नीट में दूसरा स्थान लाकर कुशीनगर की आकांक्षा ने पूरी की घर की आकांक्षा

720 में 720 अंक हासिल करके भी उम्र कम होने की वजह से आकांक्षा (मां-पिता के बीच में) को मिला दूसरा स्थान.

आकांक्षा ने प्राइमरी से लेकर हाई स्कूल तक की पढ़ाई कुशीनगर के कसया नगर स्थित एक प्राइवेट स्कूल से की है. वह रोज 4 घंटे का सफर करके गोरखपुर जाकर कोचिंग अटेंड करती थीं.

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कुशीनगर. प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती है. छोटे-छोटे कस्बों से भी अब ऐसी प्रतिभाएं निकल रही हैं, जो पूरे देश में अपनी प्रतिभा का डंका बजा रही हैं. कुशीनगर (Kushinagar) की आकांक्षा सिंह (Akanksha Singh) ने भी कुछ ऐसा ही कारनामा किया है. आकांक्षा ने मेडिकल की नीट (NEET) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (all india rank) में दूसरा स्थान हासिल करके अपने परिवार के साथ ही प्रदेश का नाम भी रोशन किया है. आकांक्षा ने 720 में से 720 मार्क्स पाए, मगर उम्र कम होने की वजह से उन्हें दूसरा रैंक मिला. पहले रैंक पर रहे बच्चे को भी इतने ही अंक मिले हैं. प्राइमरी से लेकर हाई स्कूल तक की पढ़ाई उन्होंने कुशीनगर के कसया नगर स्थित एक प्राइवेट स्कूल से की है. वह रोज 4 घंटे का सफर करके गोरखपुर जाकर कोचिंग अटेंड करती थीं. आकांक्षा की सफलता से न केवल परिवार, बल्कि पूरा इलाका गौरवान्वित महसूस कर रहा है. लोग आकांक्षा से मिलने उसके घर पहुंच रहे हैं.

बेटी के सपने पूरा करने के लिए पिता ने लिया था वीआरएस

आकांक्षा के पिता राजेन्द्र कुमार राव ने अपनी बेटी के कैरियर को संवारने के लिए एयरफोर्स से वीआरएस ले लिया था. आकांक्षा की मां पेशे से प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका हैं. वे रोज अपनी बेटी के साथ स्कूटी से कोचिंग जाती थीं और रात में उसके आने का बस स्टॉप पर इंतजार करती थीं. अपनी बेटी की इस सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है. परिवार इससे खुश है कि जिस आकांक्षा के लिए उन्होंने इतना प्रयास किया, उसने उनकी आकांक्षा पूरी कर दी.

बेटी के साथ-साथ मां ने भी किया संघर्ष

आकांक्षा की सफलता जितनी बड़ी है, वैसा ही उसका संघर्ष और उसकी मेहनत की कहानी है. देश के छोटे-से कस्बे से आने वाली इस बेटी ने जो कर दिखाया है वह अपने आपमें एक नजीर है. अपनी बेटी के कैरियर को संवारने के लिए पिता ने एयरफोर्स से वीआरएस ले लिया और माता कई घंटों तक उसके आने का इंतजार करती थीं. आकांक्षा ने अभी अपने पिता के विश्वास और माता के संघर्ष को खाली नहीं जाने दिया. उसने भी कड़ी मेहनत और लगन से उनकी ख्वाहिश साकार की. आकांक्षा ने अपनी सफलता का श्रेय भगवान और अपने माता-पिता को दिया है.

साहसिक फैसले को सही साबित किया बेटी ने

कसया नगर के आंबेडकर नगर के रहने वाले राजेन्द्र कुमार राव और रुचि सिंह की दो संतानों में आकांक्षा बड़ी है. उसने ने कक्षा 9 से ही गोरखपुर स्थित आकाश इंस्टीट्यूट से कोचिंग शुरू कर दिया था. वह सप्ताह में 4 दिन रोडवेज बस से 70 किलोमीटर दूर गोरखपुर जाकर कोचिंग करती थी और रात 9 बजे तक लौटती थी. आकांक्षा के भविष्य को देखते हुए एयरफोर्स में सार्जेंट पद पर तैनात उसके पिता राजेन्द्र कुमार राव ने 2017 में वीआरएस लेकर उसके साथ दिल्ली चले गए थे. एक मध्यम वर्गीय परिवार के मुखिया द्वारा वीआरएस लेने का फैसला साहसिक था. पिता का कहना है कि बेटी की प्रतिभा को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय किया था, जिसे उसने सही साबित कर दिया.

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