजेपी की बिहार प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य हैं.

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First published: October 17, 2019, 2:13 PM IST
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