Home /News /uttar-pradesh /

जिम्‍मेदार कौन: मौत आने तक भी नहीं जागा सिस्टम और होनहार अंकुर हार गया जिंदगी की जंग

जिम्‍मेदार कौन: मौत आने तक भी नहीं जागा सिस्टम और होनहार अंकुर हार गया जिंदगी की जंग

कुशीनगर के अंकुर की इलाज के अभाव में हुई मृत्यु. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

कुशीनगर के अंकुर की इलाज के अभाव में हुई मृत्यु. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

Kushinagar News: अंकुर के थके पिता ने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि या तो इलाज का इंतजाम करवा दीजिए या फिर बेटे को इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी जाए. अंकुर का मामला जब सुर्खियों में आया तो तंत्र जागा, लेकिन DM की ओर से भेजी गई फाइल CM कार्यालय पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो गई और अंकुर इस बेदर्द दुनिया को अलविदा कह गया.

अधिक पढ़ें ...

कुशीनगर. कई बार परेशानियां इस कदर जीवन में हावी हो जाती हैं कि मृत्यु ही एकमात्र उपाय नजर आने लगता है. ऐसी ही कुछ परेशानी कुशीनगर में रहने वाले अंकुर के सामने आई थी. पडरौना नगर के रहने वाले अंकुर की जिंदगी में सब सही चल रहा था, लेकिन एक दिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. चिकित्सकीय परामर्श में पता चला कि अंकुर के दोनों फेफड़े खराब हैं. इसके बाद शुरू हुआ इलाज और जिंदगी से जंग का सिलसिला. एक वक्त ऐसा भी आया कि अंकुर के थके पिता ने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि या तो इलाज का इंतजाम करवा दीजिए या बेटे को इच्छा मृत्यु दे दें. मामला सुर्खियों भी आया, लेकिन थोड़े दिन बाद कहीं खो गया. एक बार फिर अंकुर की तबीयत बिगड़ी और इस बार उन्‍हें किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ी. वह इस दुनिया को अलविदा कह गए.

पडरौना नगर के रहने वाले राकेश श्रीवास्तव के इकलौते पुत्र थे अंकुर श्रीवास्तव. अंकुर ने डिग्री कॉलेज से स्नातक करने के बाद अहमदाबाद स्थित माया एकेडमी ऑफ एडवांस सिनेमेटिक्स इंस्टीट्यूट में एनिमेशन ग्राफिक डिजाइन के कोर्स में दाखिला लिया था. एडमिशन लेने के तीन महीने बाद ही अंकुर की अचानक तबीयत खराब हुई, जिसके बाद उन्‍हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां पता चला कि उनके दोनों फेफड़े खराब हैं. परिजनों ने उन्‍हें दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराने का प्रयास किया, लेकिन वहां जगह न होने के कारण इलाज नहीं हो पाया. कलेजे के टुकड़े की जान बचाने के लिए मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान पिता की सारी जमा पूंजी खत्म हो गई. इलाज के लिए और रुपए की मांग की तो राकेश की हिम्मत जवाब दे गई. इसके बाद डॉक्टर्स ने अंकुर को राष्ट्रीय क्षय एंव स्वसन संस्थान (दिल्ली) में भर्ती कराने की सलाह दी.

डॉक्‍टर ने दिए दो विकल्‍प
राकेश अपने बेटे को मेदांता से लेकर वहां गए जहां डॉक्टर्स ने फेफड़ा सिकुड़ने की बात कही. डॉक्टर्स ने परिवार के आगे दो विकल्‍प रखे. या तो फेफड़ा बदलाओ या फिर अंकुर को घर ले जाओ. फेफड़ा बदलवाने के लिए 60 से 70 लाख रुपये का खर्चा बताया गया. अंकुर के पिता ​के लिए इतनी भारी रकम जुटाना मुश्किल था, क्योंकि वे पहले ही सबकुछ दांव पर लगा चुके थे. इस दौरान उन्हें कहीं से भी सहायता नहीं मिली. निराश होकर वे अंकुर को लेकर पडरौना आ गए.

Kushi Nagar

अंकुर श्रीवास्तव

बेदर्द नौकरशाह
राकेश बेटे के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से इलाज कराने की मांग करते रहे, लेकिन उनकी फरियाद कहीं भी नहीं सुनी गई. थक-हार कर उन्होंने अपने बेटे का कष्ट देखते हुए उसका इलाज कराने या फिर उसे इच्छा मृत्यु देने की मांग की थी, जिसके बाद कुछ हलचल हुई. उनके बेहतर इलाज की फाइल डीएम के टेबल से होते हुए सीएम कार्यालय तक पहुंच गई, लेकिन लापरवाह अफसरों ने उस फाइल पर गौर ही नहीं किया. राकेश लगातार अपने बेटे की जान बचने के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन एक बेबस पिता की आवाज हुक्मरानों के नक्कारखाने में दबकर रह गई.

…और पिता का उठ गया विश्‍वास
इन सबके बीच बीती रात तबीयत बिगड़ने पर अंकुर को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई. अंकुर की मौत के बाद टूट चुके पिता राकेश का कहना है कि लाचार व्यक्ति के लिए कोई नहीं है. न तो सरकार और न ही समाज. किसी ने उनकी मदद नहीं की, जिसके कारण उनके इकलौते पुत्र की मौत हो गई. अब सभी से विश्वास उठ गया है.

Tags: Kushinagar news, UP latest news

विज्ञापन
विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर